Horror
1) https://youtu.be/L0BPCUlp4qo?si=RwjHI1EAC4RAtGNw
दोस्तों, हम हर हफ्ते बड़ी मेहनत से आपके लिए एक दिल दहला देने वाली एनिमेटेड हॉरर स्टोरी बनाते हैं। तो अगर आप हमारी यानी खूनी मंडे चैनल की कहानियां एन्जॉय कर रहे हैं तो हमारे चैनल को सब्सक्राइब कीजिए और हमारी लेटेस्ट वीडियोस की नोटिफिकेशन के लिए बेल आइकॉन दबाना मत भूलना। [संगीत] लेबो हॉरर स्टोरी। मिलन अपने डॉग बायो के साथ चाइना के शघाई शहर में रहती थी। वैसे तो वो चाइना के एक छोटे से गांव से थी। पर अपने फादर की डेथ होने के बाद वो अपनी मां और बहन के लिए पैसे कमाने शघाई शिफ्ट हुई थी। मेलिन की पर्सनालिटी बहुत ही स्वीट सी थी और वो एक टॉय शॉप में काम करती थी। उसे टॉयज बहुत पसंद थे। लेकिन उन टॉयज में से उसे सबसे ज्यादा पसंद थी डॉल्स। क्योंकि वो एक टॉय शॉप में काम करती थी तो वो डिस्काउंटेड रेट्स पर अपनी मनपसंद डॉल्स ले लेती थी। उसके घर में अलग-अलग देशों से आई हुई यूनिक डॉल्स थी। एक दिन उसकी शॉप में एक लिमिटेड एडिशन लबुबू डॉल का कलेक्शन आया। जहां सारी डॉल्स आते ही बिक गई। एक डॉल मेलिन ने पहले से ही अपने लिए अलग रख ली थी। उस लबोवू डोल का कलर गोल्डन था। एक ऐसा शेड जो बाकी लबोवू डॉल से अलग था। वो डोल बहुत ही सुंदर थी। और उस लबोवू जितनी क्यूट स्माइल मेलिन ने पहले कभी नहीं देखी थी। मेलिन उस लबूबू डोल को अपने घर ले गई। वो उस दिन बहुत खुश थी और बस उस लबवू डोल को निहारती जा रही थी। उस डोल की प्यारी सी नीली आंखें, गोल्डन कलर का सुंदर सा फर, लंबे-लंबे कान और प्यारी सी बड़े-बड़े दांतों वाली स्माइल। मेलिन ने उस लबू को जोर से गले लगाया। उसकी ढेर सारी फोटो खींची और अपने डॉग बाऊ को उसकी डॉल फैमिली के नए मेंबर से इंट्रोड्यूस कराया। पर जहां बाऊ सारी डॉल्स को देखकर खुशी से अपनी पूंछ लाता हुआ पूरे कमरे में इधर-उधर भागता था। वहीं वो उस लबोवू डोल को देखकर बहुत जोरों से भौकने लगा, गुर्राने लगा। मेलिन को यह बात थोड़ी अजीब लगी। पर उसने सोचा कि बाओ शायद डर रहा होगा। तो उसने डॉल को अपनी शेलफ पर रखा और सोने चली गई। मेलिन का डॉग बाओ जो हमेशा उसके पास सोता था उस डोल को घोड़ता रहा और कमरे से बाहर भाग गया। अगली सुबह ऑफिस जाने से पहले बाऊ लबोबो को देखकर जोर से भौक रहा था। जैसे ही मेलिन घर से निकलने वाली थी, बाऊ ने उसकी जींस पकड़ ली और उसे खींच कर उसके शेलफ के पास ले जाने लगा। मेलिन ने बाओ को डांटा लेकिन वो सुन ही नहीं रहा था। मेलिन ने गुस्से में बाओ को बाथरूम में बंद कर दिया और शॉप के लिए निकल गई। उस दिन उसका अपने टॉय स्टोर में सबसे खराब दिन गुजरा। हमेशा सबसे प्यार से बात करने वाली मेलिन अपने कस्टमर से लड़ पड़ी और उसे पता नहीं उस पर इतना गुस्सा आ गया कि वह उसके ऊपर चिल्ला दी। उसके बॉस ने उसी वक्त मेलिन को बहुत डांटा और उसे काम से निकाल दिया। मेलिन को कुछ समझ नहीं आया कि उसे अचानक इतना गुस्सा कैसे आ गया। वो रोते-रोते वापस घर गई। उसने अपने बाथरूम का दरवाजा खोला। दिस इज अ ट्रू स्टोरी। वन 17 किड्स आउटसाइड एंड दे नेवर केम बैक आर यू लॉट पीपल स्टोरी दिस स्टोरी [संगीत] और तभी बाओ जोर से भागने लगा लेकिन रोती हुई मेलिन का चेहरा देखकर वो शांत हो गया और उसकी भी आंखों में आंसू आ गए। मेलिन उस रात जल्दी सो गई थी। सोते हुए उसे किसी की हंसी सुनाई दी। एक अजीब सी हंसी जो उसने कभी नहीं सुनी थी। तभी उसने देखा कि उसके कमरे के कोने में कोई खड़ा हुआ उसे घूर रहा है। अंधेरी की वजह से वो उसे ठीक से देख नहीं पा रही थी। उसने बिस्तर से उठकर देखा तो वहां कोई नहीं था। बस वहां वो लबो डोल पड़ी थी जिसे मेलिन ने वापस शेलफ पर रख दिया और फिर से सोने चली गई। उस रात मेलिन को एक सपना आया जिसमें वो अपने कमरे में थी और वहां एक बहुत ही अजीब सा दिखने वाला जानवर जैसा कुछ था जिसके बड़े-बड़े नुकीले दांत थे। भयानक लंबे और दांतों से भी ज्यादा नुकीले नाखून थे। और उसका पूरा शरीर लाल रंग का था। वो जगह-जगह से सड़ रहा था। धीरे-धीरे वो मेलिन के पास आ गया और उसका गला घोटने के लिए आगे बढ़ा। मेलिन डर के मारे जोर से चिल्लाई। पर वो जानवर उससे ज्यादा जोर से एक भयानक हंसी हंसने लगा और उसने अपने नुकीले पंजों से मेलिन पर अटैक कर दिया। डर के मारे मेलिन की आंख खुल गई। लेकिन तब उसने देखा कि वो लबोबू डोल उसके ऊपर बैठी है। मेलिन की चीख निकल गई। उसकी चीख सुनकर उसका कुत्ता बाओ भागता हुआ कमरे में आ गया। मेलिन को समझ नहीं आया कि वो लबो डोल जिसे उसने सोते हुए शेलफ पर रखा था वो उसके बेड पर कहां से आ गई। उसने ध्यान से उस डोल को देखा तो वो डोल अब पहले से ज्यादा हंस रही थी। मेलिन कुछ समझ पाती कि इससे पहले ही मेलिन के डॉग बां ने उस डोल को अपने दांतों से खींचा और उसने उसके चितड़े-चितड़े कर दिए। मेलिन पसीने से भीगी हुई थी और उसका सर दर्द से फट रहा था। इसलिए उसने बाओ को कुछ नहीं कहा। मेलिन ने उस लबू डोल को डस्टबिन में डाला और बाऊ को अपने पास बुलाकर फिर से सोने चली गई। जब वो सुबह उठी तो उसका सर पिछली रात से भी ज्यादा दर्द कर रहा था। साथ ही साथ उसके हाथों पर छोटे-छोटे लाल दाने आ गए थे। बाऊ भी कमरे में नहीं था। उसने बाऊ को आवाज लगाई पर उसको अपनी बात का कोई जवाब नहीं मिला। मेलिन हॉल में गई लेकिन बाओ वहां भी नहीं था। वो पूरा घर ढूंढने लगी। लेकिन वह कहीं नहीं मिल रहा था। आखिर में वह अपने बाथरूम में गई। बाव बाथरूम में भी नहीं था। लेकिन जब उसने अपना चेहरा शीशे में देखा तो उसका पूरा चेहरा उन छोटे-छोटे लाल दानों से भर गया था। ऐसा लग रहा था कि जैसे किसी ने उसे काटा हो। तभी बाथरूम मिरर में उसे दिखा कि उसके कंधे के पीछे कुछ भयानक सा था जो बिल्कुल उस जानवर के जैसा लग रहा था जो उसके सपने में आया था। और वो जोर-जोर से हंस रहा था। पर जैसे ही नीलन मुड़ी वहां कोई जानवर नहीं बल्कि बाथरूम के शेलफ के ऊपर लबुबो डॉल रखी थी। नीललिन को यह अपनी आंखों का धोखा लगा। उस लबूबो डॉल को तो उसके कुत्ते बां ने तहस-नहस कर दिया था। तो अब वो डोल वहां कैसे आ सकती थी? बल्कि अब उस डोल के चेहरे की स्माइल एक प्यारी सी स्माइल से बदलकर एक बहुत भयानक हंसी में बदल चुकी थी। मेलिन अब घबरा गई थी और वो बाऊ को आवाज देती हुई घर के बाहर चली गई लेकिन वो आसपास कहीं नहीं मिल रहा था। जब वो वापस घर में घुसी तो उसके होश उड़ गए। वो लबुवू डोल अब किचन के सिंक के पास पहुंच गई थी। उस डोल के हाथ और दांत लाल पड़े थे। जब मेलिन ने सिंख के नीचे देखा तो उसके रोंगटे खड़े हो गए। वहां उसके डॉग पाओव की बॉडी पड़ी थी और उसमें से खून बह रहा था। ऐसा लग रहा था कि जैसे उसको किसी ने बुरी तरह नोच खाया है। बाव मर चुका था और यह देखकर मेलिन की हालत खराब हो रही थी। उसे समझ आ गया था कि ये लबुवू डोल कोई आम डोल नहीं है। उसने इंटरनेट पर लबुवू डोल से जुड़ी इंफॉर्मेशन सर्च करनी शुरू कर दी। इंटरनेट पर उसने न्यूज़ पढ़ी तो कई लोगों को उनकी लबुवू डॉल्स हंट कर रही थी। पूरी दुनिया भर में लबुवू डॉल्स के ह्टेड होने के ऐसे कई केसेस सामने आ चुके थे। लबुवू डोल लोगों को बाइट कर रही थी और उनके साथ बुरी-बुरी चीजें घट रही थी। जैसे उनकी जॉब चली जाना, उनका बीमार हो जाना या उनके किसी करीबी की मौत। यह सब न्यूज़ पढ़कर मिलन और ज्यादा डर गई थी। उसे समझ आ गया था कि उसकी लबूबू डोल ह्टेड है। उसने देरी ना करते हुए डोल में आग लगा दी और उसकी राख को एक जार में डालकर पास की नदी में बहा दिया। उस रात यह सारा किस्सा उसने अपनी छोटी बहन को फोन पर बताया। मेलिन को लगा कि शायद अब उस लबू डोल से उसे छुटकारा मिल गया है। लेकिन अगली सुबह मेलिन के घर से उसकी डेड बॉडी मिली और उसकी बॉडी के पास वही लबोबू डोल पड़ी थी जिसे उसकी टॉय स्टोर में काम करने वाली एक फ्रेंड अपने साथ ले गई। आजकल कुछ लोग इंटरनेट पर यह भी कह रहे हैं कि लबू डोल एक बहुत ही खतरनाक और एक इविल डीमेन पजूजू का दूसरा रूप है। कई कंट्रीज में इन्हीं इंसिडेंट्स के चलते लबुवू को बैन कर दिया गया है। तो कई जगह लबुवू पर प्रीस्ट ने एग्जॉस्टिज्म भी किए हैं। दोस्तों आपको क्या लगता है? क्या लबुवू डोल सच में कर्स्ड है? क्या उसमें सच में एक डीमन है या यह सब बस एक अफवाह है? हमें कमेंट्स में जरूर बताइए। दोस्तों, पिछले साल हमने इंडिया का सबसे बड़ा हॉरर फेस्टिवल किया। हॉरर कौन? और आपने हमें उसके लिए खूब सारा प्यार दिया, सपोर्ट किया। आप वहां आए, अपने फेवरेट हॉरर क्रिएटर्स से मिले, खूब सारी मस्ती करी, खूब सारे हॉरर गेम्स खेले, खूब सारे हॉरर विलेन से मिले। हेलोन हम लोगों ने सबने साथ में मनाया। इस साल हम फिर से आपके लिए लेकर आए हैं हॉरर कॉर्न जो कि होने वाला है पिछले साल से और भी बहुत ज्यादा बड़ा क्योंकि इस साल हम पूरे दो दिन तक हॉरर को सेलिब्रेट करेंगे। आपके फेवरेट हॉरर स्टोरी टेलर्स आएंगे। हम एक हॉरर की पार्टी करेंगे जहां हम नाचेंगे, गाएंगे, मस्ती करेंगे और खूब सारे मजे करेंगे। तो आओ हॉरर कॉर्न में 25th अक्टूबर और 26 अक्टूबर को हो रहा है एनएसआईसी ओकला दिल्ली में। और दोस्तों, हॉरर कॉर्न के अपडेट्स के लिए हॉरर कॉर्न इंडिया का Instagram हैंडल अभी फॉलो कर लो। लिंक इन द पिन कमेंट। और अगर आपको हमारी कहानी पसंद आई तो सब्सक्राइब करिए खूनी मंडे को। [संगीत]
2) https://youtu.be/2nOe6wQd_qQ?si=0MAE6gKW6BAqKDc1
क्या आप एक ऐसा वरदान चाहोगे जिससे आप कुछ भी पा सकते हो अनगिनत पैसे कमा सकते हो अपना मन चाहे प्यार पा सकते हो बल्कि अपनी मौत को भी बदल सकते हो लेकिन उस वरदान की एक कीमत हो जो शायद आपसे आपका सब कुछ छीन ले। रिसेंटली मैंने Netflix पर मंडला मर्डर्स शो देखा। चरणदासपुर नाम के एक शहर में एक इंसान रहता है। उसके पास एक मशीन है जिसमें लोग एक मंडल के निशान वाला सिक्का डालते हैं। अपना अंगूठा उस मशीन में रखते हैं और उनका अंगूठा कट जाता है। लेकिन उनकी मांगी हुई हर ख्वाहिश पूरी हो जाती है। पर साथ ही उस शहर में बड़े अजीब से मर्डर्स हो रहे हैं। किसी का धड़ गायब है, किसी का हाथ तो किसी के पैर। पर सबके माथे पर एक मंडल का निशान है। वही निशान जो उस सिक्के पर था। हमारी आज की कहानी में भी ऐसे ही भयानक रहस्य छुपे हैं। साल 1980 उत्तर प्रदेश में घने जंगलों से घिरे नदी के किनारे बसे एक छोटे से शहर हरिपुर में कुछ ऐसा चल रहा था जो किसी भी इंसान की समझ से परे था। अमावस की रात थी। जगदीश नाम का एक लकड़हरा देर रात ही लकड़ियां काटने हरिपुर के जंगलों के लिए निकल गया था। वो जब वहां पहुंचा तो सुबह होने ही वाली थी। लेकिन वहां जाते ही उसे एक अजीब सी बदबू आई। जैसे कि कुछ जल रहा हो। इस डर से कि कहीं आग की वजह से पूरा जंगल ना जल जाए। वो जल्दी से जंगल के और अंदर भागा। जैसे-जैसे वो उस स्मेल के पास जा रहा था। उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे जंगल में कोई उसका पीछा कर रहा है। उसने कई बार चिल्लाकर पूछा कि वहां कौन है। पर उसे कोई जवाब नहीं मिला। तभी वहां ढेर सारा काला धुआं फैलने लगा। उस धुएं में जगदीश को एक औरत दिखी जिसने काली साड़ी पहनी थी। उसकी शक्ल उसके बालों से ढकी थी लेकिन उसकी आंखें लाल थी और उनमें एक अजीब सी चमक थी। जगदीश जैसे ही उसके करीब गया वो औरत एकदम से काले धुएं में कहीं गायब हो गई। कुछ ही देर में वो धुआं भी खत्म हो गया। लेकिन तब जगदीश ने जो देखा वो देखकर उसके रोंगटे खड़े हो गए। जंगल के बीचों-बीच उन्हीं के शहर के एक बहुत बड़े इंडस्ट्रियलिस्ट विष्णु की डेड बॉडी पड़ी थी। उसका धड़ यानी शरीर का ऊपरी हिस्सा गायब था। बस उसका सर, पैर और हाथ बचे थे जो किसी ने एक दूसरे से सिल दिए थे। और उसके माथे पर एक गोल सा निशान था जो किसी शैतान का सिंबल लग रहा था। साथ ही साथ विष्णु के दाहिने हाथ का अंगूठा गायब था। जगदीश भाग कर सीधा पुलिस के पास गया और उसने उन्हें सब बताया। यह 2 महीने में दूसरा ऐसा केस था। पिछली अमावस पुलिस को नदी के किनारे ऐसे ही एक और लाश मिली थी। शहर के एक छोटे-मोटे दुकानदार नीरज साहू की लाश। उसका भी दाहिने हाथ का अंगूठा नहीं था और उसके माथे पर भी वही शैतानी निशान मिला था। इस केस की इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर रवि देख रहे थे और ये केसेस देखकर उन्हें शक था कि उनके शहर में कुछ बहुत भयानक हो रहा है। पुलिस ने पूरा जंगल छान मारा लेकिन उन्हें कुछ नहीं मिला। रवि ने जब विष्णु और नीरज के केस के बारे में लोगों से पूछताछ की तो उन्हें पता चला कि विष्णु और नीरज दोनों का ही अंगूठा मर्डर से पहले ही कट चुका था। यह बात रवि को बहुत अजीब लगी। केस की इन्वेस्टिगेशन चल ही रही थी। पर अगली अमावस की रात कुछ ऐसा हुआ जिसने पूरे हरिपुर को हमेशा के लिए बदल दिया। उस रात अजय नाम का एक डॉक्टर काम करने के बाद हॉस्पिटल से घर वापस आया ही था। उसका हाल ही में कई साल बाद एक बेटा हुआ था। आम दिनों से हटकर उनके घर की सारी लाइट्स बंद थी सिवाय कुछ दियों के। अजय बार-बार अपनी बीवी को बुलाता रहा पर उसे कोई जवाब ही नहीं मिल रहा था और तभी एकदम से उसे महसूस हुआ जैसे कोई उसे देख रहा है। उसने दिया हाथ में पकड़ कर जब इधर-उधर घुमाया तो वहां कोई नहीं था। लेकिन तभी अचानक उसके सामने दो चमकती लाल आंखों वाली एक औरत आ गई। उसे देखते ही अजय बेहद डर गया और उसके हाथ से दिया छूट कर नीचे गिर पड़ा। उसने जैसे तैसे घर की लाइट्स ऑन की तो उसे दिखा कि उसके सामने काली साड़ी में एक औरत खड़ी है जिसके बाल बिखरे हुए हैं और वो अपनी चमकती लाल आंखों से उसे देखे जा रही है। जैसे ही अजय ने पूछा कि वो कौन है? वो औरत हवा में कहीं गायब हो गई। तभी अजय को अपने बच्चे के जोर-जोर से रोने की आवाज आई। वो भाग कर अंदर बेडरूम में गया तो उसने देखा कि उसका बेटा उनके बिस्तर के बगल में बैठा रो रहा है और बस उसी तरफ देख रहा है जहां से वो औरत गायब हुई। अजय जैसे ही अपने बेटे को उठाने के लिए नीचे झुका उसका खून सूख गया। बेड के नीचे उसकी बीवी की लाश पड़ी थी। बिल्कुल उसी हालत में उसका सर, उसके हाथ और उसके पैर एक दूसरे से जुड़े हुए थे। लेकिन उसका ऊपरी हिस्सा गायब था। उसके माथे पर वही शैतानी निशान बना था। अजय उसे देखते ही जोरों से रोने लगा। यह खबर तेजी से फैली और इंस्पेक्टर रवि अजय के घर पहुंचे। अजय की पत्नी का भी अंगूठा नहीं था। जब रवि ने अजय से इस बारे में पूछताछ की तो अजय ने उन्हें एक ऐसा सच बताया जिसे सुनते ही रवि का दिल दहल गया। अजय ने उसे बताया कि बहुत कोशिशों के बावजूद उनका बच्चा नहीं हो रहा था। किसी ने उसकी पत्नी को बोला कि जंगल में एक पुरानी गुफा है। वहां कुछ औरतें हैं जो जादू करती हैं। उनसे जाकर मिलोगी तो तुम्हारा काम हो जाएगा। अजय और उसकी पत्नी ने सोचा कि वो यह भी आजमा के देखेंगे। वो एक शाम जंगल के बीचोंबीच पहुंचे और उस गुफा को ढूंढने लगे और तभी एक जोर की हवा चलने लगी। उन्हें ऐसा लगा कि कोई उन्हें आवाज दे रहा है। कई औरतें इकट्ठे उसकी बीवी का नाम पुकार रही हैं। जब वो लोग उस आवाज के पीछे गए तो उन्हें एक गुफा दिखी। अजय और उसकी बीवी दोनों ही अंदर जाने लगे। लेकिन एक काली साड़ी पहनी औरत ने अजय को अंदर घुसने से रोक दिया और सिर्फ उसकी बीवी को अंदर भेज दिया। अजय गुफा के बाहर अपनी बीवी का इंतजार करने लगा। कुछ देर बाद उसे उसकी बीवी की एक चीख सुनाई दी। जब वो बाहर आई तो उसके दाहिने हाथ का अंगूठा नहीं था। अजय ने उससे बहुत पूछा कि अंदर उसने क्या देखा लेकिन उसकी बीवी ने उसे कुछ नहीं बताया। उसके कुछ ही दिनों में अजय की बीवी प्रेग्नेंट हो गई। उनका बच्चा तो हुआ लेकिन अजय की बीवी तब से ही अजीब ढंग से बर्ताव करने लगी थी। मानो कि वो किसी और के वश में ही हो। रवि को नीरज और विष्णु के केसेस में भी लोगों ने कुछ ऐसा ही बताया था। अजय ने रवि को कहा कि उसे लगता है कि उस गुफा में जो औरतें हैं वो असल में डायन है। और वो जादू नहीं काला जादू करती हैं। वो इंसान से उसका अंगूठा लेकर उसे अपने वश में कर लेती हैं। और फिर हर अमावस की रात वो किसी एक की बलि चढ़ा देती हैं। रवि इन सब चीजों में नहीं मानता था। पर जो भी उस शहर में हो रहा था उसने रवि की मान्यताओं पर कई सवाल खड़े कर दिए थे। उसी शाम रवि अपने एक हवलदार के साथ उस जंगल में पहुंच गया। जंगल की तलाशी लेते हुए एकदम से तेज हवा चलने लगी और जंगल में अंधेरा छा गया। रवि को किसी के चिल्लाने की आवाज आई और तभी एकदम से उसके सामने नीरज, विष्णु और डॉक्टर अजय की बीवी आ गई। वो सब उनकी आत्माएं थी। उनका शरीर सफेद पड़ चुका था। आंखें बिल्कुल काली थी। वो सब आत्माएं रवि के पास आ रही थी। लेकिन रवि के हवलदार को कुछ नहीं दिख रहा था। तभी अचानक से वो आत्माएं हवा में कहीं गायब हो गई। रवि को कुछ समझ नहीं आ रहा था। उसने घबराते हुए अपने हवलदार को सब बताया और उसे हट्टे-कट्टे ऑफिसर्स और पास के लोगों को बुलाने के लिए कहा। हवलदार जैसे ही वहां से गया जंगल में अंधेरा छा गया। रवि को कुछ औरतों की आवाज आने लगी जो उसका नाम पुकार रही थी। जब वो उन आवाजों के पास गया तो उसे वही गुफा दिखी जिसके बारे में अजय ने उसे बताया था। उस गुफा में घुसते ही उसे एक अजीब सा काला धुआं दिखा जिसमें उसे वही काली साड़ी वाली औरत दिखी जिसके बारे में रवि को अजय और जगदीश ने बताया था। उसकी लाल आंखें अभी भी उसके बिखरे बालों के बीच से चमक रही थी। रवि उस औरत के पीछे-पीछे उस गुफा में चला गया। जब वो हवलदार कुछ लोगों को लेकर वापस आया तो उन्हें जंगल के बीचों-बीच रवि की डेड बॉडी मिली। बिल्कुल उसी हालत में सर, दोनों हाथ और दोनों पैर एक साथ सिले हुए और रवि के माथे पर भी वही शैतानी निशान था और उसके दाहिने हाथ का एक अंगूठा गायब था। इसके बाद सबको यकीन हो गया था कि उस जंगल में डायन रहती हैं जो शैतान की पूजा करती हैं और मासूम लोगों की बलि चढ़ाती हैं। तब से हरिपुर के लोगों ने उस जंगल में जाना ही बंद कर दिया और आज भी माना जाता है कि उस जंगल में डायन रहती हैं। इस केस का सच तो कभी सामने नहीं आ पाया। पर चरणदासपुर के मंडला मर्डर्स में इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर रिया को पता चलता है कि ये कोई आम मर्डर्स नहीं है बल्कि इससे जुड़े हैं कई डरावने और खतरनाक राज जो पूरी दुनिया को जड़ से हिलाने की ताकत रखते हैं। क्या है वो राज? क्यों हो रहे हैं वो मर्डर्स? क्या इस सबके पीछे भी सच में शैतान डायन या खरा जादू है? जानने के लिए देखिए मंडला मर्डर्स। स्ट्रीमिंग नाउ ओनली ऑन Netflix। और अगर आपको यह वीडियो अच्छी लगी तो हमारा चैनल खूनी मंडे सब्सक्राइब करना बिल्कुल मत भूलना। [संगीत]
3) https://youtu.be/B8djaOmzKLE?si=C5amI9Ao62SDhGex
दोस्तों, हम हर हफ्ते बड़ी मेहनत से आपके लिए एक दिल दहला देने वाली एनिमेटेड हॉरर स्टोरी बनाते हैं। तो अगर आप हमारी यानी खूनी मंडे चैनल की कहानियां एन्जॉय कर रहे हैं तो हमारे चैनल को सब्सक्राइब कीजिए और हमारी लेटेस्ट वीडियोस की नोटिफिकेशन के लिए बेल आइकॉन दबाना मत भूलना। [संगीत] पीपल का भूतिया पेड़ हंटेड ट्री। पेड़, फूल और बगीचे किसे नहीं पसंद? तेज धूप में पेड़ की छांव में बैठना और बारिश में उसकी पत्तियों से गिरती हुई बूंदों को अपने चेहरे पर महसूस करने का अपना ही एक अलग मजा होता है। लेकिन इंडिया में कुछ ऐसे भी पेड़ हैं जिन्हें जानलेवा माना जाता है। क्योंकि रात को वहां भूतों का वास होता है। एक ऐसी ही स्टोरी लेकर आया है Zee5 अपनी नई मूवी भूतनी में जिसमें एक आत्मा करती है पूरे कॉलेज को हंट जहां भूतनी एक मजेदार हॉरर कॉमेडी मूवी है वहीं हमारी आज की कहानी दिल्ली यूनिवर्सिटी की एक रियल हॉरर स्टोरी पर बेस्ड है। आरव, नमन और वेदांश दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ते थे और कॉलेज हॉस्टल में एक ही रूम में रहते थे। उनका पहला ही साल था और उन तीनों की काफी अच्छी दोस्ती हो गई थी। उन्होंने एक रात कैंपस को एक्सप्लोर करने का प्लान बनाया। उन्हें किसी ने बताया था कि उनके कैंपस के अंदर एक बहुत पुराना पीपल का पेड़ है जिसे लोग ह्टेड या शाप कहते हैं। लेकिन वहां किसी को भी जाने की परमिशन नहीं है। इसलिए उन्होंने प्लान बनाया कि वो वहां जाएंगे और उस पेड़ को देखेंगे। वो कॉलेज की एक दीवार टाप कर उस कंपाउंड में पहुंच गए जहां वो पीपल का पेड़ था। वो जितना बड़ा था उतना ही भयानक भी लग रहा था। उसके आधे पत्ते सूखे हुए थे और आधे जैसे सड़ गए हो। उस पेड़ पर कई चुन्नियां और धागे भी बंधे हुए थे। वेदांश ने मस्ती में दोनों को ढेर दिया कि अगर उनमें से कोई भी उस पेड़ से एक चुन्नी निकाल के ले आएगा तो वेदांश उसे ₹2000 देगा। घबराए हुए नमन ने तो पहले ही मना कर दिया लेकिन आरव एकदम से पेड़ की तरफ चलने लगा। नमन ने डरते हुए आरव को रोका और उस पेड़ की कहानी बताने लगा। उसने बताया कि ऐसा कहा जाता है। एक लड़की को उसके बॉयफ्रेंड ने कई साल पहले मारकर उसे उस पेड़ के नीचे दफना दिया था। कहते हैं कि उस लड़की की आत्मा आज भी उसी पेड़ से जुड़ी है। माना जाता है कि आज तक जिसने भी उस पेड़ को छुआ है, उस लड़की की भूतनी ने उसकी जान ले ली है। पर आरव नमन की इन कहानियों का मजाक उड़ाने लगा और बिना डरे पेड़ के सामने जाकर खड़ा हो गया। नमन बार-बार उसे पेड़ को छूने से मना करता रहा। पर आरव ने एक ही झटके में उस पेड़ से ना ही सिर्फ एक चुन्नी उतारी बल्कि एक धागा भी निकाल लिया और सीधा आकर वेदांश के हाथ में थमा दिया। वेदांश ने उसी वक्त शर्त के मुताबिक आरव को पैसे दिए और वो दोनों डरे हुए नमन का मजाक उड़ाने लगे। कुछ देर बाद वो तीनों वापस अपने हॉस्टल में पहुंचे। एग्जाम्स खत्म होने की वजह से ज्यादातर स्टूडेंट्स सेलिब्रेट करने बाहर गए थे। तो उस रात वो तीनों अपने फ्लोर पर बिल्कुल अकेले थे। डर के मारे नमन ने अंदर से दरवाजा बंद कर लिया था और वेदांश और आरव भी थके होने के कारण कमरे में जाते ही सो गए। कुछ ही देर बाद शीशा टूटने के जोर के आवाज से तीनों की नींद एक साथ खुल गई। उन्होंने आसपास देखा तो सब सही सलामत था। पर खिड़की बार-बार अपने आप खुल रही थी। आरव तुरंत उठा और डरते हुए उसने खिड़की बंद कर दी। लेकिन यह बात बाकी दोनों को थोड़ी अजीब लगी क्योंकि हर बात पर मजाक उड़ाने वाला आरव एकदम से चुप हो गया था। जैसे ही आरव बिस्तर में घुसा तभी एकदम से खिड़की वापस खुल गई और आरव जोर-जोर से चिल्लाने लगा और यह कहने लगा कि यह खिड़की एक बहुत ही भयानक दिखने वाली भूतनी ने खोली है जिसके बिखरे हुए बाल हैं और जिसका पूरा शरीर घाव से भरा है और वो भूतनी इस वक्त उनकी खिड़की के बाहर खड़ी है और आरव को जान से मारने की धमकी दे रही है। वेदांश और नमन को कुछ समझ नहीं आ रहा था क्योंकि उस खिड़की के बाहर कुछ भी नहीं था। उन्होंने आरव को शांत करने की कोशिश की लेकिन वो वेदांश और नमन से अपने आप को उस भूतनी से बचाने की मदद मांगता रहा। वेदांश ने उठकर खिड़की वापस बंद कर दी। और आरव को किसी तरह शांत करके सुलाया। सुबह जब उनकी आंख खुली तो आरव कमरे में था ही नहीं। उन्होंने उसे पूरे हॉस्टल में ढूंढा पर वो कहीं नहीं मिला। तभी उन्हें एक फ्रेंड का फोन आया और उसने बताया कि पुलिस को कैंपस के भूतनी वाले पीपल के पेड़ से आरव की चुन्नी से लटकी हुई बॉडी मिली है। यह सुनकर वेदांश और नमन के डर का कोई ठिकाना नहीं था क्योंकि अब उन्हें समझ आ गया था कि यह सब उस पीपल के पेड़ की भूतनी की वजह से हो रहा है। आरव उसी चुन्नी में लिपटा था जो उस रात उसने उस पेड़ से चुराई थी। उन दोनों को समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या करें। उनकी अगली सुबह की घर जाने की ट्रेन की टिकट थी। तो उन्होंने सोचा कि उन्हें बस आज की रात इसी तरह गुजारनी है। उस रात जब नमन की आंख लगी तो उसे बस वो पीपल का पेड़ दिखाई दिया जिसके अंदर से एक बिखरे बाल वाली घाव से भरी हुई एक भयानक दिखने वाली भूतनी निकल कर उसे अपने पास खींच रही है और नमन कुछ नहीं कर पा रहा है। अचानक से सपने में उस भूतनी ने उसका गला घोटना शुरू कर दिया और नमन की आंख अचानक खुल गई। नमन डर के मारे पसीनेपसीने हो चुका था। पर उसका ध्यान अपने से ज्यादा अपने सामने बैठे वेदांश पर गया। जो दुबक कर कांपता हुआ बेड के कोने में बैठा। किसी चीज को देखकर कुछ बड़बड़ाए जा रहा था। नमन ने वेदांश को पुकारा। पर वेदांश कुछ रिएक्ट नहीं कर रहा था। ऐसा लग रहा था कि जैसे वो किसी से बात कर रहा है और बात करते-करते बहुत ज्यादा घबरा रहा है। नमन को अब उससे डर लगने लगा था। वो उसे फिर से पुकारने लगा लेकिन वेदांश उसकी बात को अनसुना करके बस कांपे जा रहा था। नमन को लगा कि वेदांश को मेडिकल हेल्प की जरूरत है। इसलिए वो फौरन अपने बेड से उठकर हॉस्टल वार्डन के रूम के बाहर जाकर दरवाजा खटखटाने लगा। पर जैसे ही वो दरवाजा खुला नमन सुन पड़ गया। उसके सामने आरव खड़ा था जिसका पूरा शरीर नीला पड़ चुका था। वो बेहद भयानक लग रहा था। उसके हाथ में वही चुन्नी थी और वो धीरे-धीरे नमन के पास आ रहा था। उसे देखते ही नमन जोर से चीख पड़ा। लेकिन तभी आरव वहां से गायब हो गया और हॉस्टल वार्डन तेजी से नमन के पास आया। उसने पूछा कि उसे क्या हो गया है? तो नमन ने उसे पूरी बात बताई और वो लोग जल्दी से उसके कमरे की ओर गए। लेकिन जैसे ही वो दोनों कॉरिडोर में पहुंचे। उन्हें देखा कि वेदांश दर्द में चीखते हुए अपने आप ही घसीटता हुआ हॉस्टल के बाहर जा रहा है। वो दोनों उसके पीछे-पीछे भागे और उसी पीपल के पेड़ वाले कंपाउंड में पहुंच गए। वहां उन्होंने जो देखा वो देखकर उनकी हालत खराब हो गई। वेदांश हवा में फ्लोट कर रहा था। साफ-साफ दिख रहा था कि वो किसी अदृश्य शक्ति के वश में है। वेदांश दर्द में चीख रहा था। जैसे कोई उसके अंदर से उसकी जान निकाल रहा हो। नमन उसे पुकार रहा था। पर उसका वेदांश पर कोई असर नहीं हो रहा था। तभी वेदांश की गर्दन अचानक से चटक गई और वो जमीन पर नीचे गिर पड़ा। इससे पहले कि नमन और वो हॉस्टल वार्डन उसके पास जा पाते उनके सामने वही बिखरे बाल वाली घाव से भरी हुई एक भयानक दिखने वाली भूतनी आ गई। वो बेहद खूंखार दिख रही थी। नमन और हॉस्टल वार्डन दोनों उसे देखते ही बेहोशी की हालत में आ गए और नीचे गिर पड़े। अगली सुबह जब उन दोनों की आंख खुली तो उन्हें दिखा कि बेजान सा वेदांश वैसे ही उस पीपल के पेड़ से लटका हुआ है जैसे आरव लटका था। यह खबर पूरे कैंपस में फैल गई और उस पीपल के पेड़ के उस पूरे कंपाउंड को सीमेंट से बंद कर दिया गया। नमन ने उस पेड़ का मजाक नहीं बनाया था और शायद इसीलिए वो जिंदा बच गया। पर लोग आज भी उस रास्ते के आसपास जाने से डरते हैं। क्योंकि क्या पता उस भूतनी का अगला शिकार वही बन जाए। दोस्तों एक ऐसी ही भयानक भूतनी की मजेदार कहानी लेकर आया है Zee5 अपनी नई फिल्म भूतनी में। इस फिल्म में कुछ दोस्तों का सामना होता है एक ह्टेड वर्जन ट्री की चुड़ैल से जो उनकी जिंदगी तबाह कर देती है। इस भूतनी से बचने के लिए वो एक गोस्ट हंटर बाबा की मदद लेते हैं जो अपनी जान दांव पर लगाकर उन्हें और पूरे कॉलेज को वर्जन ट्री की डरावनी भूतनी से बचाने की कोशिश करता है। अगर आप भी उस ह्टेड वर्जन ट्री और उसकी भूतनी की यह मजेदार कहानी देखना चाहते हो तो डू चेक आउट भूतनी स्ट्रीमिंग नाउ ओनली ऑन Zee5 और अगर आपको यह वीडियो अच्छी लगी तो हमारा चैनल खूनी मंडे सब्सक्राइब करना बिल्कुल मत भूलना।
4) https://youtu.be/ijmP7azqzuc?si=J52Fl1FcCuxQR0x6
बारिश की वो रात कहते हैं बारिश का मौसम बड़ा ही सुहाना होता है। हर तरफ हरियाली और गीली मिट्टी की वो दिल को खुश कर देने वाली एक खुशबू। हर चीज की खूबसूरती मानो दोगुनी हो जाती है। आप कहीं भी जाओ लगता है जैसे बारिश आपका पीछा ही कर रही हो। पर अगर आपका पीछा बारिश के अलावा कोई और भी कर रहा हो तो यह कहानी 24 साल के वरुण की है। वरुण दिल्ली से मुंबई अपनी जॉब के सिलसिले में आया था। हालांकि उसे मुंबई की फास्ट लाइफ कुछ खास पसंद नहीं थी पर वो अपने काम के लिए बहुत पैशनेट था। अपने करियर को एक नई सीढ़ी पर ले जाने के लिए। वो कुछ समय के लिए मुंबई आया था। वरुण अक्सर अपने ऑफिस से लेट निकलता था। कभी-कभी तो इतना लेट कि वो ऑफिस से निकलने वाला आखिरी इंसान होता था। ऐसी ही एक रात वरुण को ऑफिस में बैठे-बैठे रात के 11:00 बज गए थे। वो अपना सामान पैक करके बिल्डिंग से बाहर निकला तो उसने देखा कि बहुत ही घमासान बारिश हो रही है। अब ना ही वरुण को कोई ऑटो रिक्शा मिल रहा था और ना ही कोई कैब। वो बस एक कोने में खड़ा बारिश से बचने की कोशिश कर रहा था। तभी अचानक से वरुण के सर पर बूंदे पड़ना बंद हो गई। उसने सर उठाकर देखा तो उसके सर पर एक छाता था और वो छाता लिए उसके साथ ही एक आदमी खड़ा हुआ था। वरुण ने मुस्कुराकर उस आदमी को थैंक यू कहा। पर उस आदमी ने कुछ जवाब नहीं दिया। वो बस चुपचाप खड़ा रहा। वरुण ने फिर से उस आदमी से बात करने की कोशिश की। वरुण ने कहा आपका बहुत-बहुत शुक्रिया। आपके जैसे लोग बहुत ही कम मिलते हैं। इस पर उस आदमी ने कुछ सेकंड्स बाद अपनी चुप्पी तोड़ी और कहा, "मेरा क्या है? मैं तो एक फकीर हूं। कल किसी और को मिला था। आज तुम्हें मिला हूं और कल किसी और को मिलूंगा। वरुण को उस आदमी की बात थोड़ी अजीब लगी। उसे लगा कि शायद वह आदमी नशे में है। वरुण तुरंत उसके छाते से निकल कर रोड पर चलने लगा। इस उम्मीद ने कि शायद आगे उसे ऑटो मिल जाएगा। पर बारिश थी कि रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी। बारिश में चलते-चलते वरुण के पैर जैसे ही जमीन पर पड़ रहे थे तो एक आवाज आ रही थी। छपाक पर कुछ दूर चलते ही वरुण ने नोटिस किया कि वो आवाज अब दो बार आने लगी थी। मतलब उसके कदमों की आवाज के अलावा एक और कदमों की आवाज। मानो कोई उसके पीछे-पीछे ही चल रहा हो। वरुण ने मुड़कर पीछे देखा तो उसके पीछे कोई भी नहीं था। वरुण के लिए यह पूरा शहर ही नया था। उसे रास्तों का इतना अंदाजा नहीं था। पर क्योंकि उसका घर ऑफिस के पास ही था तो वो जैसे तैसे पैदल ही अपने घर पहुंच गया। उस रात वरुण का रूममेट भी फ्लैट पर नहीं था। कुछ दिनों के लिए वो अपने घर गया था। वरुण अक्सर ऑफिस से आकर ही सो जाता था। पर आज का दिन कुछ अलग था। बिस्तर पर लेटा हुआ वरुण सोने की जितनी भी कोशिश करता उसे नींद आने का नाम ही नहीं ले रही थी। उसका फ्लैट बिल्डिंग के सिक्स्थ फ्लोर पर था। और बाहर चल रही तेज हवा और बारिश से उसके कमरे में लगी खिड़की जोर-जोर से बज रही थी। आसमान में जोरों की बिजली भी कड़क रही थी। ऐसा लग रहा था कि कभी भी कोई बादल फट जाएगा और इसी शोर की वजह से उसके लिए पूरा माहौल बहुत ही डरावना हो गया था। वरुण की सोने की नाकाम कोशिशों के बाद वो किचन से पानी लेने के लिए उठा। पर जैसे ही वरुण ने अपने पैर कमरे के फर्श पर रखे वो चौंक गया। क्योंकि वरुण के कमरे का फर्श गीला था। उसने उठकर ध्यान से देखा तो उसे पता चला कि कमरे की खिड़की थोड़ी खुली होने की वजह से पानी कमरे के अंदर आ गया था। वरुण तेजी से उस खिड़की को बंद करने गया और जैसे ही उसने खिड़की बंद की खिड़की के कांच पर उसे एक हाथ दिखाई दिया। उस हाथ को देखकर वरुण की चीख निकल गई। सिक्स्थ फ्लोर की खिड़की पर किसी का हाथ कैसे आ सकता था? वरुण डर के मारे अपने बिस्तर पर वापस चढ़ गया और उसकी आंखों के सामने वो हाथ वहां से गायब हो गया। वरुण को अब कुछ समझ नहीं आ रहा था। इससे पहले कि वो कुछ कर पाता अचानक से फ्लैट की लाइट ही चली गई। वरुण ने अपने मुंबई के एक दोस्त को कॉल लगाने के लिए अपना फोन उठाया। तो उसने देखा कि फोन को चार्जिंग पर लगाने के बावजूद उसका पूरा फोन डिस्चार्ज था। उसमें बैटरी ही नहीं थी। यह देखकर वरुण की हालत अब और खराब होने लगी थी। तभी उसे किचन से एक जोर से कांच टूटने की आवाज आई। वरुण उठकर किचन में गया तो किचन के फर्श पर एक कांच की टूटी हुई बोतल पड़ी हुई थी। नजर घुमा कर देखने पर वरुण को किचन में एक काली बिल्ली दिखी। वरुण को लगा कि शायद वो बोतल उसी बिल्ली की वजह से टूटी थी। वरुण की जान में जान आई। उसने खुद को समझाया कि इतनी तेज बारिश की रात में अकेले होने की वजह से वरुण को अजीब चीजें दिखाई दे रही हैं। उसने खुद को संभाला और किचन का कांच साफ करके अपने कमरे में वापस जाने लगा। पर वो नहीं जानता था कि उसके साथ अब क्या होने वाला था। जैसे ही वरुण अपने कमरे में वापस पहुंचा, उसकी रूह उसके शरीर से बाहर आ गई। उसके कमरे के एक कोने में वही आदमी खड़ा था जो उसे ऑफिस के नीचे छाते के साथ मिला था। वो आदमी बस वहां चुपचाप खड़ा हुआ था और उसके पूरे शरीर से पानी बह रहा था। बिजली कड़कने पर वरुण को उस आदमी का पूरा शरीर दिखा। उसकी चमड़ी पूरी तरह से नीली पड़ी थी। वरुण उसे देखकर सुन पड़ गया था। उसके मुंह से आवाज ही नहीं निकल रही थी। तभी उस आदमी ने अपनी चुप्पी तोड़ी और वरुण से कहा, मैं तो बस मदद करना चाहता था। पर मेरे साथ ऐसा क्यों हुआ? वरुण को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था। इससे पहले कि वो कुछ बोलता। बहुत जोर से बिजली कड़की और वो आदमी अचानक से वरुण के बहुत करीब आ गया। उसका चेहरा बेहद डरावना था। अचानक उस आदमी का शरीर फूलने लगा। जैसे मानो उसके शरीर के अंदर कुछ भरा हुआ हो। तभी एकदम से वरुण के कमरे में पानी भरने लगा। चारों तरफ पानी ही पानी था। इससे पहले कि वरुण कुछ कर पाता। वो पानी में डूबने लगा। वरुण को सांस ही नहीं आ रही थी और वो पानी में डूबता जा रहा था। अगली सुबह जब वरुण का रूममेट घर आया तो उसने वरुण को फर्श पर गिरा हुआ पाया। उसने जैसे तैसे वरुण को उठाने की कोशिश की तो वरुण के मुंह से बहुत सारा पानी निकला जैसे उसे किसी ने समुंदर से निकाला हो। वरुण होश में आया और उसने अपने रूममेट को पूरी बात बताई। जब वो डूब रहा था तो वरुण को एक सपना आया। मानो वो उस आदमी की जिंदगी को देख पा रहा था। उसने देखा कि एक ऐसी ही रात जब बहुत बारिश हो रही थी। वो आदमी ऑफिस से अपने घर जा रहा था। बारिश इतनी तेज थी कि जगह-जगह पर बहुत पानी भर गया था। वो आदमी ऑफिस के नीचे खड़ा ऑटो ढूंढ रहा था। तभी उसके पास आकर एक औरत खड़ी हो गई। कुछ देर बाद उस औरत को लेने एक गाड़ी वहां पर आई। पर गाड़ी में बैठते समय उस आदमी ने देखा कि उस औरत का दुपट्टा गाड़ी के दरवाजे से बाहर निकल रहा था। बस उस औरत को यही बताने के लिए वो आदमी उस गाड़ी के पीछे तेजी से गया और उसका पैर एक बहुत ही गहरे गड्ढे में पड़ गया। वो गड्ढा इतना गहरा था कि वो आदमी उसके अंदर डूबने लगा और इससे पहले कि कोई उसे बचा पाता। उसके लंग्स में पानी भर गया था और उसकी वहीं मौत हो गई। जब वरुण ने अपने ऑफिस के एरिया के पास जाकर लोगों से इस बारे में पूछा तो उसे पता चला कि कुछ साल पहले एक पतला बूढ़ा आदमी वहीं बारिश में गड्ढे में मर गया था। यह सुनकर वरुण का दिल दहल गया था। कल रात उसकी मुलाकात जिस आदमी से हुई थी, वह वाकई उसी बूढ़े आदमी की आत्मा थी। वरुण ने अगले ही दिन अपनी फ्लाइट बुक की और वापस अपने घर दिल्ली चला गया। उस दिन के बाद से वरुण को वो इंसान कभी नहीं दिखा। लेकिन आज भी तेज बारिश होते ही वरुण घबराहट के मारे कपकपाने लगता है। अगर आपको यह वीडियो अच्छी लगी तो हमारा चैनल खूनी मंडे सब्सक्राइब करना बिल्कुल मत भूलना। ला
5) https://youtu.be/iM8uaQDW6Gk?si=Ed2wAtaNzwjXrh_f
नया स्कूल कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जो आपके दिल को छू जाती हैं। आज की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। गायत्री एक सिंगल मदर थी और हाल ही में वो अपनी 13 साल की बेटी आर्या के साथ मुंबई वापस शिफ्ट हुई थी। आर्या के पैदा होने पर गायत्री ने मुंबई छोड़ दिया था और वह अपने पति और मां-बाप को छोड़कर सबसे दूर रहने चली गई थी। लेकिन अब वो 13 साल बाद फिर से वापस अपने पुराने घर में आई थी। अगले दिन आर्या का अपने स्कूल में पहला दिन था। जहां नए स्कूल में जाकर लोग नए दोस्त और एक्सपीरियंसेस के लिए एक्साइटेड होते हैं। वहीं आर्या बेहद घबराई हुई थी। क्योंकि अक्सर लोग नई जगहों पर उसे एक्सेप्ट नहीं करते थे। इसकी वजह थी कि वो स्पेशल थी। उसका चेहरा और स्वभाव बाकी बच्चों से थोड़ा अलग था। उसके चेहरे पर हमेशा मुस्कान रहती थी। पर बोलने का अंदाज थोड़ा धीमा था। उसकी आंखों में एक अलग सी मासूमियत थी। और वह हर चीज को औरों से ज्यादा महसूस करती थी। आर्या को डाउन सिंड्रोम था। डाउन सिंड्रोम एक जेनेटिक कंडीशन है। एक ऐसी बीमारी है जिसके साथ ही बच्चा पैदा होता है और इसकी वजह होती है हमारे शरीर में एक एक्स्ट्रा क्रोमोजोम का होना। इसका असर उस इंसान के फिजिकल डेवलपमेंट यानी शारीरिक विकास और लर्निंग एबिलिटी यानी सीखने की क्षमता पर पड़ता है। डाउन सिंड्रोम से सफर करने वाले लोगों के बोलने की रफ्तार थोड़ी धीमी हो सकती है और चेहरे में भी कुछ डिफरेंसेस दिख सकते हैं। लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि वो कमजोर होते हैं। सच तो यह है कि डाउन सिंड्रोम वाले लोग दिल के बहुत साफ प्यार देने वाले और भावनाओं से भरे होते हैं। उनकी खुशियां छोटी-छोटी चीजों में होती हैं और उनकी मुस्कुराहट बहुत सच्ची होती है और ऐसी ही कुछ आर्या भी थी। दिल की एकदम साफ पर नए स्कूल में आर्या का पहला दिन अच्छा नहीं जा रहा था। सब बच्चे उसे अजीब तरीके से देख रहे थे। जब ड्राइंग की क्लास शुरू हुई तो क्लास में टीचर ने उसे स्केच बुक निकालने को बोला। पर उसके चेक करने पर उसे अपनी स्केच बुक अपने बैग में मिली ही नहीं। उसे समझ नहीं आ रहा था कि ऐसा कैसे हो सकता था क्योंकि उसे याद था कि उसकी मां ने उसके बैग में उसके लिए नई स्केचबुक रखी थी। टीचर ने बिना सोचे समझे आर्या को सबके सामने डांट दिया। बच्चों ने उसका खूब मजाक उड़ाया। टीचर के जाते ही तीन लड़के अयान, रोहित और कबीर उसके सामने हंसते हुए आए और उसे स्लो होने के लिए चढ़ाते हुए उसका मजाक बनाने लगे। कि कैसे वो लोग उसके सामने उसकी बैग से ड्राइंग बुक निकाल के ले गए और उसे पता भी नहीं चला। यह सुनकर आर्या की आंखों में आंसू आ गए। उन तीनों ने आर्या की स्केच बुक उसके सामने फाड़ दी और आर्या जोरों से रोने लगी। ब्रेक में जब वो ग्राउंड में बैठकर रो रही थी तो उसे अपने कंधे पर किसी का हाथ महसूस कर रही थी। उसने ग्राउंड में इधर-उधर देखा लेकिन दूर-दूर तक उसके सिवा वहां कोई नहीं था। पर जब उसने वापस जाने के लिए अपना बैग उठाया तो उसके बैग के ऊपर वही स्केच बुक रखी थी। पर एकदम नहीं। और तो और उसके अंदर नए स्केचेस बने हुए थे। उसके फेवरेट समुंदर के। और उनके नीचे लिखा था दीप और आर्या। आर्या को ड्राइंग करना बहुत पसंद था पर उसकी ड्राइंग टीचर उसे पसंद नहीं करती थी क्योंकि आर्या अलग दिखती थी। इसलिए उसकी ड्राइंग टीचर उसके साथ भेदभाव करती थी और उसे क्लास में सबसे ज्यादा डांटती थी। एक बार तो उसने आर्या को पूरी क्लास के सामने एक राक्षसी बुलाकर उसे इंसल्ट किया। आर्या उस दिन भी बहुत रोई लेकिन उसके अगले ही दिन उसकी ड्राइंग टीचर के साथ कुछ अजीब होने लगा। एकदम से उनका एग्जाम पेपर्स का फोल्डर गायब हो गया। उन्होंने उसे हर जगह ढूंढा लेकिन वो पेपर्स उन्हें कहीं नहीं मिले। ये एक बहुत बड़ी गलती थी जिसकी वजह से उस ड्राइंग टीचर को फायर कर दिया गया। पर आर्या की दिक्कतें खत्म नहीं हुई। वो तीनों लड़के अयान, रोहित और कबीर फिर से उसका सामान छुपाने लगे और उसे तंग करने लगे। लेकिन आर्या ने अब कुछ नहीं कहा। सिर्फ एक मुस्कान थी उसके चेहरे पर। जैसे कोई था जो उसे हर वक्त देख रहा था। और अपने जादू से उसकी छुपाई हुई चीजें वापस ला रहा था। एक दिन स्कूल के आखिरी पीरियड में उन तीनों लड़कों ने आर्या को एक छोटे से स्टोर रूम में बंद कर दिया। उस स्टोर रूम में सिर्फ अंधेरा था और कोई भी खिड़की नहीं थी। आर्या का दम घुटने लगा और वो चिल्लाती रही। लेकिन कोई भी उसकी बात नहीं सुन पा रहा था। तभी उस कमरे में एक तेज रोशनी आई। तब आर्या को दिखा कि करीबन उसके जितने बड़े लड़के का साया वहां खड़ा है। वो यह देखकर और घबरा गई। लेकिन उस स्टोर रूम का दरवाजा अपने आप खुल गया। इससे पहले आर्या कुछ समझ पाती। वो सफेद साया उसका हाथ पकड़ के उसे बाहर ले गया। वहीं वो तीनों लड़के जो आर्या को बुली कर रहे थे। जब कॉरिडोर से गुजरे कॉरिडोर की सब लाइट्स बंद होने लगी। उन्हें एकदम से अपनी गर्दन पर किसी का हाथ महसूस हुआ और इससे पहले वो कुछ समझ पाते। किसी ने उनको हवा में उठा लिया और कॉरिडोर की दीवार पर पटक दिया। वो तीनों उसी दीवार से थे जैसे चिपक गए थे। वो लोग डर के मारे चिल्लाने लगे और मदद मांगने लगे और तभी उनके सामने एक सफेद परछाई आ गई जिसकी शक्ल बिल्कुल आर जैसी ही थी और आंखें एकदम खाली थी और शरीर पर कई घाव थे। उस सफेद परछाई ने उनका दम घोटना शुरू कर दिया। उस साईं ने उनसे कहा कि आर्या भी ऐसे ही तड़प रही थी। इस पर उन तीनों लड़कों का रोना निकल गया और वो आर्या को परेशान करने के लिए उस साए से माफी मांगने लगे और तभी उस साए ने उन्हें जमीन पर गिरा दिया और वो वहां से गायब हो गया। वो तीनों भाग कर घर चले गए लेकिन उस साए ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। वो साया उन्हें पूरी रात उनके घर के हर कोने में दिखता रहा। अगली सुबह उन तीनों को तेज बुखार हो गया। और वो बस एक ही चीज बड़बड़ा रहे थे कि आर्या उन्हें माफ कर दे और वो उसे कभी नहीं परेशान करेगी। उन लड़कों के पेरेंट्स ने आर्या पर शक करते हुए स्कूल की प्रिंसिपल से सारी बात शेयर की। प्रिंसिपल ने फिर सीसीटीवी चेक किया। फुटेज में आर्या कभी अकेली थी ही नहीं। हमेशा एक धुंधला साया उसके पीछे दिखता है। आर्या की मां गायत्री को स्कूल बुलाया गया। उसने आर्या से सब पूछा और आर्या ने बताया कि वो दीप है। उसका साया वाला दोस्त जो हमेशा उसके साथ रहता है। दीप का नाम सुनते ही गायत्री का चेहरा सफेद पड़ गया और वो चाहकर भी अपने आंसू नहीं रोक पाई। उसने प्रिंसिपल को देखा और बताया कि वो साया वो आत्मा आर्या के जुड़वा भाई दीप की है। दीप और आर्या दोनों ट्विंस पैदा हुए थे और दोनों को ही डाउन सिंड्रोम था। जहां गायत्री ने इसे भगवान की मर्जी समझकर उन्हें खूब सारा प्यार दिया। वहीं गायत्री के हस्बैंड ने उन बच्चों को कभी एक्सेप्ट नहीं किया। एक रात जब गायत्री सो रही थी तब शराब के नशे में उसके हस्बैंड ने दीप को जान से मार दिया और दीप के चिल्लाते ही गायत्री की आंख खुल गई। गायत्री आर्या को लेकर अपनी जान बचाते-बचाते वहां से भाग गई। उसने शहर बदला, अपना नाम बदला। पर हर स्कूल में आर्या को डाउन सिंड्रोम की वजह से परेशानी होती रही और हर सोसाइटी में आर्या के साथ भेदभाव किया जाता। उसका मजाक बनाया जाता। इसी के चलते वो वापस मुंबई आए। इस उम्मीद में कि मुंबई जैसे शहर में आर्या को शायद अलग महसूस नहीं होगा। गायत्री आर्या के फ्यूचर के लिए हमेशा भागती रही और उसे उस दिन एहसास हुआ कि दीप हमेशा वहीं रहा उनके साथ आर्या को प्रोटेक्ट करने के लिए। उस दिन के बाद सब बदल गया। अयान, रोहित, कबीर आर्या के पास आए। उन्होंने उससे माफी मांगी। उसे ढेर सारी स्केच बुक्स गिफ्ट की। अपना लंच शेयर किया और वो सब दोस्त बन गए। आर्या की जिंदगी में अभी भी हर स्पेशल मोमेंट पर दीप का साया उसे और अपनी मां को दिखाई देता है। आर्या अब कभी दुखी नहीं होती क्योंकि उसे पता होता है कि उसका भाई, उसका दीप हमेशा उसके साथ है। दोस्तों, ऐसे कई बच्चे होते हैं, कई इंसान होते हैं जो डाउन सिंड्रोम से गुजर रहे होते हैं जिन्हें हमें सपोर्ट करना चाहिए। उनके साथ कभी भेदभाव नहीं करनी चाहिए। डाउन सिंड्रोम होने के बावजूद लोग अलग-अलग फील्ड्स में सक्सेसफुल हुए हैं। जैसे एक्टिंग, म्यूजिक, मॉडलिंग। कई लोगों ने तो मिलियन डॉलर कंपनीज भी बनाई हैं और स्पोर्ट्स के बड़े-बड़े मेडल भी जीते हैं। इसलिए सच में यह सब लोग सितारे हैं जमीन पर। दोस्तों, ऐसे ही लोगों की एक इंस्पिरेशनल कहानी लेकर आए हैं आमिर खान। अपनी नई मूवी सितारे जमीन पर जो कि 20 जून को थिएटर्स में रिलीज हो रही है। तो आप सब अपने फैमिली और फ्रेंड्स को लेकर थिएटर्स में जाइए और इस मूवी को एंजॉय कीजिए। और हां अगर आपको हमारी यह कहानी अच्छी लगी तो हमारे चैनल खूनी मंडे को सब्सक्राइब करना मत भूलना। और हां कभी किसी को बुली मत करना।
6) https://youtu.be/lUApmYh9IQo?si=zmJiE6u_ACAkoSjN
दोस्तों, हम हर हफ्ते बड़ी मेहनत से आपके लिए एक दिल दहला देने वाली एनिमेटेड हॉरर स्टोरी बनाते हैं। तो अगर आप हमारी यानी खूनी मंडे चैनल की कहानियां एंजॉय कर रहे हैं, तो हमारे चैनल को सब्सक्राइब कीजिए और हमारी लेटेस्ट वीडियोस की नोटिफिकेशन के लिए बेल आइकॉन दबाना मत भूलना। [संगीत] मां की लोरी, पापा की प्यार भरी शाबाशियां, दोस्तों की हंसी, ना जाने कितनी यादें जुड़ी होती हैं हमारी इन आवाजों से। पर कभी सोचा है कि अगर यही आवाजें आपके सबसे भयानक एक्सपीरियंस की वजह बन जाए तो? यह कहानी है छाया की। 20 साल की छाया अपनी बीएड की पढ़ाई खत्म करके कोलकाता से अपने गांव गौरीपुर अपने काका से मिलने जा रही थी। उसी साल उसने अपने मां-बाप को एक कार एक्सीडेंट में खो दिया था। अब उसके काका के अलावा उसकी दुनिया और उसके परिवार में और कोई नहीं बचा था। गौरीपुर बंगाल के कोने में छुपा एक छोटा सा गांव था। जब छाया की ट्रेन दोपहर के 4:00 बजे गांव पहुंची और वो गौरीपुर स्टेशन पर उतरी तो मे की तपती गर्मी में भी गौरीपुर की हवा में एक अजीब सी ठंडक थी। स्टेशन पर उसके काका उसको लेने आए थे। छाया से मिलते ही उन्होंने ज्यादा कुछ नहीं कहा और ना ही उससे कुछ पूछा। बस हल्का सा मुस्कुरा के पहले छाया के सर पर हाथ फेरा और फिर उसका बैग उठाकर गाड़ी की तरफ चल पड़े। गाड़ी में बैठी छाया पूरे रास्ते बस खिड़की से बाहर ही देख रही थी। खेत तालाब कच्चे रास्ते सब कुछ वैसा ही था। सिर्फ एक बात अलग थी। भरी शाम में भी गलियां सुनसान पड़ी थी। ना बच्चे बाहर खेल रहे थे और ना औरतें पेड़ों के नीचे बैठकर बातें कर रही थी। उसे यह बात बहुत अजीब लगी। उसने जब इसकी वजह अपने काका से पूछी तो उसके काका ने बात बदल दी। छाया के काका उनकी खानदानी कोठी में रहते थे। गांव से थोड़ा बाहर पीपल के घने पेड़ों से घिरी एक कोठी जिसकी छत से गांव का तालाब दिखता था। कोठी के अंदर घुसते ही छाया की बचपन की यादें ताजा हो गई। उस रात छाया ने अपने कमरे में ही खाना खाया और थकान की वजह से वो जल्दी सो गई। अगली सुबह उसे काका के साथ गांव के बाजार जाना था। रात के 2:00 बज रहे होंगे। जब छाया की आंख अचानक खुली। उसकी चद्दर जमीन पर गिरी हुई थी। वो जैसे ही अपनी चद्दर उठाने झुकी उसे अपने कमरे के बाहर से एक आवाज आई। उसने थोड़ा गौर से सुना तो उसे लगा कि शायद कोई उसे बुला रहा है। छाया ओ छाया छाया ओ छाया। दोस्तों जैसे निशिडाक छल से लोगों को मारती है वैसे ही एक और छल कपट की थ्रिलिंग कहानी है Zee5 के नए शो छल कपट द डिसेप्शन की। इस शो में शहर से दूर एक हवेली में हो रही है एक शानदार बैचलर पार्टी और उसी के बीच एक फेमस इन्फ्लुएंसरर शालू की लाश मिलती है। पहले सबको लगता है यह ट्रैजिक एक्सीडेंट है। पर तब केस को इन्वेस्टिगेट करने आती है इंस्पेक्टर एसपी देविका राठौर। एक ब्रिलियंट लेकिन अंदर से टूटी हुई कॉपी जो खुद भी अपने अंधेरों से लड़ रही है। उसकी आंखें सब कुछ देख लेती हैं जो अभी तक छुपा हुआ था। छल, झूठ, दिखावा और पार्टी में मौजूद हर चेहरे के पीछे छुपी नफरत। इसी बीच शालू की पोस्टमार्टम में एक और सच सामने आता है। शालू प्रेग्नेंट थी और उसे जहर दिया गया था। जैसे-जैसे एसपी देविका इन्वेस्टिगेशन करती है, एक-एक मेहमान सस्पेक्ट बन जाता है। हर किसी ने कई राज छुपाए हैं। पुरानी दुश्मनी, अधूरा प्यार और वो जेलेसी जो अब खून में बदल चुकी है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर वो कौन था जिसने शालू का मर्डर किया है। जानने के लिए देखिए Zee5 का नया शो छल कपट द डिसेप्शन। स्ट्रीमिंग नाउ ओनली ऑन Zee5। वो आवाज सुनके एक पल को उसका मन खुश हो गया। पर दूसरे ही पल उसके हाथ पैर ठंडे पड़ गए। वो आवाज तो उसकी मां की थी। पर ये कैसे हो सकता था? छाया ने फिर से इस बार बहुत ध्यान से उस आवाज को सुनने की कोशिश की और दरवाजे की तरफ गई। पर उसे कुछ सुनाई ही नहीं दिया। शायद वो अभी भी नींद में ही थी। उसने सोचा कि उसकी मां की आवाज उसके सपनों में ही सुनाई दे सकती है। यह सोचकर छाया वापस सोने चली गई। अगली कुछ रातें बिल्कुल नॉर्मल थी। पर किसी ना किसी वजह से छाया उस कोठी में ढंग से सो नहीं पा रही थी। हर रात उसे उम्मीद रहती थी कि वो आवाज उसे फिर से सुनने को मिलेगी। भले ही सपनों में ही सही। एक ऐसी ही रात वो सो ही नहीं पा रही थी। कई बार करवटें बदलने के बाद हार मानकर वो अपने बिस्तर से उठ गई। उस रात उसे उस कमरे में एक अजीब सी घुटन हो रही थी और इसलिए उसने अपनी मां का दुपट्टा ओढ़ा और वो खुली हवा के लिए कोठी की छत पर चली गई। छत पर एक खाट पर बैठकर छाया उस गांव के तालाब को देखने लगी। इतने अंधेरे में भी वो तालाब न जाने कैसे साफ दिख रहा था। दूर-दूर तक कोई आवाज नहीं थी। बस रात का सन्नाटा। अचानक छत का इकलौता बल्ब बंद हो गया। पुराने घरों में ऐसा अक्सर होता था। छाया ने यही सोचकर अपने फोन की टॉर्च ऑन की। अचानक छत की सीढ़ियों के पास से फिर वही आवाज आई। छाया बेटा छत पर ठंड लग जाएगी। नीचे आजा। वो आवाज सुनते ही छाया का शरीर मानो वहीं जम गया। ना जाने कहां से एक ठंडी हवा का झोंका आया और जो दुपट्टा उसने ओढ़ रखा था वो उसके कंधे से गिर गया जिसे किसी ने उससे जोर से खींचा हो। मेरे पास आजा छाया। कब से बुला रही हूं। इस बार वो आवाज बहुत पास से आई थी। जैसे कोई उसके कान में फुसफुसा रहा हो। छाया तुरंत पीछे पलटी। पर वहां कोई नहीं था। तभी खाट की तरफ से एक आवाज आई। मैं तेरा इंतजार कर रही हूं छाया। जल्दी आ। जब छाया ने मुड़कर खाट की तरफ देखा तो उसे वहां एक औरत का काला साया नजर आया। छाया को लगा कि वो उसकी मां है। और वो साए की तरफ आगे बढ़ने लगी और तभी एकदम से किसी ने छाया का हाथ पकड़ा और उसे आगे बढ़ने से रोक दिया। वो और कोई नहीं बल्कि उसके काका थे। तब छाया रुकी और उसने नीचे देखा। अगर वो एक और कदम आगे बढ़ाती तो शायद वो छत से ही नीचे गिर जाती। वो काला साया जो छाया को दिख रहा था अब कहीं नहीं था। छाया ने अपने काका को अपने साथ हुआ पूरा किस्सा बताया और वो सुनने के बाद छाया के काका थोड़ा परेशान हो गए। उन्होंने छाया को कुछ ऐसा बताया जिसे सुनकर छाया के होश उड़ गए। उसके काका ने बताया कि शाम को वो गांव इसलिए सुनसान हो जाता है क्योंकि वहां से लोग गायब हो रहे हैं। गांव के पंडित जी के मुताबिक गांव पर एक निशि डाक का साया पड़ चुका है। निशि डाक एक ऐसी आत्मा है, एक ऐसी चुड़ैल जो रोज किसी ना किसी को अपने साथ ले जाने आती है। किसी ने आज तक उसे देखा तो नहीं है। पर जो भी गायब होता है, कुछ दिन बाद उसके शरीर के टुकड़े मिलते हैं जंगल से। पहले तो सबको लगा कि यह किसी जानवर का काम है। पर गांव के लोग रात में अजीब-अजीब आवाजें सुनने लगे। मानो उनका कोई जानने वाला, उनका कोई करीबी उन्हें पुकार रहा हो। और जो पलट के उस आवाज के पास चला जाता है तो वो फिर कभी जिंदा नहीं मिलता। उसके काका ने उसे चेतावनी दी कि आगे से उसे कोई भी आवाज सुनाई दे तो वो उसकी तरफ ना जाए। भले ही वो उसके मां-बाप की आवाज क्यों ना हो। छाया की दादी उसे बचपन में सुलाते वक्त बोलती थी कि अगर रात में कोई आवाज लगाए तो जाना नहीं। निशि डाक आएगी और उठाकर ले जाएगी। उसे हमेशा से लगा था कि निशि डाक सिर्फ दादी की कहानियों में ही होती है। पर अपने काका की बातें सुनकर वो थोड़ा घबरा गई थी। अगले दिन छाया का मन घर पर नहीं लग रहा था। उसे एक अजीब सी बेचैनी हो रही थी। काका ने उसका मन बहलाने की बहुत कोशिश की पर कोई असर नहीं। दोपहर के खाने के बाद छाया ने सोचा कि वो तालाब का एक चक्कर लगाएगी। वो जानती थी कि अगर उसने काका को बताया तो वो उसे शायद बाहर नहीं जाने देंगे। इसलिए बिना किसी को कुछ बताए वो घर से निकल कर तालाब की ओर चली गई। जब वो वहां पहुंची तो कुछ औरतें तालाब के कोने में कपड़े धो रही थी। छाया तालाब के दूसरी तरफ जाकर बैठ गई। उसने सोचा कि वो कुछ देर गाने सुनेगी और फिर उसके बाद घर चली जाएगी ताकि काका परेशान ना हो जाए। उसने अपने इयरफोंस कान में लगाए और गाने सुनने लगी। उस पीपल के पेड़ की छांव में बैठे-बैठे उसकी आंख कब लग गई उसे पता ही नहीं चला। छाया छाया यहां क्या कर रही है? घर चल बेटा। यह आवाज सुनकर झटके से छाया की आंख खुली। सूरज डूब चुका था और अंधेरा होने लगा था। दूर-दूर तक वहां कोई नहीं था। छाया वहां से जाने के लिए फट से खड़ी हुई और तब उसने देखा कि तालाब के पास एक औरत अभी भी कपड़े धो रही है। छाया को यह बात बहुत अजीब लगी। वो उस औरत के पास गई तो उसे समझ आया कि वो औरत जो कपड़ा धो रही है बार-बार बस वही एक कपड़ा धोए जा रही थी। रात के अंधेरे में काली साड़ी पहने। वो औरत छाया की मां का वही दुपट्टा धो रही थी जो एक रात पहले छाया ओढ़कर छत पर गई थी। उस रात की बेहोशी के बाद वो उस दुपट्टे के बारे में पूरी तरह से भूल गई थी। अचानक से छाया का ध्यान जमीन पर गया। उसने देखा कि उस औरत की जमीन पर कोई परछाई ही नहीं पड़ रही थी। छाया बेहद घबरा गई। उस औरत का चेहरा घूंघट से ढका हुआ था। छाया चुपचाप वहां से वापस जाने ही वाली थी कि तभी छाया को पीछे से एक आवाज आई। आ गई मेरी छाया। छाया जैसे ही उस औरत की तरफ मुड़ी उस औरत का घूंघट हटा और जब छाया ने उस औरत का चेहरा देखा तो उसकी रूह वो कांप गई। वो औरत बिल्कुल उसकी मां की तरह लग रही थी। छाया अपनी मां को देखकर खुद को रोक नहीं पाई और जाकर उस औरत के गले लग गई। और तभी उसने देखा कि उस औरत के बाल बिल्कुल बिखरने लगे हैं और उसका चेहरा काला पड़ने लगा है। उस औरत की आंखें एकदम लाल हो गई। वो अपने चेहरे पर एक भयानक मुस्कान लिए छाया को देखे जा रही थी। छाया को अब समझ आ गया था कि उसका सामना आज एक निश डाग से हुआ है। उस चुड़ैल का वो रूप देखते ही छाया जोर से चिल्लाई। उसकी चीख सुनकर उसे ढूंढ रहे उसके काका जल्दी से तालाब की तरफ भागते आए। पर जब तक वो पहुंचे बहुत देर हो चुकी थी। उन्हें वहां कोई नहीं मिला। अगर कुछ मिला तो वही पुराना दुपट्टा और छाया का फोन। छाया को ढूंढने के लिए उसके काका पूरी रात भटके। और जब वो आखिरी बार तालाब के पास आए तो उन्हें जंगल की तरफ से छाया की प्यारी सी आवाज उनके कानों में गूंजी। काका आप आ गए क्या काका? दोस्तों अगर आपको निशी डाक की कहानी अच्छी लगी तो हमारा चैनल खूनी मंडे अभी सब्सक्राइब करो और ऐसी ही दिल दहला देने वाली हॉरर स्टोरीज की नोटिफिकेशंस के लिए बेल आइकॉन दबाना मत भूलना।
7) https://youtu.be/EYt8Fj6eFe0?si=3VaF232m5rKZMlaG
क्या आपने कभी सोचा है कि मरने के बाद असल में क्या होता है? इस टॉपिक पर बहुत से लोगों की अलग-अलग थ्योरीज हैं। पर ज्यादातर लोग यही मानते हैं कि मरने के बाद हमारी आत्मा शरीर से निकलकर एक दूसरी दुनिया में चली जाती है। जिस दुनिया को कोई भी इंसान नहीं देख सकता। पर अगर कोई ऐसा हो जो उस दुनिया में जाग सके तो ये कहानी कोलकाता में रहने वाली नोनतारा की है। नोनतारा तब बस सिर्फ छ साल की थी। उस दिन भूत चतुर्दशी का दिन था और इसलिए नोयनतारा अपने परिवार के साथ भगवान भूतनाथ के मंदिर दर्शन करने आई थी। नोयन तारा उस मंदिर में जाते ही इतनी खो सी गई कि उसके परिवार वाले कब मंदिर से निकले। उसे पता ही नहीं चला। मंदिर के पुजारी को अचानक किसी जरूरी काम से जाना पड़ा और क्योंकि वह नहीं जानते थे कि नोयन तारा अंदर है। उन्होंने मंदिर बाहर से बंद कर दिया। कुछ ही देर में सूरज ढल गया और रात हो गई। नोन तारा उस मंदिर के अंदर बिल्कुल अकेली थी। तभी अचानक उस बंद मंदिर के दरवाजे से आर-पार होते हुए लोग अंदर आने लगे। देखते ही देखते अंदर एक भीड़ जमा होने लगी। सब लोग बहुत अजीब से दिख रहे थे। यह लोग आम नहीं थे। ऐसा लग रहा था कि यह सब मरे हुए लोगों की आत्माएं हैं। बेहद डरते हुए नोयतारा मंदिर के कोने से छुप के उन्हें देख रही थी। तभी उसने देखा कि वह सब लोग एक-एक करके भगवान भूतनाथ की पूजा करते हुए रो रहे हैं। ऐसा माना जाता है कि भूत चतुर्दशी की रात मंदिर में भूतनाथ की एक बहुत बड़ी पूजा होती है। जो आत्माएं खुद आकर करती हैं। वो आत्माएं अक्सर अपनी मुक्ति की आस में वहां आती हैं। नोनतारा ने इस कहानी के बारे में तो सुना था लेकिन आज वो इस सच को खुद अपनी आंखों से देख पा रही थी। तभी उनमें से एक आत्मा का ध्यान नोयन तारा पर गया और वह गुस्से से उसे देखने लगा। उस आत्मा का चेहरा नोनतंतारा को बहुत ही भयानक लग रहा था। लेकिन तभी नोनतारा ने उससे उसकी पीड़ा पूछी तो वो शांत हो गया। धीरे-धीरे नोनतारा ने वहां मौजूद सभी आत्माओं से एक-एक करके बात की और तब उसे ऐसा लगा कि उसकी जिंदगी का यही उद्देश्य है। उसने अपना आत्माओं को देखना और उनसे बात करना भगवान भूतनाथ का एक वरदान माना। जैसे-जैसे वह बड़ी होती गई, उसने अपनी इस शक्ति को मरे हुए लोगों की आत्माओं को मुक्ति दिलवाने में लगा दिया। पर उसकी इस शक्तियों ने उसे समाज से बहुत दूर कर दिया। कोई भी नोारा को अपनाने के लिए तैयार नहीं था बल्कि उसके अपने घर वालों ने भी उसे घर से निकाल दिया था और वो एक हर गौरी मंदिर में रहने लगी थी। एक दिन उसी हर गौरी मंदिर में लौलिता सेनगुप्ता अपने बेटे सुरजो सेनगुप्ता को लेकर आई। सुरजो को देखते ही नोइन तारा को कुछ महसूस हुआ। उसे लगा कि शायद सुरजो को अपनी जिंदगी में मदद की जरूरत है। सुरजो सेन गुप्ता अपने परिवार के साथ कोलकाता के परी महल में रहता था। परी महल उनकी पुश्तैनी हवेली थी। सेनगुप्ता परिवार की समाज में बहुत इज्जत थी और इसी इज्जत के साथ-साथ उनके पास खूब सारी दौलत भी थी। पर उनकी उस पुश्तैनी हवेली परी महल में कई राज छुपे थे। एक रात सूरजो को सोने में थोड़ी तकलीफ हो रही थी। वो कई घंटों से बस करवटें बदल रहा था। उसे एक सपना आया कि कोई औरत शादी की लाल साड़ी पहने उसके ऊपर बैठी है और उसका गला दबा रही है। लेकिन घबराहट के मारे जैसे ही उसने आंख खोली वहां कोई नहीं था। तभी सुरजो को कुछ ऐसा नजर आया जिससे उसकी रूह कांप उठी। बेडरूम के दरवाजे पर उसे एक औरत शादी की साड़ी पहने खड़ी दिखी। वो बेडरूम से निकल कर बाहर जाने लगी। सुरजो बिना सोचे समझे उस औरत के पीछे गया। जब वो कमरे से बाहर निकला तो वहां कोई नहीं था। तभी उसकी नजर महल की दीवार पर लगे एक बड़े से शीशे पर गई। उसमें उसे हर जगह सिर्फ दुल्हन के कपड़ों में लड़कियां खड़ी दिखाई दे रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे वो सब वहां खड़ी लाशें हो। पर यह सब सिर्फ शीशे में दिख रहा था। असल में वहां कोई नहीं था। तभी उसे किसी औरत के रोने की आवाज ऊपर वाली सीढ़ियों से आई। वो सीढ़ियों के पास गया तो उसने देखा कि वही लाल साड़ी पहने औरत सीढ़ियों पर सर झुकाए बैठकर रो रही है। वो और पास गया तो उसे उस लड़की के पैर दिखे जिन पर मेहंदी लगी थी। मानो किसी दुल्हन के हो। इससे पहले कि सुरजो उससे कुछ पूछता। उसकी आंखों के सामने वो पैर उल्टे हो गए और तभी उस लड़की ने सुरजो को घूर कर देखा। सुरजो उसका चेहरा देखकर सुन पड़ गया था क्योंकि वो और कोई नहीं बल्कि उसकी मरी हुई मंगेतर शावली थी। यह देखकर सुरजो अपनी नींद से उठ गया। वो असल में एक बहुत बुरा सपना देख रहा था। उस दिन के बाद से सुरजो को ऐसे ही बुरे सपने आने लगे थे। इसीलिए सुरजो को हर गौरी का आशीर्वाद दिलवाने के लिए सुरजो की मां लौलिता उसे पास के एक हर गौरी मंदिर ले गई और उसी मंदिर में उनकी मुलाकात नोयंतारा से हुई। ललिता ने नोयतारा को देखते ही समझ लिया था कि सुरजो की जिंदगी को यह लड़की ही बदल सकती है। इसलिए उसने नोयंतारा और सुरजो की शादी करवाने का फैसला किया। शादी के बाद सुरजो नोयंतारा को परी महल में ले आया था। लेकिन नोनतारा को जरा सा भी अंदाजा नहीं था कि परी महल में कितने सारे साए और कितने सारे राज उसका इंतजार कर रहे हैं। परी महल में भी उन सायों को यह नहीं पता था कि नोयंतारा कोई मामूली लड़की नहीं है। नोतारा सुरजो से शादी करके बहुत खुश थी। पर सुरजो ऐसा महसूस नहीं करता था। शादी की पहली रात ही सुरजो ने नोतंतारा को कह दिया था कि उसने यह शादी सिर्फ अपनी मां लौलिता के कहने पर की है। नोतारा को यह सुनकर बहुत बुरा लगा। पर वो जानती थी कि समय के साथ वो सुरजो का दिल जीत लेगी। उस रात नयनतारा पानी पीने के लिए किचन गई। जैसे ही वो वापस कमरे में लौटी नयनतारा का दिल दहल गया। सुरजो के बिस्तर के ठीक ऊपर एक लड़की हवा में तैर रही थी। उसने एक शादी का जोड़ा पहना हुआ था और उसकी आंखें गुस्से से लाल थी। नोारा ने उसे देखते ही कहा, कौन हो तुम? मेरे पति से दूर हो जाओ। उस लड़की ने तुरंत नोयंतारा की तरफ मुड़कर देखा और कहा, तू मुझे देख सकती है कौन है तू? और तब नोयंतारा ने उसे भगवान भूतनाथ से मिले अपने वरदान के बारे में बताया। नोतारा की सच्चाई सुनकर उस लड़की की लाल आंखें शांत हो गई और वह रोने लगी। इससे पहले कि नोयंतारा कुछ और कह पाती। पीछे से सुरजों की आवाज आई कि तुम किससे बात कर रही हो? वो आत्मा तुरंत गायब हो गई और नोतारा चुपचाप बिस्तर पर आकर सोने की कोशिश करने लगी। नोतारा अपने दिमाग को शांत ही नहीं कर पा रही थी। उसे समझ ही नहीं आ रहा था कि वो औरत कौन थी और नोतारा की बात सुनकर क्यों रोने लगी थी। इसी उलझन में नोतारा बिस्तर से उठकर उस औरत को परी महल में ढूंढने चली गई। रात के अंधेरे में परी महल बहुत ही डरावना लग रहा था। उस महल की हवा में एक अजीब सी घुटन थी। नोनतारा उसे हर जगह ढूंढने लगी। तभी एक बंद कमरे से आवाज आई। जब नोयंतारा उस कमरे में घुसी तो उसकी रूह कांप उठी। उस कमरे में बहुत सी लड़कियां शादी के जोड़े में खड़ी हुई थी और नोनतारा को देखते ही उल्लू ध्वनि निकालने लगी। उनकी आवाज इतनी तेज थी कि नोतंतारा घबरा गई पर उसने देखा कि उनके बीच में वही औरत भी थी जो नोतारा को कमरे में दिखाई दी थी। नोारा ने उससे पूछा तुम कौन हो? उस औरत ने जो जवाब दिया वो नोनतारा ने सपने में भी नहीं सोचा था। उसने बताया कि मरने से पहले उसकी शादी सुरजो से होने वाली थी। पर शादी से पहले ही सुरजों ने उसे जान से मार दिया। उसने कहा कि उसे मुक्ति तभी मिलेगी जब वो अपनी मौत का बदला सुरजो को मार कर लेगी और नोयन तारा को उसकी मदद करनी होगी। उसने यह भी बताया कि परी महल में बहुत सारे राज छुपे हैं। जो जैसा दिखता है वो वैसा है नहीं। तो आखिर अब नयनतारा क्या करेगी? तो क्या वह उस आत्मा को मुक्ति दिलाएगी या अपने सुहाग की रक्षा करेगी? क्या है आखिर परी महल का राज? और क्या सच में सुरजों ने अपनी होने वाली पत्नी को जान से मारा था? यह सब कुछ जानने के लिए देखिए नोन तारा 9 जून से हर रात 8:30 बजे सिर्फ कलर्स टीवी पर। और अगर आपको यह वीडियो अच्छी लगी तो हमारा चैनल खूनी मंडे सब्सक्राइब करना बिल्कुल मत भूलना। [संगीत] ला
8) https://youtu.be/qAsEqU9RpeE?si=pEjcdHZhxUdpYK9Z
मुंबई पुणे हाईवे सोहम मुंबई में रहने वाला एक सेल्स एजेंट था। उसकी कंपनी रियलस्टेट इंडस्ट्री की एक बहुत बड़ी कंपनी थी। सोहम ने ये कंपनी कुछ ही महीने पहले ज्वाइन की थी। मगर उसकी लाइफ का गोल था ढेर सारे पैसे कमाना। इसलिए वो अपना काम बहुत मन लगाकर करता था। सोहम कुछ ही महीनों में ऑफिस का सबसे ज्यादा प्रॉपर्टीज बेचने वाला एंप्लई बन गया था और उसका बॉस भी उसे ही ज्यादातर प्रोजेक्ट्स देने लगा था। सोहम ने ऑफिस में एक दोस्त भी बनाई थी ऋतु। ऋतु भी सोहम की तरह एक सेल्स एग्जीक्यूटिव थी। वो दोनों साथ में काफी वक्त बिताने लगे थे और एक दूसरे से प्यार करने लगे थे। एक दिन सोहम के बॉस ने उसे एक बहुत बड़ा प्रोजेक्ट दिया और उसे जल्द से जल्द वो प्रॉपर्टी बेचने को कहा। सोहम तुरंत ही उस प्रॉपर्टी के लिए बायरर्स ढूंढने लगा। कुछ दिनों बाद सोहम को एक सूटेबल बायर भी मिल गया। मगर वो प्रॉपर्टी और वो बायर दोनों ही पुणे में थे। इसलिए सोहम का पुणे जाना बेहद जरूरी था। यह सोचकर सोहम थोड़ा परेशान हो गया क्योंकि दो दिन में ऋतु का बर्थडे भी था। सोहम ने प्लान बनाया कि वो ऋतु को क्लाइंट से मिलवाने के बहाने अपने साथ पुणे ले जाएगा और जब ऋतु और सोहम उस प्रॉपर्टी में पहुंचेंगे तब सोहम उसे वहां एक सरप्राइज देगा। उसने बिल्कुल वैसा ही किया। ऋतु के बर्थडे ईद पर सोहम उसे लेकर पुणे निकल गया। वो दोनों खूब एंजॉय करते हुए जा रहे थे। सोहम ने मुंबई पुणे एक्सप्रेसवे लिया। रोड को बिल्कुल खाली पाकर वो बहुत एक्साइटेड हो गया। वो गाड़ी बहुत तेज स्पीड में चलाने लगा और ऋतू ने भी म्यूजिक की वॉल्यूम बढ़ा दी। उस खाली एक्सप्रेसवे पर सोहम की गाड़ी की स्पीड बढ़ती ही जा रही थी। उसने देखा कि आगे एक टनल आने वाला है तो उसने स्पीड और बढ़ा दी और मजे-मजे में गाड़ी की हेडलाइट डम कर दी। टनल के लाइट्स और गाड़ियों की डम रोशनी में वो टनल और भी ज्यादा शांत लग रहा था और उनकी गाड़ी का वो म्यूजिक पूरे टनल में गूंज रहा था। एक्साइटमेंट में सोहम ने गाड़ी और ज्यादा तेज कर दी। पर तभी उसे दिखा कि गाड़ी के सामने एक केसरी रंग की पुरानी साड़ी पहने एक औरत खड़ी है। तेज स्पीड में होने की वजह से सोहम उस गाड़ी को रोक नहीं पाया और वो गाड़ी उस औरत पर चढ़ गई। सोहम ने अचानक से ब्रेक लगाई और शौक में 2 मिनट गाड़ी में ही बैठा रहा। उसके बाद वो और ऋतु तुरंत गाड़ी से बाहर आए और उस औरत की बॉडी को ढूंढने लगे। मगर सड़क पर कुछ भी नहीं था बल्कि पूरे टनल में भी उन्हें कोई नहीं दिख रहा था। बस एक बहुत ही अजीब सी शांति थी। सोहम काफी परेशान हो गया। मगर ऋतु ने उसे शांत किया और कहा कि हो सकता है कि अंधेरे में उसे कुछ वहम हो गया होगा। वो दोनों यह बात कर ही रहे थे कि सोहम ने देखा 12:00 बज चुके थे। ऋतु का बर्थडे शुरू हो गया था। सोहम ने अपनी सारी चिंताएं साइड रखी और ऋतु को खुशी से हद करने लगा। उसने गाड़ी की डिग्गी खोली और उसमें ऋतु के लिए केक था। ऋतु उस केक को देखकर बहुत खुश हो गई। वो केक काटने ही वाली थी कि अचानक वो एक स्टैचू सी वहीं जम गई। सोहम ने ऋतु को पुकारा उसे हिलाया लेकिन ऋतु कुछ रिएक्ट ही नहीं कर रही थी। सोहम को कुछ समझ नहीं आया कि आखिर हुआ क्या? लेकिन जब उसने गाड़ी के साइड मिरर में देखा तो उसकी रूह कांप गई। उसे ऋतु के पीछे केसरी रंग की साड़ी पहने। वही औरत खड़ी दिख रही थी जिस पर कुछ देर पहले सोहम ने गाड़ी चला दी थी। वो औरत खून से लथपत थी और उसका पूरा चेहरा एक्सीडेंट की वजह से बिगड़ चुका था। उसके कंचे जैसी आंखों से वो ऋतु को घोड़े जा रही थी। सबसे डरा देने वाली बात तो यह थी कि वो औरत असल में दिख ही नहीं रही थी। सिर्फ गाड़ी के साइड मिरर के शीशे में दिख रही थी। अचानक ऋतु का पूरा शरीर थपकपाने लगा। उसका चेहरा नीला पड़ गया और नाक, मुंह और आंखों से खून आने लगा। बिल्कुल ऐसा लग रहा था जैसे ऋतु पर किसी ने कब्जा कर लिया हो। वो सोहम की तरफ मुड़ी और बहुत ही डरावने तरीके से हंसने लगी। सोहम उसे देखकर बेहद घबरा गया और भाग कर गाड़ी में बैठ गया। उसने गाड़ी स्टार्ट की और वहां से तुरंत निकल गया। उसे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था कि आखिर उसके साथ अभी हुआ क्या है। वो डर के मारे गाड़ी चलाते हुए रोने लगा। उसने अपना फोन निकाला और तुरंत पुलिस को कॉल लगाया। इससे पहले कि वो किसी से कुछ कह पाता। उसने देखा कि वो गाड़ी चलाता हुआ वहीं पहुंच गया था जहां उसने ऋतु को छोड़ा था। ऋतु वहीं बैठी रो रही थी। यह देखकर सोहम को लगा कि शायद ऋतु अब ठीक हो गई थी। वो तुरंत गाड़ी से निकला और ऋतु को पुकारने लगा। ऋतु ने सोहम को देखा और तुरंत दौड़कर उसके गले लग गई। सोहम ने उससे पूछा कि आखिर उसे हुआ क्या था? मगर वो कुछ नहीं बोली। पहले उसने रोना बंद किया और फिर वो सोहम को देखकर मुस्कुराने लगी। देखते ही देखते उसकी मुस्कुराहट वैसे ही डरावनी हो गई जैसे पहले थी और उसका चेहरा बदलकर उसी औरत के जैसा हो गया जिसे सोहम ने मिरर में देखा था। ऋतु उस केसरी रंग की साड़ी वाली औरत में बदल चुकी थी। सोहम को अब समझ आ गया था कि उसका सामना किसी भयानक आत्मा से हो रहा है। इससे पहले कि सोहम कुछ कर पाता। उस औरत ने सोहम का गला पकड़ लिया और जोर से चिल्लाते हुए सोहम का गला दबाने लगी। सोहम को अपनी छाती में भी बहुत तेज दर्द होने लगा। जैसे अंदर से कोई उसके दिल पर दबाव डाल रहा हो। तभी पीछे से आ रहा एक ट्रक रुका और ड्राइवर ने जल्दी से बाहर निकल कर सोहम पर एक पाउडर जैसी चीज डाल दी। जिसके बाद वह औरत वहां से कहीं गायब हो गई। सोहम ने देखा कि ऋतु गाड़ी के बैक साइड में उस सड़क पर बेहोश पड़ी है। ट्रक ड्राइवर ने सोहम से कहा कि उन्हें जल्द से जल्द उस टनल से निकलना चाहिए। उस ट्रक ड्राइवर की मदद से सोहम ने बेहोश ऋतु को गाड़ी में बिठाया और वो लोग उस टनल से बाहर निकले। उस ट्रक ड्राइवर ने तब सोहम को बताया कि उस टनल में यानी भटन टनल में एक पुरानी हिंदी फिल्म एक्ट्रेस की आत्मा भटकती है। जिसकी कई साल पहले उसी टनल में एक ट्रक एक्सीडेंट में बड़ी बेरहमी से मौत हुई थी। उसने बताया कि उस औरत की आत्मा उस टनल से जाने वाले किसी भी इंसान की जान ले सकती है। इतना ही नहीं उसने कुछ महीनों पहले ही वहां एक ट्रक ड्राइवर की जान ली थी। उसने बताया कि उस औरत की आत्मा उस टनल से जाने वाले किसी भी इंसान को उस टनल में कैद कर लेती है और फिर उसकी जान ले लेती है। लोगों को ऐसा लगता है कि गाड़ी का एक्सीडेंट हो गया है। पर असल में यह सब उस औरत की आत्मा का किया धरा होता है। उसने कहा कि वो पाउडर जो उसने सोहम पर डाला था वो एक तरह का भूत था। उसने वह भूत ऋतु के माथे पर भी लगाया और कुछ ही देर में ऋतु को भी होश आ गया। ऋतु को अपने साथ हुई घटना के बारे में कुछ भी याद नहीं था। लेकिन सोहम जानता था कि कैसे वो दोनों आज मौत के मुंह से बचे हैं। कई लोग कहते हैं कि मुंबई पुणे हाईवे का वो टनल ह्टेड है। और कई लोगों ने तो सोहम की तरह उस औरत को उस टनल के आसपास भटकते भी देखा है। आपको क्या लगता है? हमसे कमेंट्स में अपने थॉट जरूर शेयर कीजिए। और हां ऐसी ही दिल दहला देने वाली कहानियों के लिए हमारे चैनल खूनी मंडे को सब्सक्राइब करना बिल्कुल ना भूलें।
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ह्टेड कॉलेज। हम सभी के फोंस में बहुत से एप्स होते हैं। कैब बुकिंग से लेकर ग्रोसरी डिलीवरी, डायरेक्शंस, एंटरटेनमेंट। यहां तक कि बैंकिंग के लिए भी हम एप्स यूज़ करते हैं। हमारे सिर्फ एक टैब पर सब कुछ हो जाता है। पर अगर यह एप्स ही हमारे दुश्मन बन जाए तो। रिसेंटली मैंने Amazon MX पर उनकी नई सीरीज देखी। नॉकन कौन है? वो शो एक ऐसी ही डेडली ऐप के बारे में है। और हमारी आज की यह वीडियो उसी ऐप से इंस्पायर्ड है। तो यह कहानी है कबीर की। 19 साल का कबीर कोटा से दिल्ली आया था। सेंट माइकल्स इंस्टट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में इंजीनियरिंग करने। और इस कॉलेज का रूल था कि सारे स्टूडेंट्स को कैंपस के हॉस्टल में रहना होगा। कबीर अपने एडमिशन को लेकर बहुत खुश था। इनफैक्ट वो अपने घर से कॉलेज जाने वाला पहला लड़का था और जिस चीज का वो सबसे ज्यादा इंतजार कर रहा था वो थी फ्रेशर्स नाइट। सब इस रात के लिए बहुत एक्साइटेड थे और ट्रेडिशन के हिसाब से सबको अपने साथ एक डांस पार्टनर लेकर आना था। कबीर की इससे पहले कोई गर्लफ्रेंड नहीं रही थी। और उसने आज तक किसी भी लड़की को डेट के लिए नहीं पूछा था। लेकिन फ्रेशर्स नाइट के लिए उसके दिल में कोई थी रागिनी। रागिनी कॉलेज की सबसे सुंदर लड़कियों में से एक थी। जिसे कॉलेज के पहले दिन देखते ही कबीर को उससे प्यार हो गया था। कबीर ने हिम्मत करके रागिनी को प्रेशर्स नाइट के लिए पूछा और रागिनी ने मुस्कुराते हुए हां भी कह दिया। रागिनी ने कबीर से उसे शाम को पिक करने को कहा। यह सुनकर कबीर की खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा और वह शाम को टाइम से पहले ही रागिनी के हॉस्टल के बाहर पहुंच गया। उसे वहां रागिनी मिली तो सही लेकिन वह अकेली नहीं थी। उसके साथ उनका कॉलेज सीनियर विराज और उसके कुछ दोस्त भी थे। कबीर के आते ही विराज उसको कॉलर से पकड़ कर मारने लगा और बस यही कहता रहा कि फर्स्ट ईयर होकर उसमें इतनी हिम्मत कहां से आ गई कि उसने विराज की गर्लफ्रेंड रागिनी को फ्रेशर्स नाइट के लिए पूछ लिया। उस दिन विराज और उसके दोस्तों ने उस मासूम से कबीर को बहुत मारा। जैसे-जैसे वक्त बीता, विराज और उसके दोस्तों ने कबीर का जीना हराम कर दिया। वह उसे जहां देखते वहीं तंग करने लगते और पूरी-पूरी रात उसके हॉस्टल रूम के बाहर शोर मचाते। उसे मेंटली टॉर्चर करते। एक रात कबीर सोने की कोशिश कर रहा था। पर उसे नींद ही नहीं आ रही थी। कबीर जब करवट बदलते बदलते थक गया तो उसने अपना फोन स्विच ऑन किया। कहीं पर कुछ भी इंटरेस्टिंग नहीं था। कबीर फोन बंद करने ही वाला था जब उसे अपने मोबाइल के होम स्क्रीन पर एक अजीब सा ऐप दिखा। नॉकnockक। कबीर को लगा कि गलती से किसी लिंक पर क्लिक करने की वजह से यह ऐप उसके फोन में इंस्टॉल हो गया होगा। पर यह ऐप था कौन सा? जिसके बारे में उसने सुना ही नहीं था। ऐप खोलते ही उसे एक मैसेज आया। वेलकम टू नॉकnockक। एन ऐप दैट सॉल्व्स एवरीथिंग। नीचे एक ही बटन था। कंटिन्यू। थोड़ा हिचकिचाते हुए कबीर ने उस पर टैप किया। अगला मैसेज आया। मेक अ डेथ विश। कबीर मुस्कुरा दिया। आखिर ये ऐप क्या ही कर लेगा? यह सोचते हुए कबीर ने विराज का नाम वहां पर टाइप कर दिया। एक सेकंड के लिए स्क्रीन ब्लिंक होने लगी। फिर वो ऐप खुद बंद हो गया। कबीर को यह बात बहुत अजीब लगी और उसने फिर से उस ऐप को खोलने की कोशिश की पर अब वो ऐप उसके फोन से गायब हो चुका था। एप स्टोर पर भी नॉकnockक नाम का कोई ऐप उसे नहीं मिल रहा था। उसने सोचा कि शायद उसके फोन में वायरस आ गया है। इसीलिए उसने फोन को फॉर्मेट किया और फोन साइड में रखकर वो फिर से गहरी नींद में सो गया। अगली सुबह कबीर की आंख उसके फोन की नोटिफिकेशन से खुली। उसने अपना फोन चेक किया तो सबसे पहले उसका ध्यान टाइम पर गया। वो क्लास के लिए बहुत लेट हो गया था। इसी चक्कर में वो नोटिफिकेशन के बारे में सब भूलकर फटाफट तैयार हुआ और अपने रूम से क्लास के लिए भागा। कॉरिडोर से गुजरता हुआ वो नीचे जा रहा था। तभी उसने देखा कि रूम नंबर 21 विराज का रूम पुलिस टेप से सील हो चुका था। आसपास पुलिस वाले, हॉस्टल वार्डन और कुछ स्टूडेंट्स खड़े थे। कबीर ने पास खड़े एक सीनियर से पूछा कि वहां क्या चल रहा है? पर जो जवाब उसे मिला उसे सुनकर उसके रोंगटे खड़े हो गए। विराज का किसी ने गला काटकर मर्डर कर दिया था। वो कट इतना गहरा था कि विराज का सर उसकी बॉडी से अलग हो चुका था। पर हैरानी की बात यह थी कि जब पुलिस आई तब विराज का कमरा अंदर से लॉक्ड था। ना किसी ने कोई आवाज सुनी थी और ना ही कहीं पर कोई फोर्स एंट्री के निशान थे। कबीर के दिमाग में पिछली रात वाला इंसिडेंट आया। उसने तुरंत फोन खोला और देखा कि वो ऐप उसके फोन में फिर से आ गया था और उसे जो नोटिफिकेशन सुबह आया था उसमें लिखा था नॉकnockक प्रॉब्लम सॉल्वड। यह पढ़ के उसके हाथ से फोन गिर गया। पर ऐसा कैसे हो सकता था? कबीर ने फटाफट अपना फोन उठाया ताकि वो ऐप अनइंस्टॉल कर सके। पर कबीर उस ऐप को डिलीट ही नहीं कर पा रहा था। कबीर के पैरों तले जमीन खिसक चुकी थी। क्या विराज की मौत का कारण वो खुद था? इसी कशमकश में फंसा कबीर उसी क्लासेस के बाद वापस अपने रूम में चला गया। दोपहर हो चुकी थी। सब बच्चे क्लासेस अटेंड कर रहे थे और पूरा हॉस्टल खाली था। कबीर अकेला डरा सहमा अपने रूम में बैठा था। तभी उसके दरवाजे पर किसी ने नक किया। कबीर उठकर देखने गया तो दरवाजे पर कोई नहीं था। अब कबीर थोड़ा घबराने लगा था। उसने फिर से उस ऐप को अपने फोन से हटाने की कोशिश की। पर वो ऐप डिलीट ही नहीं हो रही थी। डरकर कबीर ने अपना फोन ही बंद कर दिया। कुछ लेकिन फिर कुछ देर बाद उसके फोन पर फिर से एक नोटिफिकेशन आया। पुश रागिनी फ्रॉम द स्टेयर्स। मतलब रागिनी को सीढ़ियों से नीचे गिरा दो। यह पढ़कर कबीर बहुत ज्यादा डर गया और उसने अपना फोन जमीन पर पटक दिया। पर उसके बावजूद उसके फोन पर नोटिफिकेशंस आते ही रहे। तंग आकर कबीर ने फिर से फोन उठाया तो इस बार उस ऐप पर एक वॉइस मैसेज था। कबीर ने घबराते हुए उस मैसेज को खोला और वो मैसेज सुनकर उसका दिल दहल गया। अगर तुम नहीं करोगे तो इससे पहले कबीर कुछ कर पाता। उस ऐप पर कुछ और ऑप्शंस आए। पुश रागिनी और कट कश्वी। कबीर के हाथ-पांव जम गए। कशवी तो उसकी छोटी बहन का नाम था। अचानक उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे कोई उसके ठीक पीछे खड़ा है। उसकी गर्म सांसे कबीर को अपनी गर्दन पर महसूस हो रही थी। कबीर के अंदर इतनी हिम्मत नहीं थी कि वो मुड़कर देख सके और तभी उसके कान में वही वॉइस नोट वाली आवाज आई। किसी को तो चूज़ करना पड़ेगा। अब कबीर समझ गया था कि अगर वो रागिनी वाला ऑप्शन चूज़ नहीं करेगा तो उसकी बहन कश्मीरी को अपनी जान से हाथ धोना पड़ेगा। कबीर के हाथ कांपने लगे। पर हिम्मत जुटाकर उसने एक सेकंड के लिए फोन से नजरें उठाई और सामने लगे शीशे में झांका और जो उसने देखा उसे देखकर कबीर सुन पड़ गया था। उसके पीछे एक लंबा काला साया खड़ा था। कबीर की डर के मारे जान निकली जा रही थी। उसने अपनी बहन को बचाने के लिए रागिनी का नाम चूज़ किया। और चूज़ करते ही वो ऐब और वो साया वहां से गायब हो गए। अगली सुबह रागिनी मिस्टीरियसली कॉलेज के मेन स्टेयर्स से गिर गई और उसका पैर टूट गया। कबीर को यह समझ आने लगा था कि अब वो बुरी तरह उस ऐप के चक्कर में फंस चुका है। वो ऐप अब उसकी जिंदगी को कंट्रोल कर रहा था। कबीर को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वो कैसे इस सब से बाहर निकले। कबीर ने अपने कमरे में खुद को बंद कर लिया और पागलों की तरह कांपते हुए रोने लगा। और तभी उसके फोन पर फिर से एक नोटिफिकेशन आया। पर इस बार कबीर ने अपने फोन को खोलने की बजाय उसे पूरी तरह से तोड़ दिया। उस दिन के बाद अगर उसे किसी से भी बात करनी होती तो वो हॉस्टल का लैंडलाइन यूज़ करता। अगले कुछ दिन कबीर के लिए बहुत शांत गुजरे। लेकिन फिर एक दिन अपनी क्लासेस अटेंड करने के बाद कबीर ने अपने घर पर बात करने के लिए लैंडलाइन से फोन मिलाया। लेकिन सामने से जो आवाज आई वो कबीर की मां की नहीं बल्कि वही आवाज थी जो उसने वॉइस मैसेजेस में सुनी थी। तुम्हें क्या लगा? सब खत्म हो गया। फोन वहीं छोड़कर कबीर वहां से भागा। पर अब उसे लगने लगा था कि शायद वो इस चीज से कभी निकल नहीं पाएगा। उसने अपने रूम में बैठकर यह सब कुछ अपनी डायरी में लिखा। तभी फिर से उसे अपने फोन की नोटिफिकेशन की आवाज आई। उसने अपनी डेस्क के आसपास देखा और लास्ट में उसके डेस्क के एक ड्रर में उसे अपना पुराना फोन सही सलामत पड़ा मिला। वही फोन जो उसने कुछ दिनों पहले पूरी तरीके से तोड़ दिया था। अब उसने मान लिया था कि वो यह सब कुछ खत्म करके रखेगा। इस बार नोनक ऐप पर लिखा था कट द ब्रेक्स ऑफ प्रिंसिपल्स कार। यानी प्रिंसिपल की गाड़ी के ब्रेक्स काट दो। कबीर से सहा नहीं गया और उसने गुस्से में वापस टाइप किया। व्हाट इफ आई डोंट? व्हाट डू यू वांट इन रिटर्न? तभी उसके फोन पर चार नाम आए थे और वो सारे नाम उसके परिवार वालों के थे। उसके ठीक नीचे लिखा था किल वन। कबीर इस चंगुल से निकलने की कोशिश कर रहा था। पर वो इसमें और उलझता जा रहा था। उसे अपने कमरे में जगह-जगह वही काला साया नजर आ रहा था और उसके कानों में एक अजीब सी आवाज गूंजने लगी। किल वन किल वन किल वन किल वन कबीर के लिए अब सब हदें पार हो चुकी थी। उसने चिल्लाकर कहा कबीर किल कबीर खत्म कर दो इस सारी प्रॉब्लम को। अगली सुबह कबीर अपने हॉस्टल में मरा हुआ पाया गया। उसके रूम से कोई सबूत नहीं मिला। बस एक डायरी मिली जिसके सभी पन्ने पूरी तरह से फटे हुए थे। दोस्तों अगर कभी आपके फोन में कोई ऐसा ऐप आ जाए तो क्या आप उसे यूज करेंगे? एक ऐसी ही थ्रिलिंग कहानी लेकर आया है Amazon MX Player अपनी नई सीरीज के साथ NKN कौन है? जिसमें एक लड़की तान्या की पूरी जिंदगी बदल जाती है। जब वो एक ऐप नॉकnockक को यूज करती है अपनी प्रॉब्लम सॉल्व करने के लिए। नॉकnन कौन है? एक बहुत ही इंटरेस्टिंग मिस्ट्री थ्रिलर है जिसे आपको बिल्कुल भी मिस नहीं करना चाहिए। स्ट्रीमिंग नाउ ऑन Amazon MX प्लेयर बिल्कुल फ्री। तो जल्दी से जाओ और चेक आउट करो नॉकनॉक कौन है। और अगर आपको यह वीडियो अच्छी लगी तो हमारा चैनल खूनी मंडे सब्सक्राइब करना बिल्कुल मत भूलना। [संगीत]
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चलते उन्होंने वो जगह एक्सप्लोर करने की सोची और इसी के चलते उन्होंने अपनी बाइक एक बहुत पुराने लोहे के गेट के सामने रोक दी। उस गेट की हालत बहुत खराब थी और वहां दूर-दूर तक कोई आदमी नहीं था। बोवाली रोड पर ब्रिटिश एरा में बना कब्रिस्तान अपने इतिहास की वजह से बहुत मशहूर था। कहा जाता था कि यहां एक लैंडस्लाइड का हादसा हुआ था जिसमें करीब 150 लोगों की मौत हो गई थी। तब से यह जगह नैनीताल की सबसे ह्टेड जगह मानी जाती है। पर समीर और उसके दोस्त इन कहानियों को सुनने के बाद भी उस जगह को एक्सप्लोर करने के लिए अपनी बाइक से उतर गए और कब्रिस्तान के अंदर बिना कुछ सोचे चलने लगे। उन तीनों में से बस रवि ने इस कब्रिस्तान के बारे में कुछ पढ़ा हुआ था। जैसे ही उसने बाकी दोनों को उस कब्रिस्तान के किस्सों के बारे में बताया, वैसे ही उसके दोनों दोस्त उस कब्रिस्तान को देखने के लिए और भी ज्यादा एक्साइटेड हो गए। अगले ही पल सब अपना दिमाग वहां के मिस्ट्रीज को सुलझाने में दौड़ाने लगे। वो बहुत जोर-जोर से बोलने लगे और बेपरवाह होकर वहां रखी चीजों को हाथ लगाने लगे। वो मरे हुए लोगों का मजाक उड़ाने लगे। समीर और उसके दोस्त कब्रिस्तान के अंदर अपनी सेल्फीज़ लेने लगे और मस्तीमस्ती में वो लोग उस जगह का मजाक उड़ाने लगे। अनजाने में यह सब करते हुए उन्हें हल्का सा भी अंदाजा नहीं था कि इसका अंजाम कितना बुरा हो सकता था। दिस फिनिश ही एक आधा घंटा उस कब्रिस्तान में बिताकर तीनों ने वापस अपने होटल जाने का डिसाइड किया। वो अपनी बाइक स्टार्ट करके वापस रोड पर निकल पड़े कि तभी उन्हें पहली बार कुछ अजीब लगा। बस 1 कि.मी. की ड्राइव के बाद ही समीर और उसके दोस्तों को एक बहुत ही अजीब सी थकान होने लगी और उन्हें अपने पूरे शरीर में बहुत तेज दर्द महसूस होने लगा। वो दर्द धीरे-धीरे और बढ़ने लगा। मानो उनके शरीर से कोई उनकी जान निकाल रहा हो। वो तीनों दर्द सहते-सहते किसी तरह रोड पर अपनी आंखें टिकाए बस होटल की तरफ अपनी बाइक चला रहे थे। पर होटल रूम पहुंचते ही सबका सर जोर से घूमने लगा। माथा ऐसा गर्म हो गया था कि जैसे किसी ने कोई जली हुई मोमबत्ती उनके सर पर रख दी हो। वो तीनों बुखार से कांपने लगे और तब उन्हें पहली बार अपने साथ किसी के होने का एहसास होने लगा। जैसे वो अकेले नहीं है और उनके साथ उस कब्रिस्तान से कोई और भी आया हो। तभी रवि को रूम के शीशे में दिखा कि कुछ काले साए समीर और नवीन के अंदर से उनकी जान खींच रहे हैं और वो लोग धीरे-धीरे बेहोश हो रहे हैं। लेकिन इससे पहले रवि कुछ कर पाता। उसे चक्कर आने लगे और वो भी बेहोश हो गया। कुछ देर बाद समीर की आंख खुली तो वो और उसके दोनों दोस्त उसी कब्रिस्तान में थे। वो तीनों वहां से बाहर निकलने का रास्ता ढूंढ रहे थे। लेकिन बहुत देर तक भटकने के बाद भी तीनों को बाहर का रास्ता नहीं मिल रहा था। वो उसी कब्रिस्तान में कैद हो चुके थे। रात के अंधेरे में गलती से समीर ने अपना पैर एक कब्र पर रख दिया। उसने नीचे देखा तो वहां नवीन का नाम लिखा था। उसी के बगल में एक और कब्र थी। उस पर रवि का नाम था। जब उसने ध्यान से देखा तो तीसरी कब्र पर समीर उसका खुद का नाम लिखा था। यह देखकर उसका दिल जोर से धड़कने लगा। तभी समीर के पैरों पर कुछ लुढ़कता हुआ आकर लगा। जब समीर ने देखा तो वो रवि का कटा हुआ सर था। समीर की आंखें फटी की फटी रह गई। उसने चिल्लाते हुए जैसे ही अपने दोस्त नवीन की ओर मुड़कर देखा तो नवीन की आंखें काली पड़ चुकी थी और वो समीर को गर्दन टेढ़ी करके घूरने लगा। इससे पहले समीर कुछ कर पाता। नवीन ने उसकी गर्दन पकड़ कर उसे हवा में उठा लिया। समीर दर्द से छटपटाने लगा कि तभी रवि ने उसे बेहोशी की हालत से उठाया। वो तीनों अभी भी उसी होटल रूम में थे। और जो समीर ने देखा वो एक सपना था। जब समीर ने अपना सपना नवीन और रवि को बताया तो उन दोनों ने जो कहा उसे सुनकर तीनों का दिल दहल उठा। रवि और नवीन ने समीर को बताया कि उन्होंने भी हूबहू वैसा ही सपना देखा है जैसा समीर ने देखा है। खौफ से कांपते हुए वो तीनों रिसेप्शन की तरफ भागे। रिसेप्शन पर खड़ा वेटर अजय वहीं का रहने वाला एक पहाड़ी आदमी था। वो वहां के भूत प्रेत के किस्सों से काफी वाकिफ था। समीर से बात करने पर उसे इस बात का यकीन हो गया था कि उन लड़कों ने अनजाने में उस भूतिया कब्रिस्तान की आत्माओं को नाराज कर दिया है और अब हर जगह वो आत्माएं उन तीनों का पीछा करती रहेंगी। अजय नैनीताल की पहाड़ी प्रथा बचपन से सीखता हुआ भड़ा हुआ था। वो उन्हें वापस उनके रूम के अंदर ले गया। उसने तीनों लड़कों को एक सर्कल में बिठाया। और उसके पीछे-पीछे मंत्र रिपीट करने को बोला। उसने उनसे कहा कि चाहे उन्हें कुछ भी दिखे उन्हें मंत्र पढ़ते रहना है। अजय ने अपनी आंखें बंद की और आत्माओं से माफी मांगने लगा जिसको तीनों दोहराने लगे और तभी उन तीनों को दिखा कि कई काले साए हवा में उनके आसपास मंडरा रहे हैं। चक्कर लगा रहे हैं। यह दृश्य देखकर तीनों का दिल दहल गया। लेकिन फिर भी वो मंत्र पढ़ते रहे और फिर कुछ ही देर में वो साए वहां से गायब हो गए। अजय ने उन्हें कहा कि अब उस कब्रिस्तान की आत्माओं ने उन्हें माफ कर दिया है और उनका पीछा छोड़ दिया है। उस पूजा के तुरंत बाद ही उन तीनों का शरीर तपना बंद हो गया और अगले दिन सोकर उठने के बाद मानो समीर और उसके दोस्तों को ऐसा लग रहा था जैसे पिछली रात उनको कुछ हुआ ही नहीं था। उनका दर्द, बुखार और चक्कर कभी था ही नहीं। कुछ बचा था तो बस वो भयानक एक्सपीरियंस। उस रात को तो वह कभी नहीं भूल सकते। लेकिन उन्होंने डिसाइड किया कि वो फिर कभी ऐसे लापरवाह नहीं होंगे और फिर कभी किसी कब्रिस्तान में भूल के भी कदम नहीं रखेंगे। दोस्तों इस वीक थिएटर में रिलीज हो रही है फाइनल डेस्टिनेशन ब्लड लाइंस जो कि एक बहुत ही थ्रिलिंग सुपर नेचुरल हॉरर फिल्म है 15th में से थिएटर्स में इस मूवी का बिग स्क्रीन एक्सपीरियंस बिल्कुल भी मिस आउट मत करना अगर आपको यह वीडियो अच्छी लगी तो हमारा 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रश्मि के सवाल का उसने कोई जवाब नहीं दिया। दीपक खिड़की के पास पहुंचकर खड़ा हो गया और रूम में एक अजीब किस्म का सन्नाटा फैल गया। तभी दीपक ने एक टांग खिड़की पर रख दी। यह देखकर रश्मि का दिल जोर से धड़कने लगा। दीपक पीछे देखकर मुस्कुराया पर उसका चेहरा पूरी तरह से बदल चुका था। दीपक ने अपना दूसरा पैर भी खिड़की के ऊपर रख दिया। रश्मि उसकी तरफ भागी लेकिन तब तक दीपक नीचे कूद चुका था। रश्मि ने तुरंत बाहर जाकर सबको अंदर बुलाया। सबके अंदर पहुंचते ही रश्मि ने देखा कि उसका भाई अभी कूदा नहीं है और खिड़की के पास ही खड़ा हुआ है। यह देखकर रश्मि हैरान रह गई। लेकिन उसके छोटे भाई दीपक की आवाज बदलने लगी और वो अजीब तरीके से झटपटाने लगा। यह नॉर्मल नहीं था। मानो जैसे कोई उसे कंट्रोल कर रहा था। वो खाली जगह में किसी को देखे जा रहा था। ऐसा लग रहा था कि दीपक पर किसी का साया आ चुका है। शाम को दीपक लगातार बड़बड़ाता रहा कि अगर वह हॉस्पिटल में ज्यादा देर तक रहा तो जल्द ही कोई उसे मार देगा। डॉक्टर्स के इंजेक्शन देने पर भी वो सो नहीं रहा था। दीपक की हालत अब और खराब होती जा रही थी। रश्मि की मां अपने बेटे को ऐसी हालत में देखकर घबरा गई और उसे डिस्चार्ज करवा के वापस घर ले गई। करीब 10 घंटे सोने के बाद जब दीपक अपने घर में उठा तो वह दोबारा अजीब ढंग से बर्ताव करने लगा। वो घंटों रूम की खिड़की के बाहर बैठकर रोते हुए किसी को देखे जा रहा था। रश्मि ने उससे पूछना चाहा कि वो किसे देख रहा है? दीपक ने गिरते हुए आंसुओं के साथ अपनी उंगली से एक जगह इशारा करके दिखाया। उसकी उंगली के सामने उनकी मां खड़ी थी। दीपक का हाथ अपनी तरफ देखकर उसकी मां भी डर गई। पर यह किसी को नहीं पता था कि दीपक अपनी मां के पीछे की तरफ इशारा कर रहा था। दीपक को अपनी मां के पीछे किसी औरत का साया नजर आ रहा था। वो धीरे से रश्मि के कान में बोला कि वो मुझे लेने आई है। यह सुनकर रश्मि के रोंगटे खड़े हो गए। तभी अचानक दीपक वहां से उठा और भाग कर किचन के सिंक के नीचे जाकर बैठ गया। किचन के अंधेरे में वो जोर-जोर से हंसने लगा। रश्मि भी उसके पीछे-पीछे गई और उसने घबराते हुए अपने भाई से पूछना शुरू कर दिया कि वो किसके बारे में बात कर रहा है और इतने अजीब ढंग से क्यों हंस रहा है। दीपक ने धीरे से कहा मैं नहीं हंस रहा। वो हंस रही है। पूरा परिवार यह सुन रहा था। सब बेहद डर गए थे। दीपक की मां ने उसे नींद की गोली दी और अपने साथ ही सुला लिया। उस रात रश्मि भी अपनी मां के बेडरूम में ही सो रही थी। आधी रात रश्मि की नींद अचानक ही खुल गई। धीरे से उसे अपने पैर पर किसी के हाथ महसूस हुए। कोई उसके पैर रस्सी से बांध रहा था। वो कोई और नहीं बल्कि दीपक ही था। रश्मि कैसे ना कैसे करके खुद को छुड़ाने की कोशिश करने लगी। लेकिन तभी रश्मि ने देखा दीपक की आंखों का रंग लाल पड़ने लगा था। ऐसा लग रहा था कि जैसे दीपक की नीली आंखें रात के अंधेरे में चमक रही हो। दीपक रश्मि के बगल में आकर लेट गया और उसे घूरने लगा। रश्मि को उसका छोटा भाई बहुत डरावना लग रहा था। तभी उसके भाई ने रश्मि के बाल पकड़ लिए और उन्हें जोर से खींचने लगा। दर्द के मारे पल भर के लिए रश्मि की आंखें बंद हो गई। जब उसने आंखें खोली तो दीपक कमरे में नहीं था और रश्मि के पैर भी खुले हुए थे। उसे लगा कि शायद उसने कोई बुरा सपना देखा है। लेकिन जैसे ही उसने करवट ली उसका खून सर से पैरों में भाग गया। उसने एक औरत को अपने बगल में लेटा हुआ देखा। पूरे कमरे में शांति थी। पर रश्मि की एक चीख ने सबको नींद से उठा दिया। रश्मि ने जब अपने मां-बाप को बताया कि उसके साथ क्या हुआ है तो वो सुन पड़ गए। तभी उनके घर की छत से दीपक के चीखने की आवाजें आने लगी। तीनों ने छत पर जाकर देखा तो दीपक खुद से ही रात में बातें कर रहा था। रश्मि और अपने पेरेंट्स को देखते ही दीपक उनकी तरफ मुड़ा। और उन्हें देखकर एक अजीब ढंग से मुस्कुराया। उसने हंसते हुए एक अजीब सी आवाज में रश्मि से पूछा। कि उसके पैर अब कैसे हैं और क्या वो भी रात में प्रिया से मिली? यह सब सुनकर रश्मि सहम गई और सबके सामने उसका रोना छूट गया। तभी दीपक बहुत गुस्से में आ गया। उसके चेहरे ने एक भयानक रूप ले लिया था। ऐसा लग रहा था कि उस पर किसी आत्मा का साया है। उसने रश्मि को उसके बालों से पकड़ कर हवा में उठा लिया। जब उनके पापा दीपक को रोकने उसके पास गए तो दीपक ने दूसरे हाथ से अपने पापा को एक जोर का धक्का दिया और वो नीचे गिर पड़े। दीपक रश्मि के ऊपर बहुत जोर से चीखा और चीखते ही अचानक बेहोश होकर नीचे गिर पड़ा। सुबह जब दीपक को होश आया तो वो अपने ही घर में एक चेयर से बंधा हुआ था। एक पंडित उसके सामने बैठा था। पंडित ने दीपक को देखकर बताया कि एक्सीडेंट की जगह से दीपक के साथ कोई और भी वापस आया था। एक औरत जो उसी रोड पर मर गई थी। अब सबको समझ आने लगा था। दीपक जिस प्रिया की बात कर रहा था शायद वो वही औरत थी जिसकी एक्सीडेंट में मौत हुई थी। पंडित ने कहा कि उन्होंने पूजा करके दीपक के अंदर से उस लड़की की आत्मा को मुक्त कर दिया है। उसके बाद पंडित की सलाह मानकर दीपक को हॉस्पिटल में फिर से एडमिट कराया गया। कुछ दिनों बाद दीपक बेहतर महसूस करने लगा। लेकिन तब भी उसकी अजीब हरकतें बंद नहीं हुई। आखिर में दीपक के परिवार वालों ने एक नए शहर में एक नए घर में शिफ्ट किया। जब दीपक नई जगह आया तो वो धीरे-धीरे नॉर्मल होने लगा और अब वो बिल्कुल ठीक है। लिंक डिस्क्रिप्शन में है। क्लिक एंड डोंट मिस योर चांस। इस सॉफ्टवेयर के साथ आप हीरो बन सकते हैं अपने ड्रीम्स के। अगर आपको यह वीडियो अच्छी लगी तो हमारा चैनल खूनी मंडे सब्सक्राइब करना बिल्कुल मत भूलना।
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क्या तुम्हें यकीन है कि इस शरीर में सिर्फ तुम्हारी ही आत्मा रहती है या फिर कोई और भी है जो तुम्हारे भीतर अंधेरे कोनों में चुपचाप बैठा है। सोचो अगर उनकी गिनती एक नहीं दो नहीं बल्कि पांच से 10 तक हो तो तुम उन्हें पहचान पाओगे कैसे? कौन सी आवाज तुम्हारी है? और कौन सी आवाज पर आई? जब वह आत्माएं तुम्हारे शरीर पर अपना हक जताने लगेंग जब हर सांस हर धड़कन उनका हो जाएगा। तब क्या तुम लड़ सकोगे उनके खिलाफ या फिर धीरे-धीरे तुम्हारा शरीर उनका घर बन जाएगा और तुम बस एक मेहमान जो कभी भी बाहर फेंक दिया जाएगा। विक्रम एक छोटे से गांव मालेवाड़ी में रहता था। विक्रम 22 साल का था। पुणे से बीए की पढ़ाई कर चुका था और छुट्टियों में अपने गांव आया था। शांत जिम्मेदार गांव के मंदिर में मदद करने वाला और अपने पिता के खेतों में हाथ बटाने वाला लड़का। उसकी मां सरस्वती ताई पूजा पाठ और कथा की बेहद भक्त थी। पिता गणपत राय सावंत पुराने जमाने के एक ईमानदार किसान थे। विक्रम का सबसे करीबी दोस्त था अनिकेत जो उसके साथ पढ़ता था। बचपन से ही हर त्यौहार मेला और मस्ती में शामिल रहा। उस शाम बारिश की हल्की बूंदे गिर रही थी। खेतों की मिट्टी से उठती धीमी खुशबू हवा में तैर रही थी। विक्रम और अनिकेत दोनों खेत का काम खत्म करके बरगद के पेड़ के नीचे बैठे थे। अनिकेत ने एक बीड़ी जलाई और विक्रम को पकड़ाई। ले भाई कॉलेज की छुट्टी है तो थोड़ी हवा तो लगने दे दिमाग को। दोनों बैठकर बातें कर रहे थे। पुणे की पढ़ाई गांव के लोग सुधा से विक्रम की सगाई की चर्चा। तभी विक्रम अचानक चुप हो गया। उसकी नजर पेड़ की सबसे ऊंची शाखा पर गई। अनिकेत ने उसकी तरफ देखा। अबे बोल क्यों नहीं रहा? विक्रम ने शांति से कहा तू देख नहीं रहा है क्या? कोई ऊपर बैठा है? अनिकेत ने ऊपर देखा। कुछ नहीं था। पेड़ सिर्फ हवा से हिल रहा था और अंधेरा थोड़ा घना हो रहा था। चल अंदर चलते हैं। बारिश तेज होने वाली है। लेकिन विक्रम ने बस एक टक देखा। और कहा तू जा मैं बस थोड़ी देर में आता हूं। अनिकेत वहां से चला गया। विक्रम अब अकेला बैठा था। उसने अपनी आंखें बंद कर ली और फिर अचानक उसके शरीर में कुछ महसूस होने लगा। ऐसा लगा जैसे किसी ने उसके सिर पर हाथ रख दिया हो। उसके होठ अपने आप कुछ बोलने लगे। संस्कृत के शब्द जो उसने कभी सीखे नहीं थे। उसकी सांसे तेज हो गई और तभी उस पेड़ के ऊपर से एक तेज हवा का झोंका सीधे विक्रम के शरीर पर उतरा। अगले ही दिन से विक्रम का बर्ताव अजीब हो गया। कभी वो खुद से बातें करता, कभी औरत जैसी आवाज में हंसता तो कभी किसी बूढ़े इंसान की तरह कांपती आवाज में गालियां देता। दिन में अक्सर उसकी आंखें पलट जाती और वो घंटों चुपचाप दीवार को घोरता रहता। सबसे पहले यह बदलाव उसकी मां ने देखा। फिर अनिकेत को भी यह फर्क महसूस हुआ। एक दिन दोपहर में खेत पर उसने विक्रम को खुद से कहते सुना। मेरा नाम बसंती है। मुझे न्याय चाहिए। मैं वो नहीं हूं। मैं बालाजी हूं। मुझे जला दिया गया है। ये तेरा नहीं मेरा शरीर है। तू इसमें क्यों आया है? धीरे-धीरे यह बात पूरे गांव में फैल गई। गांव वालों को समझ में आ गया कि विक्रम के साथ कुछ जरूर हुआ है। जब गांव के लोग उसे देखने आए। उसमें एक बुजुर्ग थे। उन्होंने यह बताया बरगद का वो पेड़ जहां विक्रम और शाम बैठा था। पुराने जमाने में फांसी देने की जगह थी। वहां जिनकी मृत्यु हुई उनकी आत्माएं अब भी भटकती हैं। उनका मानना था कि उन आत्माओं में आपस में कोई पुराना संबंध था। किसी के साथ अन्याय हुआ। किसी ने किसी को मारा, कोई गवाह था तो कोई बलि चढ़ाया गया। अक्सर दोपहर के समय जब सूरज ठीक सर पर होता था। विक्रम सबसे ज्यादा असामान्य व्यवहार करता। मानो रोशनी में ही वह आत्माएं सबसे ज्यादा प्रखर होती थी। गांव में डर फैल गया। बच्चे विक्रम को देखकर भागने लगे और जब वो अकेला सड़कों पर चलता दिखता लोग अपने घरों के दरवाजे बंद कर लेते। अब सवाल यह था यह आत्माएं क्या चाहती थी? और क्या वो विक्रम को कभी छोड़ेंगी? अमावस्या की रात को विक्रम ने कुछ अजीब मांग की। कभी वो आधी रात को जोर-जोर से चिल्लाने लगता। मुझे काले मुर्गे की बलि चाहिए तो कभी किसी को देखकर कहता बिल्ली का खून दो। वो खून से सना खाना मांगता तो कभी जले हुए चावलों की थाली। कई बार उसकी मां ने देखा कि वो अकेले में कच्चा मांस चबाने की एक्टिंग करता या मिट्टी खाने की कोशिश करता। गणपत राव और सरस्वती ये देखकर बहुत डरने लगे और विक्रम की चिंता करने लगे। अमावस्या की रात जैसे उन आत्माओं को एक नई ताकत मिलती। उस रात विक्रम पूरी तरह बदल जाता। उसका शरीर कांपता मांसपेशियां अकड़ जाती। और उसकी आवाजें एक साथ गूंजने लगी। चाहिए जैसे एक ही समय में कई लोग उसके अंदर से बोल रहे हो। कभी-कभी वो खुद को जमीन पर पटक लेता तो कभी दीवारों पर सर मारता और चीखता। जैसे उसके अंदर युद्ध चल रहा हो। कोई डॉक्टर यह समझ नहीं पाया कि इतनी चोटें खुद कैसे लगीं। और उसका इलाज कैसे किया जाए। घरवाले और अनिकेत ने फैसला किया। हर अमावस्या को उसे बांध कर रखते हैं और दरवाजे पर नींबू मिर्ची लटकाते हैं। क्योंकि अमावस्या को अगर उसे खुला छोड़ दिया जाए तो वो किसी और को भी मार सकता है। अब जब विक्रम की हालत काबू से बाहर हो चुकी थी तो अनिकेत और गणपत राव मिलकर कोई तांत्रिक बाबा को ढूंढने लगे। गणपत राव के दोस्त ने उसे वामन जोशी बाबा के बारे में बताया जो पड़ोस के गांव में रहते थे। और कई सालों से ऐसे मामलों की साधना कर रहे थे। अनिकेत और गणपत राव ने बाबा को विक्रम की हालत के बारे में बताया और खासकर अमावस्या की रात की कहानी बताई। बाबा ने घर आकर पहले विक्रम को दूर से देखा। फिर कुछ मंत्र पढ़कर उसके माथे पर हाथ रखा। तुरंत ही विक्रम की आंखें पलट गई। और वह जोर-जोर से हंसने लगा। कभी एक औरत की आवाज में कभी बच्चे की चीख में तो कभी किसी बूढ़े पुरुष की आवाज में बाबा समझ गए इसके शरीर पर किसी ने कब्जा किया है शायद एक से ज्यादा आत्माओं ने और हर आत्मा की कहानी अलग है। इसको मुक्त करने के लिए सही समय का इंतजार करना पड़ेगा। आप लोग कुछ दिन तक इसका विशेष ख्याल रखो। इसे अकेला मत छोड़ना। किसी अजनबी से संपर्क ना होने दें और घर में हर रोज हनुमान चालीसा का पाठ करते रहो। उचित मुहूर्त पर सभी आत्माओं की कहानी जानकर मैं उनकी मुक्ति की प्रक्रिया कर पाऊंगा। तब तक विक्रम को संभालना ही सबसे बड़ी चुनौती होगी। इतना बताकर बाबा वहां से निकल गए। अगले कुछ दिन विक्रम के घर वालों ने उसका ख्याल रखा। उसे बाहर जाने से रोका। और उसने जो कुछ मांगा उसे दिया। बाबा ने अष्टमी का मुहूर्त निकाला और उसके एक दिन पहले विक्रम के घर पहुंच गए। उन्होंने विक्रम की हालत देखी और फिर विक्रम के चारों ओर घेरा बनाकर कुछ मंत्र पढ़े और विक्रम की आंखों में देखा। विक्रम का शरीर कांपने लगा और उसके चेहरे के भाव बदलने लगे। एक पल में वह स्त्री बन गया। अगले ही पल बच्चा फिर एक पुरुष तुम कौन हो? एक-एक करके अपना नाम और मृत्यु की वजह बताओ। अब एक-एक कर आत्माएं सामने आने लगी। मैं बसंती हूं। मुझे दहेज के लिए मेरे पति ने जला दिया था। उसकी आत्मा न्याय मांग रही थी। मेरा नाम बालाजी है। 12 साल का मासूम लड़का जिसे उसके रिश्तेदारों ने कुएं में धकेल दिया। वो अपने अंतिम संस्कार की मांग कर रहा था। मैं राजन हूं। मुझे गांव वालों ने बलात्कारी घोषित करके कुएं में धकेल दिया था। उसकी आत्मा अभी भी गुस्से में थी और कहती थी कि उसका अपमान हुआ है। मैं मीरा हूं। एक स्त्री जिसकी नई नई शादी हुई थी और उसने आत्महत्या की थी। लेकिन उसकी आत्मा यह मानने को तैयार नहीं थी कि उसकी मौत हो चुकी थी। वो अपने ससुराल वालों से बदला लेना चाहती थी। राधु एक शराबी जिसने कई अपराध किए थे और अब विक्रम के शरीर से प्रायश्चित करना चाहता था। तुम सब ने विक्रम को ही क्यों चुना? और तुम्हें इससे क्या चाहिए? इसके शरीर में शांति है। इसका मन साफ है। हमें शांति चाहिए। इसलिए हम इसके शरीर में आए हैं। हर आत्मा ने अपनी अलग-अलग मांगे रखी। मुझे काले मुर्गे की बलि चाहिए। मुझे बिल्ली के खून से तिलक। मैं गंगाजल से स्नान करना चाहता हूं। मेरे लिए राख से एक मंडल खींचो। मुझे पीपल के पेड़ के नीचे दिया जलाना। बाबा ने गणपत राव और सरस्वती से कहा आप लोग पूजा की तैयारी करो। और इस चिट्ठी में जो सामग्री लिखी है वो सब सामान लेकर आओ। अब ये एक लंबी और कठिन प्रक्रिया की शुरुआत थी। अष्टमी की रात आ चुकी थी। गांव में घना अंधेरा और चारों ओर हल्की हवा चल रही थी। विक्रम के घर वाले बाबा के निर्देशों के अनुसार पूजा की सामग्री लेकर घाट के किनारे पहुंचे। काला मुर्गा, गंगाजल, नींबू, राख, पुराने तांबे के पात्र और पीपल के पत्ते। बाबा वामन जोशी ने वहां दो पूजा स्थलों की तैयारी की। एक तरफ भगवान की पूजा रखी गई थी। जहां विक्रम के माता-पिता और अनिकेत जैसे करीबी लोग दीप जलाकर बैठ गए। ताकि वह मंत्र और हवन में शामिल रहें। लेकिन विक्रम की पीड़ा ना देख सके। दूसरी तरफ बाबा ने हवन कुंड जलाकर पीली मिट्टी, राख और रक्त के एक बड़ा मंडल खींचा। बीच में विक्रम को बिठाया गया। चारों पंडितों ने उसे चारों दिशाओं से घेर लिया। और जोर-जोर से तंत्र मंत्र का जाप शुरू किया। जैसे-जैसे मंत्र तेज हुए विक्रम का शरीर कांपने लगा। वो जोर से चिल्लाया। उसकी आंखें पलट गई। उसके चेहरे के हाव-भाव बदलने लगे। पीछे से कुत्तों के रोने की आवाज आने लगी। फिर आत्माएं एक के बाद एक बहार आने लगी। पर हर आत्मा चाहती थी कि वह पहले मुक्त हो। इस लालच में विक्रम के शरीर में ही आत्माएं आपस में भिड़ गई। उसके शरीर में झटके आने लगे। उसने खुद को नोचना शुरू कर दिया। कभी उसके बाल खड़े हो जाते। कभी जमीन पर लोटपोट हो जाता। और अंत में विक्रम की आंखों से खून निकलने लगा। बाबा चिल्लाए। मंत्र बंद मत करना। सभी आत्माएं मुक्त हो जाने दो। तभी अचानक एक चिंगारी सी रोशनी उठी और विक्रम बेहोश हो गया। एक के बाद एक आत्माएं उसका शरीर छोड़ने लगी। जैसे कैद पंछी पिंजरे से उड़ते हैं। शरीर अब शांत हो गया। रोशनी धीमी होने लगी। और जैसे ही आखिरी आत्मा निकली वहां शांति छा गई। घाट की हवा स्थिर हो गई। पास के कुत्ते जो भौक रहे थे अचानक चुप हो गए। विक्रम का शरीर अब मुक्त हो चुका है। इसके बाद विक्रम दो दिन तक सोया रहा। बिल्कुल बेहोश। जैसे उसकी आत्मा भी थक चुकी हो। उसकी मां हर पल उसके सिरहाने रोते हुए बैठी रहती और एक ही बात पूछती। मेरा विक्रम मुझे वापस मिलेगा ना? मेरा विक्रम ठीक हो जाएगा ना? ठीक हो जाएगा ना मेरा विक्रम। तीसरे दिन सुबह विक्रम की आंखें धीरे-धीरे खुली। उसका चेहरा उतरा हुआ था। आंखों के नीचे गहरे काले घेरे पड़ चुके थे। उसने धीरे से पूछा, मैं कहां हूं? बाबा ने उसकी ओर देखा और मुस्कुराए। तुम अपने घर पर सुरक्षित हो और अब सिर्फ तुम ही हो और कोई नहीं। विक्रम को कुछ भी याद नहीं था कि यह 2 महीने कैसे बीते। उसे बस इतना याद था कि उसने बरगद के नीचे किसी चीज को देखा था। उसके माता-पिता और अनिकेत को महसूस हुआ कि विक्रम अब पहले जैसा नहीं रहा। वो अब ज्यादा बात नहीं करता था। अकेले बैठता और कभी-कभी आसमान की तरफ ऐसे देखता जैसे किसी को ढूंढ रहा हो। सुधा जिससे उसकी सगाई हुई थी। फिर कभी उससे मिलने नहीं आई। विक्रम के दोस्त अनिकेत ने कई बार उसे हिम्मत देने की कोशिश की। लेकिन हर बार विक्रम बस हल्के से मुस्कुरा देता और जब कोई उससे पूछता तो ठीक तो है ना विक्रम तो वो बस एक लंबी सांस लेकर कहता शरीर तो एक ही है पर किसका है ये आज भी तय नहीं हुआ है [संगीत] ओम
13) https://youtu.be/ULxdVaX9M4w?si=O7iMaOl4QrASUfAh
[संगीत] तो दोस्तों आज तक आपने स्केरी पंपकिन को इतना सारा प्यार दिया है उसके लिए तहे दिल से शुक्र शुक्रिया। तो दोस्तों, हमें बहुत सारे कमेंट्स आते हैं कि स्केरी पंपकिन की वीडियोस जो है वो आजकल सभी को इंग्लिश में सुनाई दे रही है। तो दोस्तों, मैं बताना चाहूंगी कि YouTube पे एक नया अपडेट आया है, एक फीचर आया है जो कि बहुत ही बढ़िया फीचर है। जिसमें आप वीडियोस अलग-अलग लैंग्वेजेस में सुन सकते हो। जैसे कि स्केरी पंपकिन के हिंदी वाले वीडियोस आप अब इंग्लिश में भी सुन सकते हो। आपको वीडियो के सेटिंग में जाना है और वहां से ऑडियो चेंज करना है और आप अब स्केरी पंपकिन के सारे वीडियोस इंग्लिश और हिंदी दोनों लैंग्वेज में एंजॉय कर सकते हैं। तो दोस्तों स्केरी पंपकिन को सब्सक्राइब करना भूलना मत। [संगीत] और कितनी दूर जाना है? मैं बहुत बुरी तरह से थक गई हूं। अरे बस थोड़ी सी देर और। Google लोकेशन 5 कि.मी. की ही बता रहा है। हम पिछले 5 घंटे से सफर कर रहे हैं और 1 मिनट भी तुमने कहीं गाड़ी नहीं रोकी। अब मेरी हालत बहुत खराब हो गई है। मैं तुम्हारी कंडीशन समझ सकता हूं। मगर तुम भी तो मेरी बात को समझो। कहते हुए वह अपनी पत्नी की ओर देखकर मुस्कुरा दिया जो सात मंद प्रेग्नेंट थी और फिर मोबाइल में Google मैप की मदद से अपनी मंजिल की ओर आगे बढ़ गया। कुछ ही देर में वह एक बिल्डिंग के सामने खड़ा था। वो पीले रंग की एक सामान्य से दिखने वाली इमारत थी। जो कंपनी के द्वारा बनाई गई थी। जिसमें उनके कर्मचारी रहते थे। गाड़ी की आवाज सुनकर एक गार्ड तुरंत कार के पास आकर खड़ा हो गया। सलाम साहब जी। सलाम मैं रौनक रौनक मल्होत्रा सिविल इंजीनियर हूं। मुझे यहां पर कंपनी की तरफ से रहने के लिए एक फ्लैट अलॉट हुआ। हां जी साहब मैनेजर साहब ने बताया था आपके लिए फ्लैट नंबर 18 साफ करवा दिया है। आप चलिए हम सामान लेकर आते हैं। कहते हुए गार्ड जैसे ही कार के पास आया। जूही कार से उतरी। गार्ड की नजर उसके पेट पर पड़ी तो वो दो कदम पीछे हट गया। क्या हुआ? कुछ नहीं साहब। आप ऐसा कीजिए मैडम जी को लेकर किसी होटल में चले जाइए। यहां से 2 कि.मी. दूर एक बहुत अच्छी होटल है। आप एक-द दिन वहां रुकिए तब तक हम आपके लिए एक घर का इंतजाम कर देंगे। ये क्या बोल रहे हो? अभी तो तुम बोल रहे थे कि फ्लैट नंबर 18 हमारे लिए तैयार है। और अब तुम ही बोल रहे हो तुम हमारे लिए घर का इंतजाम करोगे? क्या हुआ? कोई परेशानी है क्या? मैं बहुत थक चुकी हूं। मुझे जल्दी से घर के अंदर जाना है। नहीं, कोई दिक्कत नहीं है। तुम मेरे साथ आओ। कहते हुए उसने गार्ड को सामान लेकर आने के लिए इशारा किया और खुद जूही को लेकर लिफ्ट में चला गया। गार्ड उन्हें जाते हुए देख रहा था। तभी उसकी निगाह तीसरे माले के फ्लैट नंबर 18 पर पड़ी। वहां की लाइट्स बंद चालू हो रही थी। फ्लैट तो अच्छी कंडीशन में है। मुझे लगा था नई जगह जाकर कैसा लगेगा। मगर यह तो हमारे पुराने वाले फ्लैट से भी अच्छा और बड़ा है। अरे अब हमारा बच्चा आने वाला है और उसके आने के पहले ही देखो मेरा भी तो प्रमोशन हुआ है। तो फ्लैट भी तो बड़ा होगा। दोनों पूरा फ्लैट घूम कर देख रहे थे। उनके पीछे-पीछे एक परछाई भी चल रही थी। जिसके हाथों में एक गुड़िया थी। वो उन्हें देखकर मुस्कुराने लगी। उसी रात के तकरीबन 1:30 बजे जूही को अपने बेड पर किसी और के होने का एहसास हुआ। कोई उसके पेट पर हाथ घुमा रहा था। रौनक ये क्या कर रहे हो? प्लीज मुझे सोने दो ना। कहते हुए उसने उस हाथ को हटाया। तो हाथ बहुत ही खुरदुरा और गर्म था। जूही का हाथ गर्मी से जल गया। वो चीख पड़ी। जूही क्या हुआ? यहां कोई है। अभी उसका हाथ मेरे पेट पर था। यहां तो कोई नहीं है। तुम्हें कोई भ्रम हुआ होगा। शायद सफर की थकान होगी। कितनी भी थकान हो ऐसा भ्रम नहीं हो सकता। यह देखो मेरा हाथ भी जल गया। कहते हुए उसने रौनक को अपना हाथ दिखाया। मगर हाथ नॉर्मल ही था। कोई जलने का निशान नहीं था। देखो मैं कह रहा था ना कि कोई भ्रम हुआ होगा। नई जगह है शायद इसलिए तुम्हें नींद नहीं आई। आओ मेरे पास आओ। मैं तुम्हें सुला देता हूं। कहते हुए रौनक ने जूही को सुला दिया। दूर खड़ा साया अपनी गुड़िया को गोद में लेकर लाड कर रहा था। अगले दिन सुबह रौनक ऑफिस जाने के लिए तैयार हो रहा था। मगर जू ही उदास थी। वो कल रात की ही बातें सोच रही थी। क्या हुआ? क्या सोच रही हो? वो कल रात मेरा यकीन करो कोई तो था। फिर वही सब बेकार की बातें। अरे कहां ना? तुमने कोई ख्वाब देखा होगा। उसकी बात सुनकर जूही मुस्कुरा दी। मगर उसे यकीन था कि वो जो कुछ भी था उसका ख्वाब तो बिल्कुल नहीं था। रौनक के जाने के बाद वह घर की बालकनी में बैठकर चाय पी रही थी। तभी दरवाजे की घंटी बजी। उसने गेट खोला तो सामने काम वाली बाई खड़ी थी। तुम कौन हो? मुझे गार्ड ने भेजा है। वो बोल रहा था आपको घरगुती काम के लिए बाइक चाहिए। हां, बाइक तो चाहिए मगर 24 घंटे के लिए। मेरी हालत तो तुम देख ही रही हो। ऐसे में मुझे पूरा दिन देखभाल की जरूरत है। मेम साहब क्या है ना हम पूरे दिन इस घर में नहीं रह पाएंगे और हम तो यही कहेंगे कि आप भी कहीं और रहने लग जाओ। वही आपके लिए सही है इस घर में। वो और कुछ बोल पाती। इससे पहले ही किचन में बर्तन गिरने की आवाज आने लगी। वो भाग कर वहां गई। तो एक काली बिल्ली थी जो अपनी लालाल आंखों से उन्हें घूर रही थी। उस बिल्ली को देख वो बाई वहां से भाग गई। मगर जैसे ही वह लिफ्ट में दाखिल हुई, वो काली बिल्ली भी वहां मौजूद थी। अगो बाई यह बिल्ली यहां कैसे? वो बाई कुछ कर पाती। उसके पहले ही देखते ही देखते वो काली बिल्ली एक साए में बदल गई और वो जोर-जोर से रोने लगी। उसके रोने की आवाज इतनी भयानक थी कि उस भाई के कान से खून बहने लगा और देखते ही देखते उसके कान के साथ-साथ नाक और मुंह से भी खून निकलने लगा। किसी को समझ नहीं आया कि उसकी मौत कैसे हुई। शाम को रौनक जब घर लौट कर आया तो उसने देखा कि जूही उस भाई को लेकर परेशान थी क्योंकि वो जूही से ही मिलकर गई थी और उसके साथ यह हादसा हो गया था। देखो मैं तुम्हारी हालत समझ सकता हूं। मगर प्लीज तुम उदास मत रहो। यह हमारे बच्चे के लिए अच्छा नहीं है। जब से यहां आए हैं ना कोई ना कोई परेशानी सामने आ ही रही है। कुछ तो अलग है जो नजर नहीं आ पा रहा। तुम इस बारे में ज्यादा मत सोचो। यह बताओ तुमने कुछ खाया? रौनक की बात सुन जूही ने ना में सिर हिला दिया। तो रौनक ने तुरंत एक फूड ऐप से खाना आर्डर किया और दोनों खाना खाकर कमरे की बालकनी में बैठे थे। चंदा है तू मेरा सूरज है तू। ओ मेरी आंखों का तारा है तू। जीती हूं बस। मैं तुझे देखकर इस टूटे दिल का सहारा है तू। चंदा है तू मेरा सूरज है तू। जू ही वो आवाज सुनी इधर-उधर देखने लगी। मगर उसे कोई नजर नहीं आ रहा था। तभी उसकी कोख में पल रहा बच्चा भी जोर से किकिंग कर रहा था। एक और आवाज। दूसरी ओर बच्चे की फास्ट मूवमेंट के कारण। जूही अपनी जगह से खड़ी हो गई। कौन है? कौन है? सामने आओ। क्या हुआ? किसे आवाज दे रही हो? अभी कोई यहां पर लोरी गा रहा था। उसे सुनकर हमारा बच्चा भी तेजी से किकिंग कर रहा था। देखो कहते हुए उसने रौनक का हाथ पकड़ कर अपने पेट पर रख दिया। मगर बच्चा कोई भी मूवमेंट नहीं कर रहा था। क्या यार तुम भी रात का समय है। हमारा बच्चा भी सो रहा है। चलो तुम भी सो जाओ। वैसे आजकल कौन सी वेब सीरीज देख रही हो जो ये सारी बातें तुम्हारे दिमाग में आ गई? रौनक क्या सच में तुम्हें मेरी बात पर यकीन नहीं है? मैं सच बोल रही हूं। मैंने उसका होना महसूस किया है। रौनक हैरान होकर उसकी ओर देखने लगा। फिर उसे धीरे से अपने गले लगाया और बोला इस घर में तुम्हारे और मेरे अलावा कोई नहीं है। तो तुम्हें किसकी आवाज आई? और वो लोरी यदि कोई गा रहा होता तो मुझे भी तो सुनाई देती। कहते हुए वह जूही को बेडरूम में ले जाने लगा। तो बेड पर एक साया गुड़िया को सुला रहा था। उसे देख रौनक भी डर गया था। वो दो कदम पीछे हटा तो वो साया उसे देखकर मुस्कुराने लगा। चंदा है तू मेरा सूरज है तू। ओ मेरी आंखों का तारा है तू। यह बच्चा मेरा है। इसे मुझे दे दो। इसे मैं लेकर आऊंगी। कहते हुए उसने अपना हाथ लंबा कर जैसे ही जूही के पेट पर रखा जूही को तेज दर्द हो गया। रौनक रौनक बचाओ बहुत दर्द हो रहा है। रौनक, रौनक हेल्प मी। पहले तो रौनक को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था कि वो क्या करें। फिर जूही की चीख सुनकर उसने कमरे का दरवाजा खोला। और तुरंत बाहर निकलने की कोशिश की। मगर दरवाजा दोबारा बंद हो गया और उन्हें एक तेज झटका लगा जिसके कारण वे दोनों पीछे गिर गए। वे लोग दोबारा उठ पाते। उसके पहले ये काली बिल्ली वहां और वो रौनक के चेहरे को नोचने लगे। उसके चेहरे से खून बहने लगा। उसने अपनी पूरी ताकत से बिल्ली को दूर हटाया और जोर से चीखा। कौन हो तुम? हमने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है? क्यों हमें परेशान कर रही हो? रौनक के चीखते ही वो साया हवा में उड़ने लगा। उसके हाथों में एक मरा हुआ बच्चा भी था। जिसे देख जूही जोर से चिल्लाई और बेहोश हो गई। उसका मिसकैरज हो गया। रौनक जूही को संभाल पाता। उसके पहले ही उसने देखा कि उस साए की गोदी में अब गुड़िया की बजाय एक बच्चा था। अगले दिन हॉस्पिटल में जब गार्ड और सोसाइटी के दूसरे लोग उन लोगों को मिलने आए तो गार्ड बहुत उदास था। मुझे माफ कर दो साहब। सब मेरी ही गलती है। जब मैं देख लिया था कि मेम साहब मां बनने वाली है तो भी मैंने आपको उस फ्लैट में जाने दिया। मुझे रोक लेना चाहिए था आपको। मुझे माफ कर दो। आखिर उस घर में जो हमारे सामने आया वो सब क्या था? हमें कुछ भी समझ नहीं आया। वो औरत और वो बच्चा कौन है? कुछ समय पहले वहां पर एक साहब रहते थे। उनकी पत्नी मां नहीं बन सकती थी। उनकी मानसिक स्थिति थोड़ी खराब हो गई थी। वो एक गुड़िया को अपना बच्चा समझ कर पाल रही थी। मेरा चंदा है तू मेरा सूरज है तू। ओ मेरी आंखों का तारा है तू। फिर डॉक्टर के कहने पर बच्चा पाने के लिए उन लोगों ने सरोगेट मदर का सहारा लिया। मगर वो सेरोगेट मदर ने उन सबको ही अपने काबू में कर लिया। देखो यदि तुम्हें अपना बच्चा चाहिए तो मुझसे शादी करनी होगी वरना मैं इस बच्चे को लेकर चली जाऊंगी। इस बच्चे के लिए तो मैं कुछ भी करने को तैयार हूं। खत्म कर दो अपनी पत्नी को और मुझे उसकी जगह दे दो। बच्चे के लालच में उसे सही गलत का कोई होश नहीं रहा। और उसने गुड़िया के साथ ही अपनी पत्नी को घर में जिंदा जला दिया। लोगों को लगा शॉर्ट सर्किट हुआ। मगर तब से उस औरत की आत्मा उस घर में रहती है। मैम साहब को देखकर शायद उसे उस सरोगेट मदर की याद आ गई होगी जिसने उसे धोखा दिया। उसने अपना बदला मेम साहब से लिया। अपने बच्चे को खोने के बाद जूही की दिमाग की स्थिति ठीक नहीं थी। इसलिए रौनक उसे उस शहर से दूर लेकर आ गया। मगर आज भी फ्लैट नंबर 18 में देर रात लोरी की आवाज सुनाई देती है। कहीं आप भी तो फ्लैट नंबर 18 में नहीं रह रहे हैं। यह कहानी आपको अच्छी लगी हो तो हमें सब्सक्राइब करें। हमारा Instagram और Facebook पेज जरूर फॉलो करें। और हां दोस्तों, सब्सक्राइब करना भूलना मत।
14) https://youtu.be/g8QVeCPUc9k?si=qAsOPj1dzu59rPdP
[हंसी] यह कहानी है अरुण वर्मा की। एक 32 वर्षीय ग्राफिक डिजाइनर, शांत स्वभाव, मेहनती और पढ़ाकू। अरुण अपने माता-पिता सावित्री और अरविंद के साथ लखनऊ में रहता था। उसने कभी कोई अंधविश्वास में विश्वास नहीं किया। लेकिन नींद को लेकर वो हमेशा थोड़ा डरा रहता था। क्योंकि बचपन से ही उसे भयानक सपने आते थे। लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ी यह सपने कुछ और बन गए। अरुण को डायरी लिखने की आदत थी और हमें यह कहानी उसकी डायरी से मिली है। यह कहानी स्लीप पैरालिसिस एक अनुभव की है जो अरुण के साथ हुआ था। जनवरी की एक ठंडी रात थी। अरुण ऑफिस का प्रोजेक्ट पूरा करके रात 2:30 बजे बिस्तर पर लेटा। दिन भर थकान थी। इसलिए तुरंत नींद आ गई। लेकिन रात के 3:10 में उसकी आंख खुली। कमरे का पंखा घूम रहा था। खिड़की से बाहर की लाइट अंदर आ रही थी। सब सामान्य लग रहा था सिवाय इसके कि उसका शरीर हिल नहीं रहा था। वो चीखना चाहता था। लेकिन आवाज नहीं निकली। आंखों के सामने कमरे के कोने में एक काली आकृति खड़ी थी धुंधली लेकिन बहुत बड़ी जैसे हवा में नहीं बल्कि अंधेरे में बनी हो। वो बहुत देर तक कोशिश करता रहा और कुछ मिनट्स बाद उसकी नींद टूटी तो कमरे में अंधेरा था। उसने लाइट्स ऑन करके चारों तरफ देखा। पर वहां कोई नहीं था। उसे लगा यह कोई बुरा सपना था। उसने सोचा शायद यह मेरी थकान की वजह से ऐसा हुआ और वो फिर सो गया। अगली सुबह उसने इसके बारे में Google किया तो उसे स्लिप पैरालाइसिस के बारे में पता चला। उसने इसके बारे में कुछ कहानियां पढ़ी और राहत की सांस ली कि यह तो आम चीज है। अपने डर को शांत करने के लिए उसने अपने दोस्त के पहचान के साइकेट्रिस्ट से बात की। तभी डॉक्टर ने उसे स्लीप पैरालाइसिस के बारे में समझाया। देखिए स्लीप पैरालाइजिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति जागता तो है लेकिन हिलने डुलने या बोलने में असमर्थ होता है। यह आमतौर पर नींद और जागने के बीच ट्रांजिशन के दौरान होता है। या तो जब आप सो रहे होते हैं या जागते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शरीर में आरएम रेपिड आई मूवमेंट नींद की स्थिति में रहता है। जहां मांसपेशियां सामान्य रूप में रिलैक्स्ड होती हैं। जबकि हमारा दिमाग जागता रहता है। स्लीप पैरालाइसिस का अनुभव करने वाले मेरे कुछ पेशेंट्स मतिभ्रम यानी हेलुसिनेशंस के बारे में बताते हैं। जैसे कि कमरे में किसी की मौजूदगी देखना या छाती पर दबाव महसूस करना यह तनाव, इर्रेगुलर स्लीपिंग पैटर्न या कुछ दूसरे स्लीप डिसऑर्डर की वजह से हो सकता है। शाम को घर आकर अरुण ने अपनी मां सावित्री से रात के अनुभव का जिक्र किया। सावित्री को अरुण के बचपन की एक बात याद थी। जब वह सिर्फ 10 साल का था तब उसने बताया था कि हर रात एक औरत की परछाई उसे घूरती है। कभी उसके बिस्तर के पास तो कभी अलमारी के पीछे। सावित्री ने तब एक झाड़फूंक करवाई थी और सब ठीक हो गया था। लेकिन शायद वो साया कभी गया ही नहीं। बस छिप गया और अब लौट आया था। लेकिन सावित्री ने अरुण से यह बात छिपाई यह सोचकर कि कहीं अरुण डर ना जाए या उसके काम पर इसका कोई असर ना हो। लेकिन धीरे-धीरे अरुण के लिए हर रात एक डरावनी परीक्षा बन चुकी थी। उसे लगने लगा कि जब भी वह सोता है, उसकी आत्मा किसी और दुनिया में खींची जाती है। हर स्लीप पैरालिसिस की अवस्था में वो अपने कमरे को वैसे ही देखता। पंखा घूम रहा होता। दरवाजा आधा खुला होता। बाहर की रोशनी खिड़की से आ रही होती। लेकिन उसका शरीर पूरी तरह फ्रीज होता। वो कोशिश करता था हिलने की, चिल्लाने की। लेकिन उसका गला जैसे किसी ने दबा दिया हो। एक बार उसे ऐसा दिखा कि उसके माता-पिता कमरे में खड़े हैं। उसे सोता देख रहे हैं। लेकिन किसी को उसकी तड़प नहीं दिख रही थी। वो सब कुछ देख सकता था। पर कुछ कर नहीं सकता था। जैसे जागती आंखों से एक बुरा सपना देख रहा हो और खुद को बचाने के लिए बस देखता रह जाए। हर बार उसे लगता अगर अब नहीं उठा तो शायद हमेशा के लिए उठ ना पाऊं। अरुण को स्लीप पैरालिसिस हर रात नहीं बल्कि कुछ दिनों के अंतराल में होता था। लेकिन हर बार और भी ज्यादा डरावना कभी तीन दिन कभी हफ्ता। लेकिन जब भी होता उसका प्रभाव पिछले अनुभव से कहीं ज्यादा गहरा और भयानक होता। उसने डायरी में लिखा अब वो सिर्फ दूर खड़ी नहीं रहती। अब वो मेरे पास आकर मुझे देखती है। मेरी सांसों के पास वो परछाई अब एक रूप लेने लगी थी। एक महिला जिसकी आंखें नहीं थी। पर चेहरा अजीब सा जाना पहचाना लगता था। जैसे वो किसी पुराने जन्म से जुड़ी हो। पर जो सबसे डरावनी बात थी वो यह कि अरुण को अब सिर्फ अपने कमरे में ही नहीं बल्कि अलग-अलग जगहों पर भी वही अनुभव होने लगे। अगर वह किसी रिश्तेदार के यहां सोता तो उसे लगता कि वहीं परछाई अब उस नए कमरे में भी मौजूद है। एक बार वह एक कंपनी ट्रिप पर हिल स्टेशन गया और रात को उसे लगा कि वह फिर उसी पुराने कमरे में फंसा है जहां से वह बाहर निकलने की कोशिश कर रहा है। लेकिन हर खिड़की के बाहर सिर्फ अंधकार है। हर बार उसे लगने लगता कि यह जगह बदली नहीं है। बस उसका भ्रम है और परछाई। वो तो हर जगह उसी वक्त आ जाती थी जैसे उसके भीतर घुस चुकी हो। एक दिन उसने सपना देखा कि वो किसी सुनसान रेल पटरी के किनारे पड़ा है और कोई औरत धीरे-धीरे उसकी ओर बढ़ रही है। उसके चेहरे पर खून की लकीरें हैं और वो बड़बड़ा रही है। तू मुझे फिर अकेला छोड़कर कहां भागेगा? तभी अरुण की नींद खुली और अरुण को ऐसा लगा जैसे नेहा वापस आ गई है। अरुण अब हर रात सोने से डरने लगा था क्योंकि उसे नहीं पता होता था कि किस जगह में जागेगा और आज क्या नया खौफनाक देखेगा अरुण के जिंदगी के बारे में। अरुण की जिंदगी बाहर से भले ही सीधी साधी दिखती थी लेकिन उसके अंदर कई दबी हुई परतें थी। वह लखनऊ के एक मिडिल क्लास परिवार में पला बड़ा था। उसके पिता अरविंद सरकारी कर्मचारी थे और मां सावित्री हाउसवाइफ। घर में स्ट्रिक्टनेस थी। लेकिन प्यार भी कम नहीं था। अरुण बचपन से ही सीरियस नेचर का था। उसे खेल कूद से ज्यादा किताबें पसंद थी। उसका एक सबसे अच्छा दोस्त था रोहित जो बचपन से ही उसके साथ था। लेकिन स्कूल के बाद रोहित का पूरा परिवार दूसरे शहर चला गया और अरुण भी अकेला हो गया। स्कूल में अक्सर अरुण का मजाक बनाया जाता था। इन सब बातों की वजह से अरुण रात में ठीक से सो नहीं पाता और कभी-कभी आधी रात में डर से जाग जाता। सावित्री ने एक बार उसे नींद में बड़बड़ाते और रोते हुए सुना था। लेकिन तब किसी डॉक्टर को नहीं दिखाया गया। बस एक ताबीज पहना दिया गया था जो अब तक उसकी अलमारी में पड़ा था। कॉलेज में पहली बार उसने खुलकर सांस ली थी। वहां उसकी मुलाकात नेहा से हुई। नेहा का स्वभाव बिल्कुल विपरीत था। खुला बाततूनी और थोड़ी जिद्दी भी। लेकिन शायद यही वजह थी कि दोनों एक दूसरे की ओर खींचे गए और उनको पहली बार लगा कि जिंदगी सिर्फ काम और किताबों तक सीमित नहीं है। नेहा ने उसमें वो रंग भरे थे जो उसने कभी महसूस नहीं किए थे। लेकिन धीरे-धीरे अरुण के करियर का दबाव और नेहा के इमोशनल नेचर के कारण उनके बीच दूरियां बढ़ने लगी। धीरे-धीरे अरुण ने नेहा से मिलना कम कर दिया। उसकी बस फोन पर बात होती। आखिरी बार वो एक दोस्त के बर्थडे पर मिले थे। तब नेहा ने अरुण से पूछा अरुण तुम मुझे कभी छोड़ तो नहीं दोगे ना? अरुण ने कुछ जवाब ना देकर हंसकर यह बात टाल दी। धीरे-धीरे कुछ दिन बाद अरुण ने नेहा से बात करना बंद कर दिया। बिना वजह कहे वो उसके जीवन से निकल गया। नेहा ने उससे मिलने की कोशिश की पर अरुण हमेशा किसी ना किसी बहाने से उससे मिलना टाल देता। इसके वजह से नेहा टूट गई और कुछ ही महीनों में खबर आई कि उसने आत्महत्या कर ली। अरुण ने तब खुद को दोष नहीं दिया। उसने इसे कमजोरी मानकर भुला दिया। लेकिन अब जब वो परछाई उसकी छाती पर बैठती थी। जब वो चेहरा सामने आता था तो उसका दिल कहता था यह वही है नेहा। उसका अतीत अब उसका पीछा कर रहा था। वही दर्द, वही गलती। अब हर रात उसका हिसाब मांग रही थी। अब अरुण के अनुभव और भी गहरे और ज्यादा डरावने होते जा रहे थे। पहले जहां कुछ दिनों के अंतराल में होते थे, अब यह लगभग हर रात उसका पीछा करने लगे थे। कभी उसकी नींद में दम घुटता। कभी उसे लगता कि कोई उसकी आत्मा को बाहर खींचने की कोशिश कर रहा है। उसे लगता जैसे कोई उसके शरीर को भीतर से तोड़ रहा हो। वो अब नॉर्मल जिंदगी नहीं जी पा रहा था। ऑफिस का काम तो दूर। उसे अब खाना खाना बात करना सब कुछ भारी लगने लगा था। उसकी आंखों के नीचे गहरे काले घेरे और व्यवहार में चिड़चिड़ापन आ गया था। अरविंद और सावित्री उसके इस बदलाव से चिंतित हो उठे। उन्होंने उसे कई डॉक्टर्स, न्यूरोलॉजिस्ट और साइकोलॉजिस्ट को दिखाया। हर रिपोर्ट नॉर्मल आए। फिर उन्होंने तांत्रिकों बाबा मंदिरों हर जगह कोशिश की। कई उपाय किए गए। पूजा, हवन, झाड़, भूक पर अरुण की हालत में कोई फर्क नहीं पड़ा। वो गुमसुम रहने लगा। उसे अब हर परछाई में डर दिखने लगा था। कभी बाथरूम के मिरर में, कभी बालकनी के कोने में। उसे लगता है जैसे नेहा की आत्मा हर वक्त उसके आसपास मंडरा रही हो। कई बार उसने खुद से लड़ने की कोशिश की। खुद को नींद से जगाए रखने की ट्रेनिंग देने की कोशिश की। लेकिन हर बार वो हार गया। और अंत में उसके घर वालों ने भी हार मान ली। उनके लिए अब अरुण की रातें एक ऐसी सजा बन गई थी जिसे कोई रोक नहीं सकता था। अरुण की हालत अब इतनी बिगड़ चुकी थी कि उसके घर वालों ने सारी कोशिशें करने के बाद बस यही प्रार्थना शुरू कर दी थी कि जैसे भी हो उसे इस डर और तकलीफ से मुक्ति मिल जाए। अरुण को अब धीरे-धीरे यह एहसास होने लगा था कि जो परछाई हर रात उसके पास आती है वो कोई और नहीं नेहा है। हर बार जब वो परछाई बनकर आती थी उसे कॉलेज के दिन याद आ जाते थे। वो जगह वो बातें वो अधूरी इमोशंस। लेकिन यह राज सिर्फ अरुण के भीतर था। किसी और को उसका दर्द, उसकी सच्चाई समझ नहीं आई। धीरे-धीरे उसका मानसिक संतुलन भी बिगड़ने लगा। वो अपनी ही दुनिया में रहने लगा। बड़बड़ाता, दीवारों से बातें करता, आईने से डरता और हर परछाई देखकर वो सहम जाता। कभी-कभी वो रात को अचानक ही चीख कर उठता और कहता मैंने कहा था छोड़ दो मुझे। मैंने माफी मांग ली ना। घरवाले अब कुछ नहीं समझ पा रहे थे। अरुण अब वो इंसान नहीं रहा था जो कुछ महीने पहले था। उसका चेहरा उतर गया था। शरीर कमजोर और आंखें खोई हुई सी लगती थी। जैसे कि वो किसी के आने का और साथ ले जाने का इंतजार कर रहा हो। अरुण ने अब बिस्तर से उठना और खाना पीना बंद कर दिया। लेकिन सोचसच कर उसका शरीर थकता जाता था। उसी दौरान अरुण के कुछ कॉलेज के पुराने दोस्त और ऑफिस के कलीग्स जिन्हें उसकी हालत का पता चला उससे मिलने आए। जब उन्होंने अरुण की हालत और उसके माता-पिता की बेबसी देखी तो उनके भी दिल बैठ गए। तीन दिन बाद एक रात अरुण ने अचानक कमरे की सारी लाइट्स बंद कर दी और खुद को कमरे में बंद कर लिया। रात को एक अजीब सी तेज बदबू फैलने लगी। जैसे कुछ जल रहा हो। खिड़की से अंदर देखा गया तो अरुण बिस्तर पर लेटा था। लेकिन उसका शरीर एक तरफ मुड़ा हुआ था। जैसे किसी ने उसे पकड़ कर झटका दिया हो। सुबह अरविंद कमरे का दरवाजा तोड़कर अंदर आए तो अरुण मरा हुआ मिला। उसका चेहरा काला पड़ चुका था। उसकी आंखें खुली हुई थी। और पास पड़ी डायरी की आखिरी लाइन थी। मैं जानता हूं अब यह बीमारी नहीं थी यह वापसी थी अरुण की कहानी हमें बताती है कि कभी-कभी हम जिन बातों को सपने भ्रम या मानसिक कमजोरी समझते हैं वो दरअसल हमारे किए गए कर्मों की परछाइयां होती है कभी-कभी स्लीप पैरालाइसिस महज एक मेडिकल अवस्था नहीं होती कभी-कभी वो दरवाजा होता है उस दुनिया का जहां कोई इंतजार इंतजार कर रहा है आपके जागने और खुद को सौंपने का। यह कहानी आपको अच्छी लगी हो तो हमें सब्सक्राइब करें। हमारा Instagram और Facebook पेज जरूर फॉलो करें। और हां दोस्तों, सब्सक्राइब करना भूलना मत।
15) https://youtu.be/hOTPD_ENgFg?si=ZXyN1pVmIZ85dEuo
बिहार के सुधीर इलाके में बसा वो गांव आज गांव नहीं लग रहा था। कभी 7:00 से 8:00 बजे तक जिस गांव को अंधेरा अपनी आगोश में ले लेता था। आज वो गांव 10:00 बजे रात तक रोशनी से जगमगा रहा था। गांव में इतनी रात तक उजाला यानी जरूर किसी के घर में कोई फंक्शन है और उसने जनरेटर मंगवाया है क्योंकि गांव में बिजली का पोल तो है लेकिन उसमें बिजली अपने हिसाब से आती है यानी अपनी मर्जी से। लल्लन जी के घर से जनरेटर की आवाज लगातार आ रही थी। उनके बेटे आलोक की शादी हुई है। आज सुबह ही वह नई नवेली दुल्हन पूर्णिमा को लेकर आया है। कितना रो रहे थे पूर्णिमा के माता-पिता। जब वो उसे विदा कर रहे थे। इतना आसान तो नहीं होता किसी मां-बाप के लिए अपने कलेजे के टुकड़े को वर्षों पालना पोसना और फिर उसे अपने घर से विदा करना। लेकिन यही तो रीत है। पूर्णिमा जब विदा हो रही थी तो मां ने ढेर सारा उसे आशीर्वाद तो दिया ही साथ ही उसे दिया खोई। एक छोटी सी पोटली जिसमें भरी थी परंपरा। जब पूर्णिमा छोटी थी और अपने ननिहाल जाया करती थी। तो वह अक्सर देखा करती थी कि उनकी नानी पूर्णिमा की मां को खोइंछा दिया करती थी। जो उसकी मां अपने आंचल में बांध लेती थी। खचाछा में होता था चावल, दूध, हल्दी, कुछ पैसे और नानी का बेहिसब प्यार। यही तो था खचाछा। एक छोटी सी गठरी जिसमें भर दिए जाते थे आशीर्वाद, परंपरा और प्यार। आज पूर्णिमा की फर्स्ट नाइट है और जैसा कि होता है पहली रात हर एक नए शादीशुदा जोड़े के लिए बेहद खास होती है। उनके लिए भी खास थी। दोनों के दोनों नर्वस थे। पूर्णिमा शादी के लाल जोड़े में इतनी खूबसूरत लग रही थी कि आलोक की निगाहें उससे हट ही नहीं रही थी। एक बात बोलें? एक बात कहे? अब तो हमसे ब्याह हो गया है तुमरा। जितना मर्जी है उतना बोलो। मां कसम आज तुम बहुत ही सुंदर लग रही हो। एकदम परी के जैसी। अच्छा परी देखे हो तुम का? अरे देखे नहीं हो तो का हुआ? सुने तो हैं। किताब में पढ़े तो हैं उसका बारे में। अच्छा का पढ़े हो? जरा हम भी तो सुने। यह कहकर पूर्णिमा ने आलोक के हाथ पर अपना हाथ रख दिया। यह पहली बार नहीं था कि पूर्णिमा ने आलोक के हाथों में अपना हाथ रख दिया था। दोनों एक दूसरे को बहुत पहले से जानते थे। हाथ पकड़ कर खूब घूमते भी थे। लेकिन आज वाला एहसास एकदम डिफरेंट था। फर्स्ट नाइट की अनगिनत बातों की अभी शुरुआत ही नहीं हुई थी कि अचानक बाहर तेज बारिश शुरू हो गई। उनका कमरा दूसरी मंजिल पर था और उसकी खिड़की खुली हुई थी। बारिश के कारण पानी की बूंदे खिड़की से अंदर आने लगी थी। जिसे देखकर पूर्णिमा बिस्तर से खिड़की बंद करने के लिए उठी। वो खिड़की बंद कर ही रही थी। तभी उसकी नजर खिड़की के बाहर गई और उसने खिड़की के बाहर जो देखा उसे देखकर उसके चेहरे का रंग पूरी तरह बदल गया। उसकी नजर एक लड़की पर गई जो हवा में उड़ रही थी। उसके बाल खुले हुए थे जो उसके चेहरे तक आ रहे थे जिससे उसका चेहरा ढक गया था। उस लड़की को देखकर पूर्णिमा की चीख निकल गई। आलोक आलोक आलोक बाहर बाहर कोई है? तभी हवा का एक तेज झोंका आया जिससे लड़की के बाल उसके चेहरे से हट गए और उसका चेहरा दिखाई देने लगा। उसकी आंखें गुस्से से भरी हुई थी और वो पूर्णिमा को घूर रही थी। लेकिन उस चेहरे को देखकर तो पूर्णिमा के दिल की धड़कन और भी ज्यादा बढ़ गई। उसका चेहरा पूरी तरीके से पसीने से भीग गया। कुछ देर पहले जिस चेहरे पर रौनक थी वो चेहरा पीला पड़ गया था। का हुआ? का हुआ पूर्णिमा तुम इस तरह चीखी काहे? कौन है बाहर? पूर्णिमा थर-थर कांप रही थी। उसने आलोक की बातों का कोई जवाब नहीं दिया। बस वो बाहर की ओर घूर-घूर कर देख रही थी। का हुआ का हुआ पूर्णिमा अरे कुछ तो बोलो ना। बाहर बाहर एक लड़की थी वो हवा में उड़ रही थी। उसका चेहरा उसका चेहरा बिल्कुल हमरे जैसा था। एकदम हमरे जैसा। जैसे जुड़वा कोई होता है ना वैसा ही। ये कहां बोल रही हो तुम? हम सच कह रहे हैं आलोक। अपने सर की कसम। बाहर एक लड़की थी। उसका चेहरा बिलकुल हमरे जैसा था और वह वो हवा में उड़ रही थी। हमको बहुत डर लग रहा है आलोक। दोनों यह बातें कर ही रहे थे। तभी अचानक लाइट चली गई। जनरेटर अजीब सी आवाज करता हुआ बंद हो गया। पूर्णिमा ने आलोक को जोर से पकड़ लिया। अभी क्या हुआ? ये लाइट कैसे चली गई? लगता है जनरेटर में कुछ खराबी आई है या डीजल खत्म हो गया है। हम देख कर आते हैं। हम भी चलेंगे तुम्हारे साथ। हम यहां अकेले नहीं रहेंगे। अरे तुम का करोगी? तुम यहीं रुको ना। नीचे पूरी फैमिली वाले हैं। अगर तुम इस समय नीचे मेरे साथ गई तो वो बातें बनाएंगे। गजब हाल है। हमारे डर से हालत खराब है और तुम हो कि सच में तुम एकदम बैल हो। सुनो हमारी बात समझो ना। अभी तुम नई दुल्हन हो ना। इस तरह नीचे आओगी तो बिना मतलब बातें बनेंगी। हम मोमबत्ती जला देते हैं और तुरंत आते हैं जनरेटर ठीक करके। आलोक ने मोमबत्ती जलाई और नीचे चला गया। पूर्णिमा बेचारी डर के मारे चुपचाप बैठी रही और मोमबत्ती को निहारती रही। आलोक नीचे जनरेटर के पास गया जो बंद पड़ गया था। आलोक के पिता समेत घर के कुछ लोग भी वहां खड़े थे। जनरेटर में डीजल शाम को ही डाला गया था। इसलिए उसके खत्म होने का सवाल ही नहीं था। इसलिए सभी जनरेटर वाले को गरिया रहे थे। हम कहे था ना तुमको कि नागेंद्रवा का जनरेटर मत लो भाड़ा पर तुमको ही खुजली मची थी। ओ बाबूजी का बाबूजी हां का बाबूजी अब रहो अंधेरा में। तुम ही बोलो अच्छा लगता है शादी के घर में इतना अंधेरा। उधर आलोक को गए अभी 10 मिनट भी नहीं हुए थे। कि तभी अचानक पूर्णिमा के सामने एक खौफनाक परछाई उभरती है। यह वही लड़की थी जिसे उसने खिड़की से देखा था। बिल्कुल उसकी ही तरह। मगर अब उसका चेहरा और भी विकराल हो गया था। उसकी आंखों से खून बह रहा था और उसके होठों से भी खून निकल रहा था। वो हवा में तैरती हुई धीरे-धीरे पूर्णिमा के सामने आ रही थी। तू हमरे जैसी दिखती है लेकिन हम तुम्हरे जैसे नहीं हैं। आलोक आलोक बचाओ आलोक आलोक बचाओ हमको। पूर्णिमा की चीख की आवाज नीचे सभी लोगों ने सुनी। अरे ये बहू काहे चिल्ला रही है? और वो तुम्हरा नाम से तुमको बुलाती है क्या? अरे मॉडर्न जमाना है फूफा जी। क्या करिएगा? वो भागता हुआ ऊपर की ओर आता है। आलोक को देखते ही पूर्णिमा उसके गले लग जाती है। कुछ ही सेकंड बाद जनरेटर के चलने की तेज आवाज उसके कानों में पड़ती है। पता नहीं जनरेटर अचानक से कैसे काम करने लगा था। कमरा फिर से पूरी तरह रोशन हो जाता है। आलोक आलोक वो फिर से वो फिर से आई थी। वो वो फिर से आई थी। कौन? अरे कौन आई थी? वही जिसे हमने खिड़की के बाहर देखा था। अरे अंधेरा में तुमको भ्रम हो गया है का रे? भला तुमरी जैसी कौन है भगवान थोड़ी ना बनाए हैं। ये कहकर आलोक ने पूर्णिमा को गले से लगा लिया। अब पूर्णिमा एक बात बोले तुम जो इस तरह हमरा नाम लेकर बुलाओगी तो लोग क्या कहेंगे? जिसका जो नाम है वही लेकर ना बुलाते हैं। इसमें हमरा का गलती? अरे गलती नहीं है रे। पर तुमको पता है ना गांव वाला लोग का दिमाग अभी वो बैकवर्ड है रे। रहने दो। हमको ढेर मत सिखाओ। तुम हमारे आलोक हो। आलोक। बोलो जरा सा चिल्ला के बोले तुम्हारा नाम। यह कहकर पूर्णिमा ने अपना बड़ा सा मुंह आलोक को चिढ़ाने के लिए खोला। उसकी इस हरकत को देखकर आलोक ने अपना हाथ उसके मुंह पर रखा। लेकिन तभी पता नहीं ऐसा क्या हुआ कि पूर्णिमा ने आलोक के हाथ को जबरदस्ती काटना शुरू कर दिया। पहले तो आलोक को लगा कि पूर्णिमा मजाक कर रही है। लेकिन जब उसके दांत उसे चूकने लगे और उसके काटने से उसके हाथ से खून निकलने लगा। तो उसने पूर्णिमा को जोर का धक्का दिया। पूर्णिमा ये क्या कर रही हो तुम? आलोक के धक्के से पूर्णिमा दूर जागी। उसका सिर दीवार से जा लगा था। सिर से खून भी निकल रहा था। लेकिन उस पर इस बात का कोई फर्क नहीं पड़ा। वो उल्टा और जोर-जोर से हंसने लगे खिलखिलाकर। कुछ देर बाद तो उसकी हंसी और भी ज्यादा भयानक हंसी में बदल गई। उसकी हंसी का आवाज सुनकर नीचे से आलोक का पूरा परिवार, उसके रिश्तेदार सभी भागते हुए वहां आए। उन सभी लोगों ने पूर्णिमा की ऐसी हालत देखी तो वे सब डर गए। किसी को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर एकाएक पूर्णिमा को क्या हो गया है। आलोक और पूर्णिमा की वो पहली रात बहुत लंबी रात थी। पूर्णिमा हंसते-हंसते बेहोश हो गई। अगली सुबह बहुत सारे सवालों को लेकर आई थी। लेकिन उन सवालों का जवाब किसी के पास नहीं था। पूर्णिमा अपने कमरे में थी। उसे कल की कोई भी बात याद नहीं थी। आलोक के सामने तो नहीं लेकिन पीठ पीछे उसके रिश्तेदार पूर्णिमा के बारे में कुछ-कुछ बातें करने लगे। कुछ तो उसकी मानसिक हालत पर भी सवाल उठाने लगे। हमको तो कुछ बुझा नहीं रही है बुआ। पूर्णिमा के बारे में सब पहले से पता तो किया था ना तुम लोगों ने? का पता करना है? हमारी बहू को कुछ नहीं हुआ है। तुम लोग अपना ढेर दिमाग मत लगाओ। उसी दोपहर की बात है। बहुत ही खामोश थी वो दोपहर। पूर्णिमा अभी भी अपने कमरे में थी। आलोक की मां ने अपनी बेटी संध्या को कहा, सुनो ना पूर्णिमा की तबीयत ठीक नहीं है। तुम एक काम करो खाना उसी के कमरे में ले जाओ। आलोक की बहन खाना लेकर पूर्णिमा के कमरे की ओर बढ़ चली। लेकिन जैसे ही वो उसके कमरे में गई वहां का नजारा देखकर वो काफी डर गई। उसने देखा कि पूर्णिमा ने अपने आधे बाल कैंची से काट लिए हैं और वो बालों का गुच्छा अपने मुंह में लेकर उसे चबा रही है। आलोक की बहन ने जब यह सब देखा तो उसके मुंह से चीख निकल गई। उसी रात की बात है। पूरा परिवार डरा हुआ था। सभी लोगों को लग रहा था हमको पूरा यकीन है कोई जादू टोना किया है हमारी बहू पे। का मां ये सब तुम का कह रही हो। जो कह रहे हैं वो सुनो। तुम लोग जो इसे डॉक्टर के पास ले जाने की सोच रहे हो उससे कुछ नहीं होगा। इसे किसी तांत्रिक या ओझा के पास ले जाना होगा। लेकिन आलोक जिद पर अड़ा रहा। अगले दिन पूर्णिमा को शहर के अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टर ने जांच पड़ताल की। लेकिन उन्हें कोई भी प्रॉब्लम नजर नहीं आई। पूर्णिमा वापस अपने ससुराल लौट आई। दो दिन तक सब कुछ सामान्य रहा लेकिन दो दिन के बाद की बात है। दोपहर में सभी लोग खाना खाने बैठे थे। आलोक की मां ने आलोक को कहा कि वो बहू को नीचे बुला ले आए। आलोक पूर्णिमा को बुलाने उसके कमरे में गया लेकिन वो तो अपने कमरे में थी ही नहीं। आलोक ने पूरा घर छान मारा लेकिन वो नहीं मिली। अम्मा बाबूजी पूर्णिमा अपने कमरे में नहीं है। कमरे में नहीं है का मतलब कहां गई वो? अरे बाथरूम गई होगी। अम्मा हम सब जगह ढूंढ लिए उसको लेकिन वो नहीं मिली। आलोक यह बात अपनी मां से कह ही रहा था। तभी आलोक की बहन संध्या की चीख उन्हें सुनाई पड़ी। सभी लोग घबरा गए। संध्या की आवाज घर के पीछे बने कुएं के पास से आ रही थी। भैया आलोक भैया जल्दी आओ जल्दी यहां आओ भाभी को देखो ये कैसी हरकत कर रही है पूर्णिमा घर के पीछे बने कुएं में उल्टी लटकी हुई थी कुएं के अंदर उसकी परछाई दिख रही थी जो बहुत ही भयानक लग रही थी और वो अपनी परछाई से ही हंसहंस कर बातें कर रही थी आलोक और उसके परिवार वाले जैसे ही वहां आए और उन्होंने पूर्णिमा को पुकारा पूर्णिमा ने गुस्से से ऊपर की ओर देखा उसने कुएं के ऊपर जो अपनी पैर फंसा रखे थे उसे ढीला छोड़ा और कुएं में छलांग लगा दी। आलोक ने भी एक पल की देरी नहीं की और वो भी कुएं में कूद पड़ा। पूर्णिमा बिस्तर पर पड़ी थी। आलोक उसे लगातार घरे जा रहा था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि आखिर उसकी पूर्णिमा को किसकी नजर लग गई थी। वो बार-बार भगवान की मूर्ति के पास जाता और हाथ जोड़कर उनसे प्रार्थना करता कि पूर्णिमा ठीक हो जाए। उसके बाद दो दिन तक पूर्णिमा बिल्कुल नॉर्मल रही। ऐसा लगा कि सब कुछ ठीक हो गया हो। पूर्णिमा को किसी ने कुएं वाली बात याद नहीं दिलाई। आलोक भी अब खुश था। लेकिन उसी रात तुम ठीक हो ना पूर्णिमा? खुश हो ना? यह कैसा सवाल है आलोक? तुम हमरे पास बैठे हो। तुम्हरा हाथ हमारे हाथ में है तो हम ठीक नहीं रहेंगे। ऐसा फालतू सवाल हमसे मत पूछा करो। बाप रे इतना गुस्सा अच्छा पूर्णिमा तुमको याद है अपना पहला मुलाकात? नहीं हमको कुछो याद नहीं है। अरे बाबा माफ कर दो हमको। अब हम तुमसे वैसा सवाल नहीं पूछेंगे। माफी ऐसे मांगते हैं। तुम भी ना एकदम बैल हो बैल। अरे ब्याह हो गया है अपना। थोड़ा चुम्मा वुम्मा लो। गले वाले लगा हो तब ना हम माफ करेंगे। पूर्णिमा की बातों को सुनकर आलोक के चेहरे पर हंसी आ गई और वो पुराने दिनों की याद में खो गया। आलोक अपनी नई Hero Honda मोटरसाइकिल से गांव से शहर की ओर जा रहा था। शहर के कॉलेज में उसका एडमिशन हो गया था। उसकी बाइक अब गांव को शहर से जोड़ने वाली सड़क पर आ चुकी थी। जैसे ही वह सड़क पर पहुंचा। उसने देखा कि गांव की अस्थाई से बस स्टैंड पर एक खटारा बस खड़ी है। लाल रंग की बस। गांव के लोग अक्सर उसी बस से शहर जाते थे क्योंकि वही एक बस थी जो उसके गांव से होकर गुजरती थी। तभी उसने देखा कि एक बहुत ही सुंदर लड़की अपने पिताजी के साथ भागी-भागी बस की ओर आ रही थी। क्या नए नक्शे थे उसके? आलोक पहली बार में ही उस लड़की पर फिदा हो गया था। वो उस लड़की को घूर ही रहा था कि वो अपने पिता के साथ बस में सवार हो गई। बस तुरंत ही वहां से जल्दी। यह आलोक और पूर्णिमा की पहली मुलाकात थी। पूर्णिमा ने तो आलोक को नहीं देखा था लेकिन आलोक की आंखों में उसकी तस्वीर बस गई थी। तीन दिन आलोक उसी लड़की के ख्वाब में खोया रहा। वो किसी भी तरह उससे मिलना चाहता था। चौथे दिन जब वो अपने कॉलेज की पहली क्लास में पहुंचा तो उसने देखा वही लड़की वही शांत चेहरा वही आंखें। वो क्लासरूम की दूसरी कतार में बैठी थी। आलोक की सांस जैसे थम सी गई। वो लड़की जिसे उसने बस के दरवाजे पर देखा था। अब उसकी जिंदगी के दरवाजे पर खड़ी थी। उसका नाम था पूर्णिमा। दिल की धड़कनों ने तो जैसे तालियां बजानी शुरू कर दी थी। पहले दिन की हाजिरी में जब उसका नाम पुकारा गया पूर्णिमा मिश्रा। अब दोनों एक ही क्लास में थे। वे एक ही नोट शेयर करने लगे। ब्रेक में साथ बैठने लगे और लंबी बातचीत भी करने लगे। धीरे-धीरे उनकी दोस्ती गाढ़ी होती गई। पर आलोक के लिए यह सिर्फ दोस्ती नहीं थी। यह उसका सपना था। जो अब उसकी बेंच के ठीक बगल में बैठा था। आलोक पूर्णिमा के प्यार में पूरी तरह डूब गया था। लेकिन उसे इस बात का डर था कि अगर उसने अपने प्यार का इज़हार कर दिया तो कहीं पूर्णिमा कुछ गलत ना समझ बैठे। लेकिन कहे बिना वो रह भी नहीं पा रहा था। खैर, कॉलेज बंद होने के एक दिन पहले की बात है। आलोक खामोश सा कॉलेज के कैंपस में बैठा। वहां की दीवारों को घूर रहा था। तभी वहां पूर्णिमा आई। उस दिन पूर्णिमा ने आलोक से जो कहा उसे सुनकर उसकी आंखों में चमक आ गई। का हुआ? का सोचने लगी? कोई दिक्कत है तो मना कर दो। हम अकेले चले जाएंगे। अरे ये क्या कह रही हो? अब बगला गई हो का? हमको का दिक्कत होगा तुमको तुम्हारा गांव छोड़ने में? छोड़ देंगे। दोनों अपने-अपने गांव की ओर निकल पड़े थे। जो अगल-बगल ही थे। आलोक थोड़ा सा पूर्णिमा से अलग हट के बैठा था। लेकिन पूर्णिमा बार-बार उसे पकड़ लेती। आलोक को अच्छा तो लगता लेकिन फिर वो थोड़ा सा हट जाता। कई बार यह सिलसिला चला तब अचानक पूर्णिमा ने उससे बाइक रोकने के लिए कहा। का हुआ? अब काहे बाइक रोकने बोली हो? यही बताने के लिए कि तुम बहुत बड़े बैल हो। अरे अब का हो गया? काहे घुसा रही हो? तुम सच में बैल हो। हम बार-बार तुमसे चिपक रहे हैं और तुम हो कि हट जा रहे हो। कोनो कांटावा लगा है का हम में। अब वो बात कहे अच्छा तो हमको भी लग रहा था लेकिन हमको लगा कि तुम का सोचोगी? हम कुछु नहीं सोचेंगे। काहे कि हम तुमको प्यार करते हैं बहुत ज्यादा। तभी तो तुम्हारे साथ अकेले बाइक में बैठकर गांव जा रहे हैं। ये का कह रही हो? का हुआ? ऐसे चौंक काहे रहे हो? तुमको हम पसंद नहीं है तो इंकार कर दो। पसंद अरे तुमसे ज्यादा पसंद तो हमको कुछो नहीं है रे। अरे तुम्हरे बिना तो हम कुछ सोच ही नहीं पाते हैं। हम भी तुमको बहुत प्यार करते हैं। उस समय से जब तुम हमको देखो नहीं की थी। आलोक ने पूर्णिमा को सारी कहानी बताई। पूर्णिमा उसकी बातों को मुस्कुराते हुए सुनती रही। उसके बाद तो पूर्णिमा और आलोक का बाइक का सफर वो ऐसा यादगार सफर बन गया जिसे वे कभी भूल नहीं सकते थे। छुट्टियों से लौटने के बाद तो दोनों का प्यार अलग ही लेवल पर चल गया और वो लेवल था एक दूसरे के बिना एक सेकंड भी नहीं रह पाना। दोनों ने शादी का फैसला कर लिया। आलोक पुराने दिनों को याद कर रहा था। तभी उसके कानों में उसकी मां और बहन के चीखने की आवाज आई। आलोक पुरानी यादों की गलियों से बाहर आया। और फिर उसने जो देखा उसे देखकर उसकी आंखों में आंसू आ गए। पूर्णिमा अपने शरीर पर कैंची से लगातार वार किए जा रही थी। उसका पूरा बदन लहूलुहान था और वो पागलों की तरह हंसे जा रही थी। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया। पूरे एक सप्ताह बाद वो अस्पताल से डिस्चार्ज होकर आई। लेकिन अब वो पूरी तरह शांत रहती। ना कुछ खाना ना कुछ पीना। पूर्णिमा के माता और पिता कई बार उसे देखने के लिए आए। वे उसे समझाते लेकिन वह बस खामोश रहती और अपने कमरे की छत की ओर घूरती रहती। ऐसा लगता कि कोई कमरे की छत पर बैठा है। पूरे गांव में पूर्णिमा की ऐसी हालत की खबर फैल चुकी थी। आलोक के माता-पिता ने तांत्रिक का भी सहारा लिया। झाड़फूंक भी करवाया गया। लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। आलोक पूरी तरह टूट गया था। वो बस किसी तरह पूर्णिमा को फिर से पहले की तरह देखना चाहता था। लेकिन ऐसा संभव नहीं हो पा रहा था। वो बेचारा रात दिन रोता रहता। वो पल-पल अपनी प्रेमिका जो अब उसकी पत्नी भी थी उसको तिल-तिल कर मरते हुए देख रहा था। पूर्णिमा की माता-पिता की आंखें भी हमेशा भरी रहती। एक रात की बात है। वे दोनों गहरी नींद में थे। तभी उन्हें एहसास हुआ कि पूर्णिमा वहां आई है और उनसे रोते हुए कह रही है बाबूजी अम्मा हमको बचा लो हमको जीना है हमको मरना नहीं है हमको हमारे आलोक के साथ खुशी-खुशी रहना है ए अम्मा ए बाबूजी कुछ करिए ना बचपन में हमको कुछ होता था तो आप लोग हर वो कुछ करते थे जिससे हम ठीक हो जाते अब काहे नहीं कर रहे हैं हां बोलिए ना हमको बचा लीजिए ना तो ऊ हमको मार देगी। ऊ हमरे जैसी दिखती है बाबूजी। ऊ ऊ हमरे जैसी दिखती है अम्मा। रात के 2:30 बज रहे थे। पूर्णिमा की मां और बाबूजी अपनी बेटी के लिए बहुत ही परेशान थे। उनकी शादी के 10 साल बाद पूर्णिमा का जन्म हुआ था। ना जाने कितनी मन्नतें। कितनी दुआएं उसके मां-बाप ने एक औलाद के लिए मांगी थी। बहुत ही लाड़ प्यार में पली थी वो। पूर्णिमा को कुछ भी होता तो दोनों की जान निकल जाती। पुराने दिनों को वो दोनों याद कर ही रहे थे। तभी उनके घर के दरवाजे पर किसी के खटखटाने की आवाज आई। अरे इतनी रात को कौन होगा? तमाम आशंकाओं के बीच उन्होंने दरवाजा खोला। दरवाजे पर पिंटू था। पिंटू आलोक के परिवार का नौकर था। बाबूजी जल्दी चलिए। बहू रानी ने अनर्थ कर दिया है। आलोक के घर के बाहर चीखपकार मची हुई थी। आलोक उस तरफ फूट-फूट कर रो रहा था। जैसे कोई छोटा बच्चा तब रोता है जब उसकी कोई कीमती चीज खो जाती है। पूर्णिमा का शरीर घर के बाहर लगे आम के पेड़ पर लटका हुआ था। उसने फांसी लगा ली थी। चिता पर लेटी हुई पूर्णिमा का चेहरा अजीब सी खामोशी ओढ़े हुए था। जिस लाल जोड़े में आलोक उसे लेकर आया था वो उसी लाल जोड़े में चिता पर लेटी हुई थी। आलोक ने जब उसे मुखाग्नि दी तो उसे ऐसा लगा कि वो उसके बगल में आकर खड़ी हो गई है और उससे कह रही हो तुम एकदम बैल हो का? हमको विदा कर रहे हो। ऐसे ही चुम्मा ले लो ना एक बार। फिर हम तो राख हो जाएंगे। फिर किसको चुम्मा लोगे? किसको गले लगाओगे? आलोक का सब कुछ खत्म हो गया था। पूर्णिमा के बिना उसका दिल बिल्कुल नहीं लगता था। उसे हमेशा ऐसा लगता कि पूर्णिमा उसे बुला रही है। दो दिन बाद आलोक भी अपनी पूर्णिमा के पास हमेशा के लिए चला गया। पूर्णिमा की मौत के तीसरे दिन की बात है। आधी रात का समय था। उस दिन सुरू जोरों की बारिश हो रही थी। पूर्णिमा के माता और पिता सोने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन उन्हें नींद नहीं आ रही थी। दोनों की आंखों से लगातार आंसू बह जा रहे थे। ये सब का हो गया रे हमरे सामने हमरी बेटी हमरी इकलौती बेटी मर गई। हमरा दामाद मर गया और हम कुछ ना कर पाए। जोरों की हवा से उनके कमरे की खिड़की खुल गई। पूर्णिमा के पिता खिड़की बंद करने के लिए उठने ही वाले थे। तभी एक साया उनके घर के अंदर प्रवेश कर गया। बहुत ही भयानक चेहरा था उसका। वो कोई और नहीं। उनकी बेटी पूर्णिमा थी जो रो रही थी। अम्मा बाबूजी सोए नहीं आप लोग अभी तक। काहे अम्मा? काहे बाबूजी? का हुआ? अच्छा हमको याद कर रहे हैं आप लोग। बाबू जी अम्मा एक बात कहें आप लोग काहे नहीं बचाए हमको बोलिए ना हर बार हर मुसीबत हर बीमारी में आप दोनों साथ थे फिर इस बार काहे नहीं बचाए बेटी हम कैसे बचाते कैसे बचाते तुमको हां ये भी सही है आप दोनों कैसे बचाते हमको क्योंकि हमको मारने का इंतजाम तो आप दोनों ने ही किया था ये आप का कर रहे हैं दिमाग तो ठीक है ना आपका का? हां, ठीक है हमरा दिमाग। और तुम भी इसे ठीक कर लो। ठीक है कि पूर्णिमा हमारी इकलौती बेटी है। इसका क्या मतलब? हम लोग कोई भी फैसला ले लें। अरे गांव बिरादरी का जानती हो ना? अरे जीने नहीं देंगे वो हम लोगों को। पता है ना वो लड़का जिसने इसे प्यार के जाल में फंसाया है वो दूसरी जात का है। हां। तो क्या हुआ? है तो इंसान ही। देखो, भावुक होकर मत सोचो। एक ऊंची जात की लड़की किसी दूसरे जात में बिहाएगी तो पता है ना का होगा। तो फिर आपने शादी के लिए हां क्यों कर दी? हां तो हम का करते तुम देखी नहीं। कैसे चाकू हाथ में लेकर उस दिन वो बैठ गई थी और कह रही थी हमारी शादी आलोक से नहीं करेंगे तो हम नस काट लेंगे। पूर्णिमा की माता और पिता एक अजीब सी दुविधा में थे। वो बेटी से प्यार तो करते थे लेकिन बिरादरी से बगावत करने की उनमें हिम्मत नहीं थी। वो उसे गला घोट कर मार तो नहीं सकते थे लेकिन उसकी मौत का उन्होंने पूरा इंतजाम कर दिया था और इसके लिए उन्होंने सहारा लिया था खईछा का। खोईछा कोई साधारण रस्म नहीं है। यह तो मायके की वो आखिरी चिट्ठी होती है जो मां अपनी बेटी के आंचल में चुपचाप बांध देती है। बिना कुछ कहे बिना कुछ बोले बस आंखों की नमी से। चाहे शादी की विदाई हो या कोई तीज त्यौहार। मैंने तांत्रिक से बात कर ली है। हमें बस पूर्णिमा के खौछा में अन्य सामग्रियों के साथ कुछ और चीजें भी डालनी है जो तांत्रिक हमें देगा। हम ठीक तो कर रहे हैं ना जी। इस तरह गांव बिरादरी समाज की चिंता में अपनी बेटी का जीवन बर्बाद करना क्या सही है? पता नहीं। पर कोई चारा नहीं है। अगर नहीं करेंगे तो फिर वर्षों की हमारी और हमारी पुरखों की इज्जत मिट्टी में मिल जाएगी। इंसान रोटी के बिना जी लेगा। लेकिन इज्जत के बिना कैसे जिएगा? हां, हमें यह करना ही होगा। तांत्रिक की दी गई सारी सामग्री एक मां ने अपनी बेटी के खचे में बांध दी। जिस खंचे में उसे आशीर्वाद बांधना था उसने मौत बांध दी। अम्मा बाबूजी अब क्यों दुखी हैं आप लोग? गांव समाज बिरादरी के लिए ही तो यह सब किया आपने। शादी तो करा दी हमारी जिद पर लेकिन कभी दिल से आशीर्वाद नहीं दिया। अपनी बेटी का खून कर दिया आपने खून। खोईछा की परंपरा को भी बदनाम कर दिया। अरे ये कैसा समाज है? ये कैसी परंपरा है जहां कोई अपनी मर्जी से प्यार भी नहीं कर सकता। हम क्यों आपके घर जन्मे? क्यों? आप जैसे लोगों की गोद हमेशा सुनी रहनी चाहिए। पूर्णिमा के माता-पिता के पास कोई जवाब नहीं था। वो बस अपनी उस बेटी की बात को सुन रहे थे जो अब इस दुनिया में नहीं थी। वे दोनों बस उससे माफी ही मांग सकते थे जिसकी उन्होंने कोशिश भी की लेकिन पूर्णिमा कहां थी उनकी माफी को सुनने के लिए? वो तो चली गई थी। इस बेदर्द दुनिया से बहुत दूर और छोड़ गई थी सन्नाटा और सवार। यह कहानी आपको अच्छी लगी हो तो हमें सब्सक्राइब करें। हमारा Instagram और Facebook पेज जरूर फॉलो करें। और हां दोस्तों सब्सक्राइब करना भूलना मत।
16) https://youtu.be/0Le7WUI_xaI?si=qdClqUm2W7K2rK24
[संगीत] यह चैनल केवल मनोरंजन के लिए है। हम किसी भी तरह के अंधश्रद्धा को बढ़ावा नहीं देते। बारिश के कारण तुषार को आज ऑफिस से निकलने में देर हो गई थी। वैसे तो वो देर रात की बस से ही घर जाता था। लेकिन आज ऐसा लग रहा था जैसे आखिरी बस भी छूट जाएगी। अरे तुषार जल्दी कर। यह बस छूट गई तो घर कैसे पहुंचेगा? यह बारिश भी आज ही बरसनी थी। वो बस स्टॉप की ओर दौड़ता भागता गलियों से गुजर रहा था। और उसकी बस उसकी आंखों के सामने आगे बढ़ रही थी। बस ने रफ्तार पकड़ने से पहले वो बस में चढ़ गया। रोजमर्रा की जिंदगी की भागदौड़ कभी-कभी कितनी भारी हो जाती है। यह उसे ऐसे ही पलों में समझ आता था। दरवाजे पर खड़े होकर कुछ देर हाफने के बाद वो अपनी हमेशा वाली खिड़की के पास की कोने वाली सीट पर जा बैठा। बाहर बारिश हो रही थी। बारिश में ऐसी ठंडी हवा और बारिश की बूंदे उसकी आत्मा को सुकून दे रही थी। बिजली चमक रही थी और बादल अचानक जोर से गरज रहे थे। बस पकड़ने से पहले पूरी बस खाली थी। आखिरी सीटों पर सिर्फ तुषार ही था। शायद बारिश की वजह से लोग जल्दी निकल गए होंगे। जिससे बस खाली थी। कितना थक गया हूं आज। यह बारिश, ये भागदौड़ बस थोड़ा आंखें बंद कर लूं। आराम मिलेगा। कुछ देर बैठने के बाद तुषार को नींद आ गई। ठीक 2 मिनट बाद उसकी आंख खुली तो उसने देखा कि बस लोगों से खचाखच भरी थी। अरे ये क्या? अभी तो बस खाली थी। इतने लोग कहां से आ गए? एक स्टॉप पर इतने सारे लोग अचानक कहां से चढ़ गए? इतनी थकान और ऐसे मौसम में यह सवाल उसे छोटा लग रहा था। छोड़ यार ज्यादा मत सोच। थकान ने दिमाग खराब कर दिया है। उसने फिर से आंखें बंद की और सो गया। सफर के दौरान जब उसकी आंख दोबारा खुली तो बस फिर से पूरी तरह खाली थी। ये क्या हो रहा है? अभी तो बस भरी थी। कोई स्टॉप भी नहीं आया। फिर ये लोग कहां गायब हो गए? कुछ समझ नहीं आ रहा। बीच में कोई स्टॉप भी नहीं आया था तो वो भीड़ कहां गई? इसी सोच में डूबा हुआ तुषार को अचानक बीड़ी की तीखी महक महसूस हुई। एक धुएं का गुबार उसकी आंखों के सामने तैर रहा था। जैसे कोई रहस्य हवा में घुल रहा हो। उसने नजर घुमाई तो देखा उसके बाजू वाली सीट पर एक बूढ़ा आदमी बीड़ी पी रहा था। उसका चेहरा झुर्रियों से भरा था और उसकी आंखें ऐसी थी मानो रात के सन्नाटे को चीर रही हो। अरे अभी तो यह बस लोगों से भरी थी। अचानक सब कहां गायब हो गए? यह कैसे हो सकता है? 30 साल बेटा 30 साल से मैं हर रात इसी बस में सफर करता हूं। आधी रात के बाद इस बस में कोई इंसान चढ़ने की हिम्मत नहीं करता। भाई साहब आप भी ना इतने यकीन से कैसे कह सकते हैं? यह तो बस बारिश और थकान का असर होगा। कुछ नहीं। तुम्हें लगता है मैं झूठ बोल रहा हूं। एक साल पहले इसी स्टॉप पर इसी बस में मैं चढ़ा था। जिस स्टॉप पर अभी बस रुकी थी। उस रात कुछ ऐसा हुआ जो मेरे दिमाग में आज भी चक्कर काटता है। बूढ़े की आवाज में एक अजीब सी ठंडक थी जैसे वो कोई पुराना रहस्य खोलने वाला हो। उसने अपनी बीड़ी को एक तरफ रखा और तुषार की ओर झुक कर बोलना शुरू किया। उस रात बारिश वैसी ही थी जैसी आज है। बस खाली थी सिवाय मेरे। मैं खिड़की के पास बैठा था। जब अचानक मुझे लगा कि कोई मुझे देख रहा है। मैंने पलट कर देखा तो एक आदमी सामने की सीट पर बैठा था। उसका चेहरा अजीब था। उसकी आंखें खाली थी जैसे उनमें जिंदगी ना हो। वो चुपचाप मुझे घूर रहा था। मैंने कुछ कहना चाहा पर मेरी आवाज गले में अटक गई। अचानक उसने अपनी उंगली मेरी ओर उठाई और फुसफुसया। तू यहां नहीं होना चाहिए। अगले ही पल वो गायब हो गया जैसे हवा में मिल गया। अरे बाबा यह तो कोई पुरानी कहानी लग रही है। शायद आपने कोई सपना देख लिया हो। नींद में ऐसा लगता है कभी-कभी सपना बेटा मैंने उस रात के बाद कई रातें जाग कर बिताई। उस आदमी की आवाज मेरे कानों में आज भी गूंजती है। और सुन उस रात बस रुकी भी नहीं थी फिर भी वो गायब हो गया। लोग कहते हैं इस बस में आधी रात के बाद कुछ ऐसा घूमता है जो ना इंसान है। तुषार ने बूढ़े की बात को हल्के में लिया। उसका दिमाग थकान और बारिश की वजह से होने वाली उलझन पर टिका था। ये सब बकवास है। उसने खुद से कहा। बूढ़े लोग ऐसी कहानियां बनाते रहते हैं। फिर भी कहीं ना कहीं उसकी बातों ने तुषार के मन में एक अजीब सी बेचैनी जगा दी थी। चलो तुषार ज्यादा मत सोच। यह सब बस की सवारी और बारिश का नशा है। अभी घर पहुंच सो जा सब ठीक हो जाएगा। बूढ़े की रहस्यमई बातों को सुनकर तुषार का दिमाग भटक गया। उसकी थकान ने उसे फिर से नींद की आगोश में खींच लिया। वो एक जगह सिर टिका कर सो गया। लेकिन ठीक 5 मिनट बाद उसकी आंखें खुली। अंधेरे में बस का सन्नाटा और भी भारी लग रहा था। उसने इधर-उधर देखा और उसका दिल ढक से रह गया। वो बूढ़ा आदमी वहां नहीं था। ये क्या? अभी तो वो यहीं था। बीड़ी का धुआं उसकी आवाज कहां गायब हो गया? कुछ तो गलत है इस बस में। तभी तुषार की नजर सामने की सीट पर पड़ी। वहां एक आदमी बैठा था। अखबार पढ़ रहा था। रात के 1:00 बजे इस सुनसान बस में कोई अखबार पढ़ रहा था। उसका चेहरा अखबार के पीछे छिपा था और वो इतने ध्यान से पढ़ रहा था जैसे दुनिया की सारी खबरें उसी में समाई हो। तुषार की सांसे तेज हो गई। भाई साहब आप आप कौन है? इतनी रात को अखबार उस आदमी ने कोई जवाब नहीं दिया। तुषार ने खिड़की के बाहर देखने की कोशिश की। लेकिन बारिश की बूंदे और बिजली की चमक ने उसे और बेचैन कर दिया। उसने फिर से उस आदमी की ओर देखा और तभी उसने अखबार नीचे करना शुरू किया। जैसे ही अखबार नीचे हुआ, तुषार ने उसका चेहरा देखा खून से लथपथ सिर का एक हिस्सा कुचला हुआ जैसे किसी ने उसे बेरहमी से मारने की कोशिश की हो। उसकी आंखें खाली थी जैसे कोई आत्मा उनमें बाकी ना बची हो। ये क्या है? तुषार की चीख बस के सन्नाटे में गूंज गई। उसकी आंखें बंद हो गई और वो सीट पर सिकुड़ गया। अचानक एक ठंडी हथेली ने उसका कंधा पकड़ा। उसने डरते-डरते आंखें खोली तो वही आदमी सामने था। लेकिन अब उसका चेहरा बिल्कुल साफ था। कोई खून नहीं, कोई घाव नहीं। वो हल्के से मुस्कुरा रहा था। अरे भाई साहब क्या हुआ? इतना डर क्यों गए? आप ठीक तो हैं? पानी पिएंगे? आप आप अभी आपका चेहरा खून यह सब क्या था? मैं पागल तो नहीं हो रहा? डर गए ना? इस बस में रात को अजीब चीजें होती हैं। कुछ दिखता है कुछ गायब हो जाता। तुमने कुछ देखा? तो भूल जाओ। यहां रुकना मत। वरना उसकी बात अधूरी थी। लेकिन उसकी आवाज में कुछ ऐसा था कि तुषार का खून जम गया। उसने कांपते हाथों से उसकी पानी की बोतल ली और दरवाजे के पास जाकर अपने चेहरे पर पानी के छींटे मारे। दो घूंट पानी पीकर रुमाल से चेहरा पोंछते हुए वो अपनी सीट पर लौटा। लेकिन सीट पर वापस बैठते ही उसका दिल फिर से धक से रह गया। वो आदमी वहां नहीं था। ये क्या हो रहा है? अभी तो यहीं था। कहां गया? तभी बस के दरवाजे की ओर से एक आवाज आई। मैं यहां हूं दरवाजे के पास। तुषार ने देखा वो आदमी दरवाजे पर खड़ा था। अचानक बस की रफ्तार बढ़ी और वो चलती बस से कूद गया और जोर से किसी चीज से टकराने की और जोर से चिल्लाने की आवाज आई। तुषार का दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। उसने सोचा भागने का समय है। वो दरवाजे की ओर दौड़ा और किस्मत से उसी वक्त एक स्टॉप आ गया। वो बस से कूद पड़ा और बारिश में भीगता हुआ स्टॉप पर खड़ा रहा। बस धीरे-धीरे उसकी आंखों के सामने से गुजर रही थी। लेकिन अब उसने उस बस का असली रूप देखा। वो बस पूरी तरह आधी जाली हुए लग रही थी। जैसे उसका एक्सीडेंट हुआ हो और बस में बहुत सारे लोग थे लेकिन वो जिंदा नहीं थे। खिड़की से उसे एक हल्की सी मुस्कान दिखी। वही अखबार वाला आदमी और वो बूढ़ा आदमी जो अब भी उसे देख रहा था। तुषार की सांसे थम गई। बस जब तक उसकी नजरों से ओझल नहीं हुई वो वहीं खड़ा रहा। [संगीत] [संगीत] [संगीत]
17) https://youtu.be/1tuETfYhhu8?si=v586MVgjkPvHc0bP
[संगीत] [संगीत] हेलो दोस्तों, हम बड़े मेहनत से आपके लिए एनिमेशन हॉरर स्टोरी बनाते हैं। लेकिन आप में से सिर्फ 16% लोग ही हमारे चैनल को सब्सक्राइब करते हैं। अगर आप हमें सपोर्ट करोगे तो हमें मोटिवेशन मिलेगा। तो चलो जल्दी से सब्सक्राइब करो और हमें इस कहानी पे कम से कम 10,000 लाइक का टारगेट रखते हैं। ठीक है? कहते हैं कि समय को कोई नहीं रोक सकता। लेकिन त्रेता युग में एक साधना ऐसी भी थी जिससे कालचक्र को मोड़ा जा सकता था। देवताओं ने इसे कालचक्र अनुष्ठान कहा। एक ऐसा अनुष्ठान जो मृत्यु और जीवन के बीच की दीवार को गिरा सकता था। लेकिन जिसने भी इसे करने का प्रयास किया वो या तो समय में कहीं खो गया या फिर वह बन गया जो इस दुनिया में रहने योग्य नहीं था। [संगीत] राघव भीगे हुए कपड़ों में कांपते हाथों से गाड़ी से उतरता है। सामने बैठा है एक अघोरी लंबी चटाएं भस्म से सना शरीर आंखें बंद। मैंने सुना है आप मृत आत्माओं को वापस बुला सकते हैं। मृत को वापस बुलाना आसान नहीं है। तुमने किसे खोया है? मेरी पत्नी सुमन पिछले महीने एक हादसे में चली गई। मैं मैं उसे वापस चाहता हूं। समय का पहिया एक बार घूम जाए तो उसे पीछे मोड़ना विधि के विरुद्ध है। लेकिन लेकिन क्या कालचक्र अनुष्ठान यह अनुष्ठान इतना प्राचीन है कि इसे करने वाला स्वयं काल के गाल में समा सकता है। तुम्हें 12 रातें श्मशान में बितानी होंगी। हर रात तुम एक अलग समय में जाओगे। अगर तुम अंतिम रात तक जीवित रहे तो तुम्हारी पत्नी लौट सकती है। पर एक शर्त होगी। मैं हर शर्त मानने को तैयार हूं। तो कल रात से अनुष्ठान आरंभ होगा। राघव और सुमन की कहानी किसी आम जोड़े जैसी थी। लेकिन उनके बीच जो प्रेम था वो किसी भी आम प्रेम से कहीं अधिक गहरा था। सुमन उसकी दुनिया थी। उसकी हर सांस की वजह वे एक दूसरे के बिना एक पल भी नहीं रह सकते थे। एक हल्की बारिश वाली शाम सुमन बालकनी में खड़ी थी। राघव पीछे से आकर उसे बाहों में भर लेता है। राघव यह क्या कर रहे हो? कोई देख लेगा। तो क्या हुआ? पूरी दुनिया को पता चलना चाहिए कि मैं तुमसे कितना प्यार करता हूं। अच्छा और कितना प्यार करते हो। अगर कभी तुम्हें कुछ हो गया तो मैं जी नहीं पाऊंगा। पागल ऐसा कभी मत कहना। आप नहीं जानते। मैं सुमन के बिना नहीं रह सकता। वो मेरी दुनिया थी। उसकी हंसी, उसकी बातें, उसकी आवाज सब कुछ अब एक खाली सन्नाटे में बदल गया है। प्रेम गहरी शक्ति है। लेकिन क्या तुम जानते हो कि तुम क्या मांग रहे हो? हां, मुझे पता है। मैं जानता हूं कि प्रकृति के नियम से छेड़छाड़ कर रहा हूं। लेकिन मेरे लिए सुमन के बिना जीवन और मृत्यु में कोई अंतर नहीं है। अगोरी एक पल के लिए शांत हो जाता है और चिता की आग में कुछ भस्म डालता है। आग की लपटें अचानक तेज हो जाती हैं जैसे कोई छाया उनमें से निकलने की कोशिश कर रही हो। अगर तुम सच में तैयार हो तो सुनो। यह कोई साधारण अनुष्ठान नहीं है। हर रात तुम्हें समय की धारा में उतरना होगा। जो तुम देखोगे वो सिर्फ भूतकाल नहीं होगा बल्कि भविष्य भी हो सकता है। क्या तुम हर सच को स्वीकार कर सकोगे? सच कभी-कभी जो सत्य हमें नहीं पता होता वो हमारी आत्मा को सबसे अधिक डराता है। क्या तुम इस अनुष्ठान को पूरा कर सकोगे चाहे इसका परिणाम कुछ भी हो। राघव एक पल के लिए सोचता है। फिर उसकी आंखों में वही पुरानी चमक लौट आती है। सुमन को वापस पाने की लालसा। मैं कुछ भी सहन करने को तैयार हूं। तो कल रात से कालचक्र घूमेगा और जो होगा वो तुम्हारी आत्मा को भी बदल देगा। राघव की आंखों में एक अजीब मिश्रण था डर और आशा का। बारिश की बूंदे अब भी गिर रही थी। लेकिन शायद यह सिर्फ पानी नहीं था। शायद यह नियति की पहली दस्तक थी। रात का तीसरा पहर घना अंधेरा। श्मशान भूमि पर जलती हुई चिताएं, हवा में मंत्रों का गूंजता स्वर और धकती अग्नि की लपटें, चारों ओर सन्नाटा। लेकिन बीच में बैठा है अघोरी जो अनुष्ठान की सिद्धि में लीन है। अघोरी ने अपने सामने एक हवन कुंड बनाया। उसमें मनुष्य की अस्थियों का चूर्ण, कौवे के पंख और दुर्लभ जड़ी बूटियां डाली। राघव अचंभित होकर देख रहा था। अघोरी कोई साधारण तांत्रिक नहीं था। वो एक ऐसा साधक था जिसने मृत्यु और जीवन के बीच के पर्दे को हटा दिया था। उसके मंत्रों की शक्ति से वातावरण में कंपन होने लगा। यह राघव महसूस कर सकता था। राघव यह अनुष्ठान सामान्य नहीं है। इसे करने से पहले तुम्हें कुछ नियम समझने होंगे। समय के प्रवाह के साथ खेलना मृत्यु को आमंत्रण देने जैसा है। इस अनुष्ठान में 12 रातें लगेंगी। हर रात तुम एक अलग समय में प्रवेश करोगे। कभी अतीत में कभी भविष्य में। जो तुम देखोगे उसे समझने की कोशिश मत करना। उसे स्वीकार करो। लेकिन अगर मैं असफल हो गया तो अगर तुम बीच में इसे छोड़ने की कोशिश करोगे तो समय की धारा तुम्हें अपने साथ खींच लेगी। ना तुम जीवित रहोगे ना मृत। क्या मैं सुमन से बात कर पाऊंगा? शायद लेकिन याद रखो जो वापस आता है वो वही नहीं रहता। अगर सुमन लौटी भी तो क्या वो सच में वही होगी जिसे तुमने खोया था? मैं हर परिणाम के लिए तैयार हूं। तो अनुष्ठान आरंभ होता है। अघोरी ने अपने कटे हुए अंगूठे से रक्त की कुछ बूंदे अग्नि में डाली। मंत्रों का उच्चारण तीव्र हो गया। अग्नि भयंकर रूप से लहराने लगी। अनुष्ठान की पहली रात। राघव की आंखें अचानक खुलती है। वो किसी पुराने महल में खड़ा है। चारों ओर धूल और जलचर दीवारें अचानक एक हल्की हंसी गूंजती है। सुमन की हंसी। सुमन क्या तुम हो? वह आगे बढ़ता है। उसके सामने एक पुराना आईना रखा है। उसमें सुमन का प्रतिबिंब दिखाई देता है। लेकिन जैसे ही वह पास जाता है, प्रतिबिंब विकृत हो जाता है और एक काली परछाई बनकर गायब हो जाता है। फिर सब कुछ अंधेरा हो जाता है और वह वापस श्मशान में लौट आता है। यह क्या था? यह समय की पहली परत थी। यह बस शुरुआत थी। [संगीत] अनुष्ठान की दूसरी रात राघव को एक गहरी गुफा में छोड़ दिया जाता है। वहां कुछ साधु बैठे हैं। वे किसी अज्ञात भाषा में बातें कर रहे हैं। अचानक उनमें से एक उसकी ओर मुड़ता है। उसकी आंखें पूरी तरह सफेद हैं। तुम्हारी आत्मा एक प्रश्न का उत्तर चाहती है। लेकिन क्या तुम उत्तर सहन कर सकोगे? कौन हो तुम? साधु उसकी ओर इशारा करता है। राघव की आंखों के सामने एक भयानक दृश्य प्रकट होता है। सुमन दुर्घटना में नहीं मरी थी। उसे किसी ने मारा था और उस छवि में एक जाना पहचाना चेहरा दिख रहा था। राघव का अपना चेहरा। नहीं ये झूठ है। सब कुछ धुंधला हो जाता है और राघव वापस वर्तमान में लौट आता है। ये क्या था? यह झूठ था। मैंने सुमन को कभी नहीं मारा। समय केवल सत्य दिखाता है। लेकिन क्या यह सत्य था या एक भ्रम? यह तुम पर निर्भर करता है। राघव के माथे पर पसीना था। उसे पहली बार डर का एहसास हुआ था। अनुष्ठान की छठी रात अब तक राघव को हर रात अलग-अलग समय और स्थानों पर भेजा जा चुका था। लेकिन छठी रात वो अपने ही घर में था। सुमन जीवित थी। राघव तुम इतनी रात को यहां क्या कर रहे हो? राघव सन्न रह जाता है। यह असली सुमन थी। लेकिन कैसे? सुमन तुम जिंदा हो? तुम ऐसे क्यों पूछ रहे हो राघव? मुझे क्या होगा भला? मुझे तुम्हारी बहुत याद आ रही थी। मैं तो तुम्हारे सामने हूं पागल। मैं मरी नहीं हूं। तभी सुमन हंसती है। लेकिन उसकी हंसी धीरे-धीरे विकृत होती जाती है। उसके चेहरे पर कालापन उभरने लगता है और उसकी आंखें काली हो जाती हैं। राघव तुमने मुझे बुलाया। अब तुम मुझे छोड़कर नहीं जा सकते। राघव चीखता है और सब कुछ फिर से अंधकार में हो जाता है। हर रात राघव को अलग-अलग सुमन जैसी औरतों का सामना करना पड़ा। कभी वह उसे प्रेम से बुलाती। उसकी बाहों में समाने के लिए आगे बढ़ती तो कभी उसका चेहरा विकृत हो जाता और वो एक छाया में बदल जाती। कभी वो खून से सनी होती तो कभी वो मुस्कुरा रही होती। लेकिन उसकी आंखों में एक गहरी रहस्यमयी शून्यता होती। यह सिलसिला 12 रातों तक यूं ही चलता रहा और हर रात राघव की आत्मा और भी कमजोर होती गई। अचानक हवन कुंड से धुएं की एक लहर उठती है और उसमें से एक छवि उभरती है सुमन की। राघव तुमने मुझे वापस बुला लिया। हां सुमन अब हम हमेशा साथ रहेंगे। सुमन मुस्कुराती है लेकिन उसकी आंखों में कुछ अजीब है। राघव ध्यान से देखता है लेकिन उसकी भावनाएं उसे सोचने नहीं दे रही। अचानक अघोरी का ध्यान भंग होता है। वो घबरा कर उठता है और चिल्लाता है। राघव पीछे हटो। यह वो सुमन नहीं है जिसे तुम जानते थे। क्या मतलब? कालचक्र अनुष्ठान में कोई भी आत्मा वापस आ सकती है। लेकिन वो वही होगी या नहीं यह कोई नहीं जानता। राघव धीरे-धीरे पीछे हटता है। लेकिन सुमन आगे बढ़ती है। उसका स्वर कोमल होता है। लेकिन उसकी आंखें कुछ और कह रही थी। राघव मेरी बाहों में आओ। तुमने इतनी मेहनत की है। अब हमारे बीच कोई नहीं आ सकता। राघव उसके पास बढ़ता है। राघव तुमने मुझे बुलाया। अब तुम मुझे छोड़कर नहीं जा सकते। अधूरी अचानक हवन कुंड में राख डालता है। सुमन चीखती है। उसकी त्वचा धीरे-धीरे काली पड़ने लगती है। उसकी आंखें गहरे लाल रंग में चमकने लगती हैं। सुमन यह कोई आत्मा नहीं। यह एक राक्षसी है जिसने सुमन का रूप ले लिया है। अगर तुम इसके गले लग गए तो तुम भी इसी श्राप का हिस्सा बन जाओगे। राघव की आंखों के सामने सुमन की परछाई विकृत होती जाती है। उसकी हड्डियां टूटने लगती हैं। चेहरा लंबा और भयानक हो जाता है। यह नहीं हो सकता। मैंने तो सिर्फ सुमन को वापस लाने के लिए यह सब किया था। अधोरी एक और मंत्र पढ़ता है और हवा में कुछ फेंकता है। सुमन चीखती है। वो धीरे-धीरे जलने लगती है और कुछ ही पलों में राख बनकर उड़ जाती है। राघव घुटनों पर गिर जाता है। उसकी आंखों में आंसू हैं लेकिन उसके भीतर शून्यता बस चुकी थी। अघोरी उसकी ओर देखता है। उसकी आंखों में कोई दया नहीं। बस कठोर सत्य की छवि है। जो चला गया उसे वापस बुलाने का प्रयास हमेशा विनाश लाता है। तुमने प्रेम के लिए यह किया। लेकिन प्रेम का सच्चा अर्थ जाने बिना तो क्या सुमन सच में नहीं आ सकती थी? कालचक्र को मोड़ने की कोशिश करने वाले हमेशा पछताते हैं। मृत्यु और जीवन का संतुलन बना रहना चाहिए। राघव अपने चारों ओर देखता है। श्मशान की जलती हुई चिताएं अब भी उतनी ही शांत थी जैसे कुछ हुआ ही ना हो। लेकिन उसके भीतर सब कुछ खत्म हो चुका था। मृत्यु एक अटल सत्य है। एक पवित्र संतुलन जिसे प्रेम भी नहीं तोड़ सकता। खोए हुए को वापस लाने की चाह में राघव ने सीखा कि जीवन और मृत्यु के चक्र से छेड़छाड़ सांत्वना नहीं बल्कि अराजकता लाती है। सच्चा प्रेम शरीर से नहीं एहसास से होता है। जो हमारे दिल में हमेशा के लिए बसता है। अपनों की याद को संजोना ही सच्चा प्रेम है ना कि नियति से टकराना। [संगीत] आप सभी प्यारे सब्सक्राइबर्स का दिल से धन्यवाद। आपके प्यार और समर्थन के बिना हम यहां तक नहीं पहुंच पाते। अब हमारे पास एक और नया चैनल है लव एफएम एनिमेटेड लव स्टोरीज। हम आपसे अनुरोध करते हैं कि वहां भी अपना प्यार जरूर दिखाएं। हमारी कहानियां देखें और चैनल को सब्सक्राइब करें। आपका साथ ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। धन्यवाद। चैनल की लिंक डिस्क्रिप्शन में है। जरूर देखिए और सब्सक्राइब करना मत भूलिए। [संगीत]
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[संगीत] नमस्कार। इस वीडियो को शुरू करने से पहले मैं आप सभी को बताना चाहता हूं कि केवल 10% लोग ही हमारी वीडियो देखकर हमें फॉलो करते हैं। जबकि बाकी लोग वीडियो तो देखते हैं लेकिन सब्सक्राइब नहीं करते। आपसे गुजारिश है कि वीडियो को ज्यादा से ज्यादा लाइक और सब्सक्राइब करें ताकि हम आगे भी आपके लिए बेहतरीन वीडियो ला सकें। शुक्रिया। गांव के आखिरी छोर पर जहां कच्ची सड़कें धूल में गुम हो जाती थी, वहीं एक टूटे फूटे घर में रमेश अपने दो छोटे बच्चों के साथ रहता था। कुछ साल पहले उसकी पत्नी बीमारी के कारण चल बसी थी और तब से वह अकेला ही अपने बच्चों को पालने में लगा हुआ था। लेकिन अब गांव में काम की कमी और लगातार पड़ते सूखे ने उसकी जिंदगी को और कठिन बना दिया था। रमेश का बड़ा बेटा गोपी और छोटी बेटी राधा दोनों कई दिनों से भूखे थे। कभी कोई पड़ोसी रोटी दे देता तो कभी गांव की दुकान से बचा हुआ खाना मिल जाता। लेकिन यह रोज नहीं होता था। आज तीसरा दिन था जब घर में अनाज का एक भी दाना नहीं था। आंखों में आंसू लिए राधा ने मासूमियत से कहा। बाबा भूख लगी है। हां बाबा बहुत भूख लगी है। लेकिन मुझे थोड़ा सा खाने मिला तो भी चलेगा। रमेश ने अपने बच्चों को देखा। उसके दिल में दर्द की लहर उठी। लेकिन वो कर भी क्या सकता था? थक हार कर वह गांव में अपनी खस्ता साइकिल ले कोई काम ढूंढने निकला। पर हर जगह उसे वही जवाब मिला। अभी कोई काम नहीं है। भूख और निराशा से बेहाल रमेश के कदम अनजाने में श्मशान तक आ गए। वहां एक अजली चीता की लपटें अब भी ठंडी हवा में झूम रही थी। जलती लकड़ियों की चरमराहट के सिवा चारों ओर सन्नाटा था। उसने अपनी साइकिल बाहर खड़ी की और अंदर बढ़ा। चिता के सामने बैठकर वो अपनी हालत पर पछताने लगा। आंखों से आंसू बह निकले। घर जाकर बच्चों को क्या कहूंगा? वो बड़बड़ाया। अचानक एक भारी आवाज गूंजी। कौन हो तुम? रमेश ने चौंक कर सिर उठाया। उसके सामने एक बूढ़ा आदमी खड़ा था। चिता की बुझती लपटों की हल्की रोशनी में उसका चेहरा बौथा लग रहा था। उसने मोटी शॉल ओढ़ रखी थी और हाथ में एक पुरानी लकड़ी की लाठी पकड़ी थी। बूढ़ा पास आकर बैठ गया और रमेश को गौर से देखने लगा। फिर उसने शांत स्वर में पूछा। और रो क्यों रहे हो इस तरह? यह कोई अपना था क्या? रमेश ने गहरी सांस ली। नहीं बाबा मैं तो बस अपनी किस्मत पर रो रहा था। उसने झिझकते हुए पूछा पर आप यहां क्या कर रहे हैं? मुझे लगा था श्मशान में इस समय कोई नहीं होगा। मैं यहीं रहता हूं बेटा। शशान की देखभाल के लिए। शशान में आपको डर नहीं लगता? जो जिंदा हैं उनसे डरना चाहिए। मरे हुए कभी भी किसी का बेमतलब बुरा नहीं करते। रमेश चुप रहा। हवा में अब भी जलती चिता की गंध तैर रही थी। कुछ देर बाद बूढ़े ने धीरे से पास रखे भोजन की ओर इशारा किया। भूखे हो। रमेश ने सिर झुका लिया। खा लो लेकिन सिर्फ आज के लिए रमेश ने कांपते हाथों से चावल का गोला उठाया और जल्दी से मुंह में डाल लिया। लंबे समय बाद खाना मिलने पर उसकी आंखें नम हो गई। लेकिन जब उसने एक मुट्ठी चावल अपनी जेब में रख लिया तो बूढ़े की आंखें चमक उठी। उसकी आवाज अब भारी और गूंजती हुई थी। मैंने कहा था सिर्फ तुम्हारे लिए। रमेश घबरा गया। मेरे बच्चे तीन दिनों से भूखे हैं। मैं बिना उनके लिए कुछ लिए वापस नहीं जा सकता। आज तुम लेके जा सकते हो। आज मैं तुम्हें मना नहीं करूंगा। लेकिन फिर से यहां की किसी चीज को हाथ मत लगाना। नहीं तो तुम्हें उसका दाम चुकाना पड़ेगा। मैं नहीं आऊंगा बाबा। आपका बहुत-बहुत शुक्रिया। बूढ़े ने अपनी लाठी जमीन पर ठोकते हुए कहा, इंसान का लालच उससे कुछ भी करवा सकता है। भूख मजबूरी है। लेकिन लालच एक रोग है। और इस रोग की सजा बहुत भयानक होती है। अगर तुम फिर से यहां आए तो याद रखना इस बार तुम सिर्फ खाना नहीं लोगे। बल्कि ऐसा कुछ खो दोगे जिसकी तुमने कभी कल्पना भी नहीं की होगी। रमेश ने सिर झुका लिया। वो चुप रहा। उसके शरीर में एक सेहरन दौड़ गई। लेकिन बच्चों की भूख उसकी हर सोच पर भारी थी। रमेश थके कदमों से घर पहुंचा, टूटी हुई झोपड़ी के अंदर घना अंधेरा था। जैसे ही रमेश ने जेब से चावल के कुछ गोले निकाले, उसकी बेटी की आंखें चमक उठी। वो खुशी से चिल्लाई बाबा खाना और दोनों बच्चे लपक कर उसके पास आ गए। रमेश ने प्यार से उनके हाथों में चावल रखे। बस आज रात के लिए इतना ही है। धीरे-धीरे खाना। उसने नरम आवाज में कहा। बच्चों ने भूख से कांपते हाथों से चावल उठाए और जल्दी-जल्दी मुंह में डालने लगे। हर निवाला मानो उनके चेहरे पर नई रोशनी ला रहा था। छोटी बेटी ने मुस्कुराकर कहा, बाबा बहुत स्वादिष्ट है। रमेश ने उनकी खुशी देखी तो उसकी आंखों में आंसू आ गए। बच्चों के संतोष से उसका मन भर गया था। रमेश के मन में बूढ़े की चेतावनी गूंज रही थी। अगर फिर आए तो बहुत कुछ खो दोगे। अगले दिन भी वही हाल रहा। कोई काम नहीं मिला और बच्चों की आंखों में फिर वही भूख थी। आखिरकार रात होते ही रमेश के कदम फिर से श्मशान की ओर बढ़ने लगे। आज श्मशान में उसे बाबा कहीं नहीं दिखे। उसकी धड़कनें तेज हो गई थी। लेकिन उसके पास और कोई रास्ता नहीं था। वो अपने बच्चों को भूखा नहीं रखना चाहता था। उसने डरते-डरते किसी चिता के पास रखे खाने को उठाया और वहां से साइकिल उठाकर सीधा अपने घर के लिए निकला। पूरे रास्ते में उसे ऐसा लगता रहा जैसे उसके पीछे कोई आ रहा था। अगले चार दिनों तक यह सिलसिला चलता रहा। रमेश का डर अब कम हो चुका था। रमेश अब बिना किसी झिझक के चिता के पास रखा भोजन उठाने लगा। लेकिन पांचवें दिन सब कुछ बदल गया। उस रात वो फिर से श्मशान आया। खाना ढूंढते हुए उसे पूरी तरह जली चिता में कुछ चमकता दिखा। उसने उसमें लकड़ी से कुरेद के देखा तो वो सोने की अंगूठी थी। वो बहुत खुश हुआ। उसने और भी पूरी जली चिताओं को ढूंढना शुरू किया। बहुत सारा सोना मिलने के बाद भी वो ढूंढता रहा। उसे रोज चावल के दो निवालों के लिए श्मशान नहीं आना था। बहुत देर हो गई थी। रमेश तो मानो अपने होश में ही नहीं था। वो अब भी चिताओं को कुरेद रहा था कि तभी एक गहरी भयावह फुसफुसाहट हवा में गूंजी। मैंने तुझे चेतावनी दी थी। अब बहुत हो गया। अब बहुत हो गया। वो पीछे पलटा तो उसके सामने वही बूढ़ा खड़ा था। वो पहले से ज्यादा भूतिया और गुस्से में लग रहा था। रमेश के रोंगटे खड़े हो गए। वो हकलाते हुए बोला मैं मैंने मजबूरी में ऐसा किया। मेरे बच्चे भूखे थे। शशान के नियम तोड़े। मरे हुए का भोजन चुराया। मैंने तुझे पहले ही मना किया था लेकिन चार दिन तक खाना चुराया। मैंने तुझे रोका नहीं। लेकिन आज तेरा लालच और बढ़ गया। अब तुझे इसकी सजा मिलेगी। बाबा एक बार और बस आज के लिए माफ़ कर दीजिए। बूढ़े के होठों पर एक अजीब सी मुस्कान आई। अब बहुत देर हो चुकी है। इसका अंजाम तुझे भुगतना ही होगा। जैसे ही बूढ़े ने ये कहा, उसका शरीर काला पड़ने लगा। उसकी हड्डियां चटकने लगी। देखते ही देखते उसकी शक्ल विकराल हो गई। वो अब इंसान नहीं था। वो एक श्मशान का पिशाच था। अब तुझे इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। पिशाच ने भयंकर आवाज में कहा और रमेश की ओर बढ़ा। रमेश जान बचाते हुए बिना कुछ सोचे समझे तेजी से अपनी साइकिल की ओर भागा। पीछे से भयानक हंसी गूंज रही थी। तू भाग सकता है लेकिन बच नहीं सकता। रमेश। रमेश बिना रुके साइकिल पर बैठा और पूरी ताकत से पैडल मारने लगा। उसकी साइकिल बेतहाशा गांव की ओर दौड़ रही थी। उसके पीछे से उसी पिशाच की गुलाहट की आवाज सुनाई दे रही थी। डर और पसीने से वो बुरी तरह बेहाल हुआ था। घर पहुंचकर रमेश हांता हुआ अंदर घुसा। पर जैसे ही उसने देखा उसका दिल दहल गया। उसके बच्चे खुशी से खाना खा रहे थे। बाबा आज खाना बहुत स्वादिष्ट है। गोपी ने हंसते हुए कहा रमेश का खून जम गया। कौन लाया ये खाना? आप ही तो अभी खाना देकर बाहर चले गए। राधा बोली रमेश घबरा कर बाहर भागा। सड़क के किनारे एक धुंधली आकृति खड़ी थी। उसकी कद काठी, कपड़े सब कुछ रमेश जैसा। कौन है वहां? रमेश ने कांपती आवाज में पूछा। वो आकृति धीरे-धीरे उड़ी। रमेश का गला सूख गया। वो वही पिशाच था। मैं आ गया हूं रमेश। अब तुम्हें तुम्हारी गलती की कीमत चुकानी होगी। अब तेरे बच्चों की बारी है। रमेश जोर से चीखा। नहीं नहीं मुझसे गलती हो गई। मेरे बच्चों को मत छोड़ना। मैं जो कहूं करने को तैयार हूं। लेकिन जब वो अंदर दौड़ा, बच्चों की सफेद पड़ी लाशें जमीन पर थी। उनके चेहरे शांत थे। जैसे सो रहे हो। लेकिन उनकी आंखों के नीचे काले निशान थे। मानो किसी ने उनकी आत्मा खींच ली हो। पीछे से पिशाच की फुसफुसाहट आई। मैंने कहा था ना इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। रमेश की चीख पूरी रात गूंजती रही। गांव में कहा जाता है कि आज भी हर अमावस्या की रात कोई आदमी श्मशान में अपने बच्चों को पुकारता है। गोपी राधा बाबा आ गए। गोपी लेकिन कोई जवाब नहीं आता। क्योंकि जो मर चुके होते हैं वो कभी वापस नहीं आते। गोपी [संगीत] [संगीत]
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